ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-23 दूत हनुमान : भाग-2

संयोग से कहानी बनती है। वाल्मीकि एक कुशल कहानीकार हैं। समस्या जटिल हो सकती है, लेकिन कुछ तो रास्ता निकलना ही चाहिये! कवियों के लिये दुनिया स्वाभाविक होती है। उलझनें आती हैं और जाती भी हैं। उलझन में

समाधि-दर्शन : बिन्दु-बिन्दु विचार

हिन्दू-दर्शन में कपिल मुनि सांख्ययोग (ज्ञानयोग) के प्रवर्तक माने जाते हैं और पतंजलि योग-सूत्र (राजयोग) के। सांख्य-दर्शन के अनुसार (1) दैहिक, (2) भौतिक, तथा (3) दैविक दु:खों (क्लेशों) का निवारण किया

अनुवाद : संजीव त्रिपाठी वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-22 दूत हनुमान : भाग-1

कवि वाल्मीकि के अनुसार सीता की खोज में गये दूत हनुमान को दो तरह की अनुभूतियाँ हुईं। एक आतंरिक अनुभूति, जो भूख, प्यास, प्यार और दुःख के रूप में हमारे शरीर महसूस करता है और हमारे लिये एक अनुभव पैदा क

लंका में बन्दिनी सीता का संताप

वाल्मीकि मन के ज्ञाता हैं। ऐसा संभव है कि उनके समय मन की पीड़ा के बारे में सार्वजनिक विचार-विमर्श करने में समाज सक्रिय हो। और ऐसा भी संभव है कि वास्तविकता पर आधारित कहानी का आंतरिक विश्लेषण करना उस

गीता और अन्य गीताएँ

गीता शब्द सुनते ही हमें उस महान ग्रंथ की याद आती है जिसे अनेक लोग धर्मग्रंथ का सम्मान देते हैं, उसे "सर्वपापहरा" और "मोक्षदायिनी" मानते हैं, अतः उसे घर में रखना और पढ़ना अनिवार्य मानते हैं, (पर कैसी

मैं तुइ पाए आपन जीऊ

उत्तर प्रदेश के अमेठी अंचल के पास एक छोटा-सा नगर जायस भी है। इसी नगर में अवधी बोली के महाकवि मलिक मुहम्मद जायसी हुए; जिनका "पद्मावत" महाकाव्य संसार में प्रसिद्ध हुआ है।
सिंहलद्वीप की सुन्दरी प

वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-20 लंका में सीता अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

रामायण की कहानी पात्र सीता के इर्द-गिर्द बुनी गई है। ऐसा संभव है कि कहानी में राम की महानता की ख्याति हो, पर वाल्मीकि जीवन में नारी की महत्ता को दर्शाना चाहते हों? जब उन्होंने "नारद" से उस पुरुष के

पुनर्विचार की आवश्यकता आस्था और उत्सव

इस दुनिया में, विशेषरूप से पुराने देशों में आस्था और परंपरा के नाम पर तत्त्वज्ञान को इतने आवरणों और मौखिक व लिखित गर्द-ओ गुबार ने इस कदर ढँक लिया है कि उनके पीछे के सच को, और यदि है तो, थोड़ी बहुत त

सीता की खोज में लंका में हनुमान वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-19 अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

रामायण की कहानी में वाल्मीकि का सबसे प्रशंसनीय और कलात्मक योगदान हनुमान का पात्र है। हनुमान पूर्ण विकसित मानव नहीं, अपितु वानर प्रजाति के थे। वानर एक ऐसी प्रजाति है जो मनुष्य नहीं है लेकिन मनुष्य क

देश को खोकर कविता

आज सुकवि की मुश्किल यह है कि वह मानुषी जनतंत्र की माया के सामने
इतना निहत्था और असहाय है कि वह किससे शिकायत करे।

मूर्खो, देश को खोकर ही मैंने प्राप्त की थी यह कविता --दूर दिल्ली से

वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-18 पुष्पक विमान अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

कहानी को पाठकों के लिए रोचक बनाये रखने के लिए लेखन कला में दक्ष लेखक कभी-कभी कहानी के विवरण को शब्दों से सजाते-सँवारते हैं। लेखक अतिश्योक्तिपूर्ण और बनावटी से दिखने वाले दृश्य को भी सजीव सा बना देत

त्रिलोक-परम्परा : एक दृष्टिकोण

अथर्ववेद, श्रीमद्भागवत तथा पुराण में त्रिलोक-परम्परा यानि कि तीन विश्व यथा भूलोक, पाताल और देवलोक की व्यापक रूप से चर्चा हुयी है। गायत्री महामंत्र की तीन व्याहृतियों भू: (पार्थिव जगत), भुव: (प्राणम

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