ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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पिता और कवि
पिता और कवि

पिता अपनी एक कविता रचते हुए कहते हैं कि – बाँस की पोर ने मुझे पहना है और मेरे भीतर कोई अज्ञात अँगुलियाँ उसे छूती रहती हैं जैसे वे मुझमें कोई स्वर ढूँढ रही हों । उनका यह भाव जानकर लगता है कि प ...

08-Jul-2017 08:13 PM 64
एक-वचन और बहु-वचन के द्वन्द्व
एक-वचन और बहु-वचन के द्वन्द्व

जब भी "संस्कृति' शब्द बहस में आता है, भारत का समूचा बौध्दिक जगत और दलीय राजनीति ग़फलत के गर्क में पड़ जाती है। क्योंकि, सबसे पहले तो उनके सामने इसकी "परिभाषा' का ही प्रश्न आकर खड़ा हो जाता है और वह हर ...

01-Feb-2016 12:00 AM 459
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