ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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हिंदीसेवा का "सीजन" आया और गया

यूं तो पूरे विश्व में दो या तीन ही मौसम पाए जाते हैं, लेकिन भारत ही ऐसा देश है जहां पर छह ऋतुयें पाई जाती हैं। अर्थात छह सीजन होते हैं। वर्तमान में एक नया सीजन भी जुड़ गया है, वह है हिंदी सेवा का सी

ज्ञान बरास्ते चाय-पकौड़े

मेरे पति के एक निहायत शरीफ दोस्त हैं। निहायत शरीफ मैंने इसलिए कहा क्योंकि ऐसा उन्हें स्वयं लगता है और दूसरों को भी यही लगता है कि जब भगवान उन्हें बना रहे थे तो शराफत का पूरा डिब्बा ही खाली हो गया थ

प्रेम-कैदी

ऊँ ऊँ हूँ! छोड़ो न मुझे! खाना बनाना है? बच्चे भी आने वाले होंगे। क्या कहेंगे वे, मुझे तुम्हारे साथ इस तरह देखेंगे?
चलो थोड़ी देर और सही, उसके बाद बिलकुल नहीं।
तुम भी बड़े वो हो! छोड़ते ही नह

जुगलबंदी सम्मलेन में कवि

जुगाडू कवि दूर समुद्र पार जुगलबंदी भाषा सम्मेलन में पहुँच गए। हर सरकार में हलवा पूरी जीमने का उनका अधिकार है, वे हर सरकार में सत्ता के गलियारे में कूदते-फांदते रहते हैं और कोई न कोई जुगाड़ बिठा ही ल

श्रेष्ठता सिद्ध करनी होती है

कुत्ते की दुम को बारह वर्ष तक एक नली में रख तत्पश्चात सीधा हुआ देखने की लालसा रखने वाले गुमनाम वैज्ञानिक की शोध कुत्तों की अपेक्षा मनुष्यों पर अधिक प्रभावी सिद्ध हुई। अनपढ़ व सर्वोच्च शिक्षा प्राप्त

हिन्दी के पाठक कहाँ हैं?

मेरे आसपास ढेरों हिन्दी प्रेमी हैं जो सिर्फ हिन्दी दिवस के दिन ही हिन्दी बोलते हैं, सोच-सोच कर। बाकी दिनों वे हिन्दी की ढपली बजाते हैं और कमा खाते हैं। कई मित्र तो रोमन लिपि पर इतने फ़िदा हैं कि देव

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