ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-16 राक्षस और उनका कुल अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
01-May-2017 08:23 PM 136
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-16 राक्षस और उनका कुल अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

वाल्मीकि एक "ऐन्द्रजालिक" जगत में रहते थे। उनके समय में आकाश से आकाशवाणी होती थी, वायु दौड़ती थी और जल गाना गाता था। समुद्र, पर्वत, वन और वृक्ष संवेदना दिखलाते थे। जीव-जंतु, पक्षी और जंगली जानवर मनु

आधी आबादी का पक्ष
01-Apr-2017 12:25 AM 416
आधी आबादी का पक्ष

पिछले महीने की आठ तारीख़ यानी आठ मार्च को जब दुनियाभर में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा था तो मेरे दिमाग़ की शिराओं में महिलाओं की सदियों से चली आ रही व्यथा कथा की चित्रमाला दौड़ रही थी। अपने

भौतिकवादी संस्कृति का वैश्वीकरण
01-Apr-2017 12:21 AM 541
भौतिकवादी संस्कृति का वैश्वीकरण

भौतिकवादी संस्कृति क्या है? इसकी किताबी परिभाषा क्या है? इसकी जमीनी पहचान क्या है? क्या इसका रूप अपरिवर्तनशील है? निरपेक्ष है? या समाज और समय की परिधि में परिवर्तनशील है? यदि यह सापेक्ष है तो तुलना


चार पुरुषार्थ - आधुनिक नजरिया
01-Apr-2017 12:16 AM 419
चार पुरुषार्थ - आधुनिक नजरिया

मनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए हैं। ये हैं- धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष। लेकिन इन चारों का उद्देश्य क्या है? धर्म का उद्देश्य मोक्ष है, अर्थ नहीं। धर्म के अनुकूल आचरण करो तो किसके लिए? मोक्ष के

वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15पञ्चवटी
01-Mar-2017 08:41 PM 618
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15पञ्चवटी

चारू चन्द्र की चंचल किरणें, खेल रही है जल थल में, स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई थी अवनि और अंबर तल में - राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त यह लिखकर अमर हो गये। पञ्चवटी की शुरुआत हुई वाल्मीकि से। वाल्मीकि के भौगो

अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब
01-Feb-2017 12:32 AM 707
अमेरिकन-ऑस्ट्रेलियन संस्कृति के बिम्ब

छब्बीस वर्ष पूर्व मैं भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया आया था, यहाँ बस जाने के लिये। अपनी जड़ों से अलग होने के कारण यह स्वाभाविक था कि किसी भी प्रवासी की तरह यहाँ की भाषा, रहन-सहन खान-पान और संस्कृति को सीखते


वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15 दण्डकारण्य हिंदी अनुवाद : संजीव त्रिपाठी
01-Jan-2017 01:06 AM 1404
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-15 दण्डकारण्य हिंदी अनुवाद : संजीव त्रिपाठी

रामायण की कहानी मुख्यतः तीन भोगोलिक भूभागों में बुनी गई है, उनमें से प्रथम है "अयोध्या" और उसका समीपवर्ती क्षेत्र, दूसरा दक्षिण भारत का विस्तृत वनक्षेत्र "दण्डकारण्य" और तीसरा समुद्र में स्थित "लंक

प्रेम होता है तो हो, ध्रुव उसे क्यों करते हो...
01-Dec-2016 12:00 AM 1376
प्रेम होता है तो हो, ध्रुव उसे क्यों करते हो...

किसी-किसी के लिए वह सिर्फ एक अहसास भर है और किसी के लिए आहट-सा सुनायी पड़ता है। किसी के लिए वह ऐसी खुशबू है जो पलकों में इशारों की तरह बस गयी है। किसी के लिए वह एक ख्वाब-सा है और किसी के लिए हाथों म

चित्रकूट पर राम-भरत मिलन
01-Nov-2016 12:00 AM 2194
चित्रकूट पर राम-भरत मिलन

रामायण हमारे समाज की कहानी है। भाइयों की आपसी आदत, उनका बर्ताव और फिर उनमें स्नेह और सम्मान रामायण की कहानी है। बड़े भाई राम को अच्छा जाना जाता है, छोटे भाई उनको मानते हैं। आजकल के समाज का द्वेष, ईष


हिंदी वालों को कैसे जगाएं
01-Sep-2016 12:00 AM 2618
हिंदी वालों को कैसे जगाएं

हम अपनी मातृभाषा बोलने में ठीक वैसे ही शर्माते हैं जैसे कि एक मजदूर औरत के खून पसीने कि कमाई से पढ़ लिखकर बाबू बना बेटा अपनी उसी मजदूर माँ को, माँ कहते हुए शर्माता है। हिंदी उस रानी की तरह है जिसे ब

सुनो गौर से हिंदी वालों
01-Sep-2016 12:00 AM 2601
सुनो गौर से हिंदी वालों

हिंदी दिवस मनाने का प्रचलन करने वालों ने भले और कुछ भी सोचा होगा, लेकिन निश्चित तौर पर उन लोगों ने इस दिन की कल्पना इस रूप में नहीं की होगी कि इस दिन हिंदी की दुर्दशा (वास्तविक या काल्पनिक) पर सामू

चित्रकूट पर्वत श्रृंखला
01-Aug-2016 12:00 AM 446
चित्रकूट पर्वत श्रृंखला

जैसा कि पहले अन्य लेखों में भी देखा जा चुका है, वाल्मीकि अपने कवित्त में प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन करने में अद्वितीय है। उनके वर्णन से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो कवि को राम का वन में इस तरह घूमना


धर्म कर्म कछु नहीं उहंवां
01-Jun-2016 12:00 AM 1312
धर्म कर्म कछु नहीं उहंवां

रामानन्द के ¶िाष्य, संवादी कबीर ने स्वयं को न कभी धर्मगुरु कहा, न अवतार। वे स्वयं को न पैगंबर के रूप में देखते हैं, न नये धर्म के संस्थापक के रूप में। उनके नाम से पंथ का प्रवर्तन किया धनी धर्म

ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया
01-Jun-2016 12:00 AM 1339
ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया

1
बहुत बरस नहीं हुए जब कबीर-गायन सुनते हुये मेरी मुलाकात एक बूढ़े ग्रामीण से हुई। उन्होंने पहले काफी संकोच से मुझसे समय पूछा और फिर मुझे कबीर में भीगता देख हल्के से पूछा, ""क्या आप जानते हैं कि

लागा चुनरी में दाग़
01-Jun-2016 12:00 AM 1280
लागा चुनरी में दाग़

पण्डित कुमार गंधर्व की आवाज़ आ रही है। वे कबीर के करघे की लय पर गा रहे हैं-
दास कबीर जतन सों ओढ़ी, ज्यों की त्यों धर दीन्हीं चदरिया।
झीनी-झीनी बीनी चदरिया।
अपने कर्म की लय पर रचा गया क


द्विविधा भंजक कबीर
01-Jun-2016 12:00 AM 1387
द्विविधा भंजक कबीर

कर्मकाण्डी समाज को और कोई क्या झकझोरेगा? आज किसी को ये बातें कह दें, सामने वाला मटियामेट कर देगा। समाज तनावग्रस्त हो जाएगा। लेकिन, कबीर साहिब साधारण, तरीका साधारण, पर बात असाधारण।
सुनो! सबसे प

पुण्य सलिला गंगा
01-May-2016 12:00 AM 1278
पुण्य सलिला गंगा

वाल्मीकि प्रकृति कवि हैं। उनके कवित्व से घटनाएँ स्वाभाविक हो जाती हैं। वह आका¶ा, तारों, पर्वतों, मेघों, वनों, वृक्षों, प¶ाुओं, सर्पों, पक्षियों, नदियों, मछलियों, नारियों और नरों के प्रेक्

कस्मै देवाय हविषा विधेम
01-May-2016 12:00 AM 1607
कस्मै देवाय हविषा विधेम

जब भारतीय वैज्ञानिक विरासत की बात होती है, तो मन में ध्वनित हो उठता है ऋग्वेद के नासदीय सूक्त और हिरण्यगर्भ सूक्त के इन पद्यनुवादों का। ये पद्यानुवाद पं. जवाहरलाल नेहरू रचित पुस्तक "डिस्कवरी ऑफ़ इंड


अयोध्या नगरी
01-Mar-2016 12:00 AM 273
अयोध्या नगरी

रमायण ग्रन्थ की शुरुआत में ऋषि वाल्मीकि उस "आदर्श' मनुष्य की खोज के बारे में बताते हैं जो मनके चिंतन में है। उनको नारद ऋषि राम और रामायण कथा की रूपरेखा के बारे में बतलाते हैं। कहानी के नाटकीय विवरण

अब फिर एक नवजागरण हा
01-Feb-2016 12:00 AM 268
अब फिर एक नवजागरण हा

उन्नीसवीं शताब्दी के आरम्भ से भारत के नवशिक्षित बौद्धिकों में एक नई चेतना का उदय हुआ जिसके अग्रदूत राजा राममोहन राय माने जाते हैं। इस चेतना को यूरोप के रिनेसाँस के वजन पर अपने देश में ही पुनर्जागरण

ब्राहृर्षि वशिष्ठ
01-Jan-2016 12:00 AM 271
ब्राहृर्षि वशिष्ठ

ब्रहृर्षि, वैदिक महाकाव्यों के अनुसार ऋषियों की श्रेणी में सबसे ऊँचा पद है, और इस पद पर साथी ऋषि उसको शोभित करते थे, जिसने जीवन में सबसे ज्यादा ज्ञान प्राप्त कर लिया हो। इस पद के लिये कोई विधिवत प्

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