ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
विदेशी छात्रों की कारकपरक त्रुटिया
CATEGORY : तथ्य 01-Mar-2016 12:00 AM 658
विदेशी छात्रों की कारकपरक त्रुटिया

विदेशी छात्र एवं छात्राएं हिंदी सीखने के लिए भारत आते हैं अथवा अपने ही देश में हिंदी सीखते हैं, उनकी सीमाएं और शक्तियां भिन्न प्रकार की होती हैं। प्रत्येक छात्र अपने देश की भाषा की संरचना के अनुसार हिंदी को समझने की चेष्टा करता है। अनेक देशों में अंग्रेज़ी के माध्यम से हिंदी सिखाई जाती है। कर्ता, क्रिया और कर्म की क्रमिकता में हिंदी वाक्य संरचना अंग्रेज़ी विन्यास के लगभग उल्टी होती है। अंग्रेज़ी के प्रीपोज़ीशंस को जब वे हिंदी पर लागू करने का प्रयास करते हैं तो विभक्तियां बदल जाती हैं अथवा ग़ायब हो जाती हैं। कारक चिह्नों का प्रयोग उल्टा-पुल्टा हो जाता है।
दूसरी बात यह कि वे पुस्तकों और शब्दकोशों के माध्यम से हिंदी व्याकरण और शब्द-रूपों को जानने का प्रयास करते हैं। कई बार सुखद आश्चर्य होता है कि जो हिंदी शब्द हमारे देश में आम बोलचाल में नहीं प्रयुक्त होते, वे उनको शब्दकोशों के माध्यम से ज्ञात होते हैं। अब से लगभग पच्चीस वर्ष पहले रूस की कुछ छात्राएं हमारे घर आर्इं थीं। मेरा पुत्र रॉक क्लाइÏम्बग पर गया था। उन्होंने पूछा, कहां गया है तो मैंने बताया कि वह अपने स्कूल की ओर से रॉक क्लाइÏम्बग के लिए गया है। वे रॉक क्लाइÏम्बग समझी नहीं, क्योंकि उस काल में रूसी लोगों को अंग्रेज़ी बिलकुल नहीं आती थी। मैं तरह-तरह से बताने का प्रयास करती रही कि पहाड़ पर चढ़ते हैं। एक खेल होता है। मिलकर ऊपर चढ़ते हैं। रस्सी ले जाते हैं। इतने सारे वर्णन के बाद अचानक इरीना साह्क्यान ने कहा "ओह, पर्वतारोहण'! रूसी कन्या के मुख से पर्वतारोहण शब्द का शुद्ध उच्चारण सुनकर मैं हैरान रह गई।
विदेशी छात्र भाषा को लगन और निष्ठा से सीखते हैं। शब्दों के प्रति उनका आकर्षण जिज्ञासा से पूर्ण और तल्लीनता से भरा होता है, लेकिन विभक्तियों वाली ग़लतियां प्रायः सभी विदेशी विद्यार्थी करते हैं। मैं ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर के एक स्कूल में कुछ समय के लिए पढ़ने-पढ़ाने जाती रही हूं। वहां अंग्रेज़ी सीखती थी और हिंदी सिखाती थी। सिडनी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में भी मैंने विदेशी विद्यार्थियों से सम्पर्क साधा जो हिंदी और उर्दू सीखते थे। वहां प्रो. हाशिम दुर्रानी विभिन्न देशों से आए हुए बालक-बालिकाओं को हिंदी-उर्दू सिखाते थे। मैंने कुछ समय वहां के विभाग में भी बिताया और ये पाया कि कारक विभक्तियों की जो ग़लतियां वे करते हैं, वे प्राय: इस प्रकार हैं।
कर्ता कारक (ग़्दृथ्र्त्दठ्ठद्यत्ध्ड्ढ क्ठ्ठद्मड्ढ) संबंधी ग़लतियां
"ने' के प्रयोग :
1. मैं उसे चॉकलेट दिया। (मैंने उसे चॉकलेट दी)
2. लोग बाज़ा बजाए। (लोगों ने बाजे बजाए।)
3. जॉर्ज पूछा। (जॉर्ज ने पूछा।)
4. आर्टी मछली खाया। (आर्टी ने मछली खाई।)
5. मार्कोस पैन दिया। (मार्कोस ने पैन दिया।)
"ने' का प्रयोग कर्ता कारक में होता है। इन उदाहरणों में हमने देखा कि "ने' का प्रयोग नहीं किया गया। यह भी देखा कि क्रिया को कर्म के स्थान पर कर्ता से जोड़कर लिंग-निर्णय लिया गया।
भारतीय मूल का एक ऑस्ट्रेलियाई बालक हमारे घर आया करता था। हिंदी फ़िल्म-संगीत उसे बेहद पसंद था। "ने' का प्रयोग सिखाने के लिए मैंने उसे फ़िल्म "पाकीज़ा' का एक गीत सुनाया- "इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा।' गीत में "इन्हीं लोगों ने' तीन बार दोहराया गया था। मैंने भी उसे तीन बार दोहराकर बताया कि "ने' लगाना क्यों आवश्यक है। इसी प्रकार दूसरा गीत भी उदाहरण बतौर सुनाया- "श्याम ने बंसी बजाई, राम की लीला रंग लाई।'
गीतों के ज़रिए कर्ता कारक के बहुत सारे उदाहरण दिए जा सकते थे। अर्थात "ने' के प्रयोग की बहुत सारी समस्याओं का निदान फ़िल्मी गीतों के माध्यम से भी संभव लगा।

कर्म कारक (ग्र्डत्र्ड्ढड़द्यत्ध्ड्ढ क्ठ्ठद्मड्ढ) संबंधी ग़लतियां
"को' के प्रयोग :
कर्म कारक में "को' विभक्ति होती है, जो प्राय: कर्म के साथ लगती है। अनेक क्रियाओं के साथ भी "को' जुड़ता है, जैसे-- दौड़ना, सोना, पुकारना, डांटना आदि। सर्वनामों के साथ "को' परसर्ग जुड़ता है। "को' परसर्ग का प्रयोग कर्ता के साथ भी हुआ करता है। "को' के प्रयोग के व्याकरण में अनेक नियम हैं। इसके विस्तार में मैं नहीं जा रही, लेकिन "को' से संबंधित जो त्रुटियां होती हैं, उन पर ध्यान दिलाना चाहती हूं। एक मुख्य ग़लती यह होती है कि अनेक विदेशी छात्र "को' की जगह "का' का प्रयोग करते हैं।
--उसका जुकाम हो गया। (उसको जुकाम हो गया।)
"को' के प्रयोग की अन्य त्रुटियांं
डेविड मार्कोस किताब दिया। (डेविड ने मार्कोस को किताब दी।)
फिलीपे बाज़ार जाना चाहिए। (फिलीपे को बाज़ार जाना चाहिए।)
हम लोग विश्वविद्यालय जाना चाहिए। (हम लोगों को विश्वविद्यालय जाना चाहिए।)
अब आप जाना चाहिए। (अब आपको जाना चाहिए।)
वह लड़की देखा। (उसने लड़की को देखा।)
"को' का प्रयोग सिखाने के लिए कई गीत बताए जा सकते हैं, जैसेे
- छूकर मेरे मन को
- सांसों को ज़रूरत है तेरी
- चुरा लिया है तुमने जो दिल को

करण कारक (क्ष्दद्मद्यद्धद्वथ्र्ड्ढदद्यठ्ठथ् क्ठ्ठद्मड्ढ) ग़लतियां
"से' के प्रयोग :
करण कारक में "से' से संबंधित त्रुटियां होती हैं, जहां विदेशी छात्रों द्वारा अपनी भाषा की सोच के कारण, "से' के स्थान पर कोई अन्य परसर्ग लगा दिया जाता है।
मेरा पर्स को रूमाल गिरा। (मेरे पर्स से रूमाल गिरा।)
तुम औज़ार को काम करो। (तुम औज़ार से काम करो।)
मैंने सब्जी चाकू में काटा। (मैंने सब्जी को चाकू से काटा।)
अन्नू रमेश को मिलकर आया। (अन्नू रमेश से मिलकर आया।)
मैं रेल को आई हूं। (मैं रेल से आई हूं।)
"से' का प्रयोग सिखाने के लिए संभावित गीत, जैसेे
बीड़ी जलइले जिगर से पिया....
जीवन से भरी तेरी राहें....
जी हम तुम चोरी से, बंधे इक डोरी से.....

सम्प्रदान कारक (क़्ठ्ठद्यत्ध्ड्ढ क्ठ्ठद्मड्ढ) संबंधी ग़लतियां
"के लिए' के प्रयोग
धीरज पिता को कुर्ता लाया। (धीरज पिता के लिए कुर्ता लाया।)
सेहत को व्यायाम करो। (सेहत के लिए व्यायाम करो।)
फ़िल्मी गीत
- ग़म उठाने के लिए मैं तो जिए जाता हूंं
- लव के लिए कुछ भी करेगा
- हम बने तुम बने इक दूजे के लिए
- कल की हसीन मुलाक़ात के लिए
- शादी के लिए मैंने रज़ामंद कर ली।

अपादान कारक (ॠडथ्ठ्ठद्यत्ध्ड्ढ क्ठ्ठद्मड्ढ) संबंधी ग़लतियां अपेक्षाकृत कम होती हैं
"से' के प्रयोग/ पृथक होने तथा तुलना का बोध
फ़िल्मी गीत
- तुम मुझसे दूर चले जाना ना, मैं तुमसे दूर चली जाऊंगी।
- आज पुरानी राहों से मुड़ के मुझे आवाज़ न दो।
- तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती, नज़ारे हम क्या देखें?
- इस मोड़ से जाते हैं।

संबंध कारक (क्रड्ढदड्ढद्यठ्ठद्यत्ध्ड्ढ क्ठ्ठद्मड्ढ) संबंधी ग़लतियां
"का' "की' "के' "रा' "री' "रे' के प्रयोग :
संबंध कारक में का, के, की से जुड़ी हुई त्रुटियां प्रायः एकवचन और बहुवचन से जुड़ी हुई हैं। कई बार का, के, की के स्थान पर को का प्रयोग किया जाता है। जैसेे
चालीस रुपया को आम। (चालीस रुपए के आम।)
बीस रुपया के पैंसिल। (बीस रुपए की पैंसिल।)
शैली को दुकान। (शैली की दुकान।)
लकड़ी को मेज। (लकड़ी की मेज।)
प्लास्टिक को खिलौना। (प्लास्टिक का खिलौना।)
मारिया का लड़की। (मारिया की लड़की।)
तुमका हाल क्या है? (तुम्हारा हाल क्या है?)
विदेशी छात्र प्राय: "रा' "री' "रे' की ग़लतियां कम ही करते हैं। कई बार संबंध कारक में "वाले' शब्द का प्रयोग अतिरिक्त कर दिया जाता है। यह अपोस्ट्रफ़ी एस के प्रयोग के समय होता है। जैसे अशोक्स बुक।
-- अशोक वाले का पुस्तक।
फ़िल्मी गीतों से उदाहरण
- पल पल दिल के पास तुम रहते हो।
- नज़र के सामने, जिगर के पास, कोई रहता है।
- आजकल तेरे मेरे प्यार के चरचे हर ज़ुबान पर।
- दिल के झरोखे में तुझको बिठा के (दूसरा "के' "कर' के अर्थ में है)
- रिमझिम के तराने ले के आई बरसात (यहां दूसरा "के' भिन्नार्थी है)
अधिकरण कारक (ख्र्दृड़ठ्ठद्यत्ध्ड्ढ क्ठ्ठद्मड्ढ) संबंधी ग़लतियां
"से' के प्रयोग :
विभक्तियों को परिवर्तित करने की ऐसी ही त्रुटियां अधिकरण कारक में, "में', "पे' और पर के प्रयोगों में देखी जा सकती हैं।
मेज को पुस्तक है। (मेज पर पुस्तक है।)
अमीर से क्रोध आता है। (अमीर पर क्रोध आता है।)
मंदिर को शांत रहा चाहिए। (मंदिर में शांत रहना चाहिए।)
तुमने पर्स कितना को खरीदा? (तुमने पर्स कितने में खरीदा?)
साइमन के घर को फ्रिज है। (साइमन के घर में फ्रिज है।)
फ़िल्मी गीतों से उदाहरण
- लागा चुनरी में दाग, छुड़ाऊं कैसे, घर जाऊं कैसे?
- मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे।
- कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता हैै (स्थानबोधक)
- किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसारर (स्थानबोधक)
- भोर भए पनघट पे मोहे नटखट स्याम सताए। (स्थानबोधक)
- कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आयाा
 (स्थानबोधक व समयबोधक)
- बदन पे सितारे लपेटे हुएए (स्थानबोधक)

सम्बोधन कारक (ज्दृड़ठ्ठद्यत्ध्ड्ढ क्ठ्ठद्मड्ढ)
विदेशी छात्र संबोधन संबंधी ग़लतियां अपेक्षाकृत कम करते हैं। कभी कभी वे दुविधा में पड़ जाते हैं जब किसी संबोधन चिह्न की पुनरावृत्ति होती है अथवा कोई संबोधन चिह्न किसी शब्द में घुल-मिल जाता है। जैसे ओ ओ ओ ओओ अथवा ओह्हो, ओहरे आदि। फिल्मी गीतों के उदाहरण उनकी भ्रांतियां शीघ्र दूर कर सकते हैं।
फ़िल्मी गीतों से उदाहरण :
- ओ ओ ओ ओ ओ वुमनिया!
- ओअ ओओ, सजना, बरखा बहार आई, रस की फुहार लाई, अंखियों में प्यार लाई, ओअ ओओ, सजना।
- ओह रे ताल मिले नदी के जल में।
- माई री, मैं कासे कहूं पीर अपने जिया की माई री!
- क्रेज़ी किया रे।
- अरे रे अरे ये क्या हुआ?
हिंदी को विदेशी भाषा के रूप में सिखाते समय, हिंदी के निजी-विशिष्ट चरित्र पर ध्यान दिलाया जाना चाहिए। वाक्य संरचना हिंदी की अपनी प्रकृति के अनुरूप हो और इस प्रकार सीखने, सिखाने की प्रक्रिया में विभक्ति संबंधी त्रुटियां दूर की जाएं। फ़िल्मी गीत इस क्षेत्र में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 10.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^