ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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सड़क और पगडंडी
सड़क और पगडंडी

एक नगर की ओर जाता है और दूसरी गाँव की ओर। गाँव और नगर के बीच रास्ते तो कई हैं लेकिन समानताएं नहीं हैं। पिछले कई दशकों से इन्हीं रास्तों से लोग ग्रामीण जीवन से नगर की चकाचौंध की ओर भाग रहे हैं। लेकि ...

02-Jun-2017 03:07 AM 130
गांव विकास की दुविधापूर्ण तस्वीर
गांव विकास की दुविधापूर्ण तस्वीर

आज एक लंबे अरसे बाद गाँव पर चिंतन करने बैठा हूँ, अजीब-सी बात है मैंने दस मिनट में इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री खंगाल डाली। विकिपीडिया पर डाटा देख डाले और फिर मैं खुद को मिनिस्टरी आफ रुरल डवलपमेंट साईट ...

02-Jun-2017 03:02 AM 148
गाँव-देहात की सद्भावी परम्परा
गाँव-देहात की सद्भावी परम्परा

जो परिवर्तन विगत कई सौ साल में हुए हैं उससे कहीं अधिक परिवर्तन कुछ दशकों में ही इस पृथ्वी पर हो गए हैं। आगे इनमें और तेजी ही आएगी। ऐसे ही हमारे गांव-देहातों में भी परिवर्तन आए हैं और आते जा रहे हैं ...

02-Jun-2017 02:57 AM 100
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-16 राक्षस और उनका कुल अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-16 राक्षस और उनका कुल अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

वाल्मीकि एक "ऐन्द्रजालिक" जगत में रहते थे। उनके समय में आकाश से आकाशवाणी होती थी, वायु दौड़ती थी और जल गाना गाता था। समुद्र, पर्वत, वन और वृक्ष संवेदना दिखलाते थे। जीव-जंतु, पक्षी और जंगली जानवर मनु ...

01-May-2017 08:23 PM 203
आधी आबादी का पक्ष
आधी आबादी का पक्ष

पिछले महीने की आठ तारीख़ यानी आठ मार्च को जब दुनियाभर में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा था तो मेरे दिमाग़ की शिराओं में महिलाओं की सदियों से चली आ रही व्यथा कथा की चित्रमाला दौड़ रही थी। अपने ...

01-Apr-2017 12:25 AM 478
भौतिकवादी संस्कृति का वैश्वीकरण
भौतिकवादी संस्कृति का वैश्वीकरण

भौतिकवादी संस्कृति क्या है? इसकी किताबी परिभाषा क्या है? इसकी जमीनी पहचान क्या है? क्या इसका रूप अपरिवर्तनशील है? निरपेक्ष है? या समाज और समय की परिधि में परिवर्तनशील है? यदि यह सापेक्ष है तो तुलना ...

01-Apr-2017 12:21 AM 609
चार पुरुषार्थ - आधुनिक नजरिया
चार पुरुषार्थ - आधुनिक नजरिया

मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए हैं। ये हैं- धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष। लेकिन इन चारों का उद्देश्य क्या है? धर्म का उद्देश्य मोक्ष है, अर्थ नहीं। धर्म के अनुकूल आचरण करो तो किसके लिए? मोक्ष के ...

01-Apr-2017 12:16 AM 495
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15पञ्चवटी
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15पञ्चवटी

चारू चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही है जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई थी अवनि और अंबर तल में - राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त यह लिखकर अमर हो गये। पञ्चवटी की शुरुआत हुई वाल्मीकि से। वाल्मीकि के भौगो ...

01-Mar-2017 08:41 PM 691
अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब
अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब

छब्बीस वर्ष पूर्व मैं भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया आया था, यहाँ बस जाने के लिये। अपनी जड़ों से अलग होने के कारण यह स्वाभाविक था कि किसी भी प्रवासी की तरह यहाँ की भाषा, रहन-सहन खान-पान और संस्कृति को सीखते ...

01-Feb-2017 12:32 AM 774
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15 दण्डकारण्य हिंदी अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15 दण्डकारण्य हिंदी अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

रामायण की कहानी मुख्यतः तीन भोगोलिक भूभागों में बुनी गई है, उनमें से प्रथम है "अयोध्या" और उसका समीपवर्ती क्षेत्र, दूसरा दक्षिण भारत का विस्तृत वनक्षेत्र "दण्डकारण्य" और तीसरा समुद्र में स्थित "लंक ...

01-Jan-2017 01:06 AM 1476
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