ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
वाल्मीकि रामायण : आधुनिक विमर्श-25 दूत हनुमान : भाग-4
01-Feb-2019 03:00 PM 768     

हनुमान सुग्रीव का मन्त्री था। सीता की खोज में सुग्रीव ने हनुमान को दक्षिण दिशा की ओर भेजा था। दक्षिणी ओर में सुग्रीव का दख़ल नहीं था। उसने यह भी सुना था कि दक्षिण के अधिवासी रुक्ष थे। यद्यपि सीता की खोज हनुमान का पहला काम था, दक्षिणी दिशा के अधिवासियों का बल और शक्ति निरूपण उसने अपना कर्तव्य समझा था। सीता की ठाँव कराने के बाद हनुमान सोचने लगा - "रावण की शक्ति और बल की कैसे परीक्षा की जाय?"
राजदूत राज़ से काम करता है। राजा बनने के लिये दूसरों को बाँधना या मारना ज़रूरी होता है। राजा बनने के बाद गादी सम्हालना और राज्य बढ़ाना भी ज़रूरी होता है। यह काम अच्छे मन्त्री के जरिये किया जाता है। मन्त्री निवासियों के ऊपर नज़र रखता है और सीमा के बाहर की ख़बर पर अन्दाजा लगाता है। हनुमान ऐसे एक मन्त्री थे जिनके ऊपर सुग्रीव का पूरा विश्वास था। हनुमान भी अपनी तरफ़ से सुग्रीव की गादी बचाये रखने में पूरा साथ देते थे।
"क्या रावण सुग्रीव का शत्रु हो सकता है? क्या सुग्रीव और उसकी वानर सेना रावण की वाहिनी से जूझ सकते हैं? रावण की सेना में कैसी शक्ति है? ये सबको मैं पता नहीं कर सकता जब तक रावण को और उसकी सेना को अपने सामने न देख पाऊँ!"
हनुमान सोचने लगा - "किसी की शक्ति परीक्षण के लिये चार उपायों से चेष्टा की जाती है - साम, दान, भेद और दण्ड! इधर कौन-सा उपाय काम करेगा?"
"राक्षसों का धन्धा अलग़ होता है - फैसला का रास्ता ठीक नहीं लगता। साम का उपाय छोडो! इनमें तो इतनी दौलत है, इनको दान की ज़रूरत कहाँ है? भेद कर सकते हैं, लेकिन निष्ठुर राक्षस भेदकारी को फ़टाफ़ट मार डालेगा! चलो, दण्ड ही ठीक है। जितना हो सके, इनको मार डालना चाहिये! शायद इनकी मग़ज में सूझबूझ आ जायगी!"
हनुमान ने सोचा - "इनको लड़ाई के लिये ललकारूँ कैसे? पहले तो उस प्राचीर पर प्रहरी को मैंने अपनी मुठ्ठी से चूर कर दिया! हो सकता है कि इनकी ताक़त ज्यादा नहीं है! तो भी रावण की शक्ति से शंकित रहना चाहिये। थोड़ा कुछ गड़बड़ मचा दूँ, फिर देखूँ आगे क्या होता है! कुछ भी हो, तो मुझे निकल के भागना है!"
पेड़ के ऊपर बैठकर हनुमान ने सामने भरे हुए बगीचे पर नज़र डाली। "इस बगीचे को ऐसे तोड़माड़ कर दूँ जैसे सूखी लकड़ी आग़ से ख़ाक बन जाती है! रावण अपने हाथी, घोड़ा और वाहिनी के साथ लड़ने को आ जायगा! जोरदार लड़ाई बनेगी! वाहिनी को चूरमार करके मैं निक़ल जाऊँगा!" हनुमान अपनी शक्ति पर आस्था रखते हैं - पीछे की कई लड़ाई में शायद उनकी परीक्षा हो चुकी है!
हनुमान काम में लग गये। उन्हें बगीचे के पौधों और बनी हुई कृतियों को नष्ट करने में देर नहीं लगी! जल्दी ही रावण की अशोक वाटिका उजाड़ जंगल जैसी दिखने लगी! सिर्फ सीता के आसपास के पौधों के ऊपर उन्होंने हाथ नहीं लगाया। सीता पर नज़र रखने वाली राक्षसियों ने सीता को पूछा - "यह बन्दर कौन है?" सीता ने धीरज़ रखकर जवाब दे दिया - "यह राक्षसों का मामला है, मुझे क्या पता!" राक्षसियों ने लाचार होकर रावण को खबर की।
रावण ने सुना "एक बन्दर बगीचा बरबाद कर रहा है!" उसने ध्यान नहीं दिया। फिर उसको मालूम हुआ कि बगीचे को काफी नुकसान हुआ है! बगीचे के रखवालों को उन्होंने तुरन्त खबर भेजी और बगीचा की रक्षा करने का आदेश दिया। हनुमान ने उन मालियों को पीट के भगा दिया और फिर सोचा - "रावण निकला नहीं! चलो, कुछ इमारतें तोड़ते हैं। तोड़ने की आवाज़ से शायद काम बन सकता है!"
इस बार हनुमान ने "जय श्री राम" नारा दिया और आगे की इमारतों को तोड़ना शुरू किया। कभी-कभी जोर से "जय लक्ष्मण" और "जय सुग्रीव" भी चिल्लाने लगा। "मैं लंका चूरने आया हूँ! इसको चूरमार करके मैं लौट जाऊँगा! तुम सब देखते रहोगे!" हनुमान ने सोचा कि उसकी आवाज़ रावण तक पहुँच जायगी और रावण खुद ही निकलेगा! लेकिन और कोई मामूली पहरेदार आ गये। हनुमान ने अपनी मुठ्ठी से उन सबको मार डाला। उसने फिर ललकारा - "सैकड़ों वानरों की सेना सारे विश्व पर मँडरा रहे हैं! उनमें मज़बूती है! वे फौरन लंका आ जायेंगे! कोई रावण उनके सामने नहीं टिकेगा!" वह जोर से रावण का नाम उच्चारण करता था - शायद रावण डर जाय!
रावण ने अपने सेनापति प्रहस्त के लड़के जम्बुमाली को गढ़ रक्षा के लिये आगे भेजा। रथों और घोड़ों से सज़्जित होकर जम्बुमाली सामने आ गया। हनुमान ने उसको पत्थर और पेड़ों से पीटा। जम्बुमाली का सारा दल ख़लास हो गया। वह खुद ही मर गया। फिर रावण ने अपने मन्त्री के सात पुत्रों को एक साथ हनुमान को घेरने का आदेश दिया। हनुमान ने उन सबको जल्दी ही खत्म कर डाला। रावण ने अपने और जोरदार सेनापतियों को बलशाली घोड़ों और रथों के साथ भेजा। हनुमान एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूद कर नाचने लगा। वह सारी सेना उसको पकड़ नहीं पाई!
कितने भी योद्धा क्यों न हों, धनुष से वानर को मारना आसान नहीं है। बन्दर पेड़ पर छिप सकता है, दूसरे पेड़ पर कूद सकता है! हनुमान ने ऊपर से आकर रथों को धँसा डाला। किसी ने तीर मारा तो पेड़ के ऊपर चला गया। रावण की सेना ऐसे कौशल से घबरा गयी! हनुमान ने सबको एक एक करके मार डाला! तब भी रावण ने धीरज़ से काम किया। अपने छोटे लड़के अक्षय कुमार को हनुमान को मारने को भेजा। अक्षय की बहादुरी से हनुमान खुश हुआ। मन ही मन उसकी प्रशंसा की। लेकिन बाद में सोचा - "शत्रु कितना भी शानदार क्यों न हो, वह शत्रु ही है!" उसने अक्षय को मार डाला !
रावण ने अपना धीरज़ फिर भी नहीं खोया। योद्धाओं को युद्ध का भाव मालूम रहता है! वह किसी को भी युद्ध करने जाने का आदेश दे सकता था। एक-एक करके हनुमान मार डालता था तो और जोरदार योद्धा आ जाते थे! रावण ने अपने बड़े लड़के इन्द्रजित को हनुमान से लड़ने को भेजा। इन्द्रजित के पास ख़ास अस्त्र थे और उसकी वाहिनी भी बड़ी थी। इन्द्रजित धनुष युद्ध में निपुण था। लेकिन शर आते ही हनुमान ने अपना ख़ेल चलाया! वह कभी ऊपर ऊँचाई तक उड़ गया, तो कभी एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कूदता रहा!
इन्द्रजित के पास बेहोशी का अस्त्र था! उसने उसको प्रयोग किया, तो हनुमान घायल होकर ज़मीन पर गिर गया। गिरते ही दूसरे राक्षसों ने उसको मोटी रस्सी से बाँध लिया। थोड़ी देर में बेहोशी का दूर होने पर हनुमान ने ध्यान दिया कि वह बँधा पड़ा है। राक्षसों उसको उठाकर रावण के दरबार की ओर ले चले। हनुमान ने सोचा - "चलो, अभी काम बन गया! रावण से मुलाकात हो जायगी! उससे बात करने का मौक़ा मिलेगी!" उसने बन्धन से खिसकने का प्रयास नहीं किया और राक्षसों के साथ आगे बढ़ा!
रावण के दरबार को देख कर हनुमान चकित हो गया। जहाँ भी देखो सोना, चाँदी, मख़मल, हीरा, मोती - सभी तरफ़ झलक, सभी तरफ़ चमक! उसने फिर रावण को देखा। उसके दश शिर थे, जो आभूषणों से भरे थे। ऊँचे सिंहासन पर इन्द्र के मारे सभासदों के साथ रावण गंभीर आत्मविश्वास से बैठा हुआ था। हनुमान ने सोचा - "इसका मन अगर ठीक रहता, यह शायद स्वर्ग में अभी राज करता!" इतनी भारी दौलत और उसके सेनापतियों को देखकर हनुमान अंदाजा कर लिया कि - "मामला आसान नहीं है और आगे का युद्ध सहज नहीं होगा।"
रावण ने प्रहस्त को आदेश दिया - "इसको पूछो, यह है कौन? क्यों लंका आया हुआ है? समुन्दर के भीतर अपने राज्य में इसने क्यों प्रवेश किया?" प्रहस्त ने पूछा - "अरे बन्दर, शांत हो! तुझको किसने भेजा है? इन्द्र, वरुण, कुबेर - इनमें से कौन तेरा स्वामी है? क्या तुझको विष्णु ने भेजा है?" प्रहस्त ने रावण के शत्रुओं का नाम बताया। "झूठ बोलना मत! ठीक ही ठीक बोल दो तो यहाँ से निक़ल जाओगे!" प्रहस्त अनुमान ही नहीं कर सकता था कि हनुमान अपने बल से वहाँ आया हुआ था।
बँधे हुए दूत हनुमान ने ये सारे धक्कड़ प्रश्न धीरज से सुने। वह बोला - "मेरा इन्द्र, वरुण, कुबेर या विष्णु से कोई संबंध नहीं है! मैं तो एक बन्दर हूँ। राक्षसों के राजा रावण से मिलने आया हूँ। मिलने का तरीक़ा निकालने के लिये मैंने बगीचे को कुछ तोड़-फोड़ की थी। जब रखवाले आ गये तो अपनी रक्षा के लिये उनसे थोड़ा बहुत लड़ लिया। मुझे बाँधा गया, पर मैं बंधन से निकल सकता था। परन्तु आपको मिलने के लिये मैं बँधा हुआ यहाँ आ गया। मैं वीर श्री राम का दूत हूँ और आपसे कुछ कहने आया हुआ हूँ!"
हनुमान ने मन में रावण के साथ समझौते की बात थी। सोच समझकर उसने शांत भाव से बात की। उसने आगे कहा - "मैं वानरराज सुग्रीव के आदेश पर यहाँ आया हुआ हूँ। आपके भाई ने आपको बधाई भेजी है, आपकी कुशलता पूछी है।" हनुमान ने सुग्रीव मिलन तक राम की सारी कहानी वर्णन की और अन्त में बोला - "मैं हूँ हनुमान, मरुत के ऊर से पैदा हुआ हूँ। एक सौ योजन समुन्दर लाँघ कर मैं सीता की ख़ोज में यहाँ आया हुआ हूँ। यहाँ मँडराते समय आपके ही निवास में सीता का मुझे दर्शन हुआ है।"
"आप को धर्म का ज्ञान है। आपने काफी तप और मनोबल से यह सारी दौलत इकट्ठा की है। दूसरे की पत्नी को अपने घर में अटका कर रखना उचित नहीं है। आप जैसे ज्ञानी लोग ऐसे अधार्मिक कार्य नहीं करते।" फिर उसने राम और लक्ष्मण के रणकौशल पर कुशलता से प्रकाश डाला। "मैं सीता की ख़ोज में आया था। बाकी सब वे दोनों भाई करेंगे।" अन्त में उसने चेताया - "सीता पाँच फण वाला साँप है! उसमें विष है! उसका श्वास तुम्हारी यह लंकापुरी और तुम्हारी दौलत को ख़ाक कर देगा!"
हनुमान ने फिर उसको चेतावनी दी - "आपको देवता और असुरों से न मरने का वर प्राप्त हुआ है। सुग्रीव बन्दर है और राम एक इनसान है। आपको उनसे छुटकारा नहीं मिलेगा!" और जोर से बोला - "मैं तो खुद यहाँ सबको चूरमार कर देता, लेकिन राम ने शपथ खाई है कि वह खुद ही यह काम करेंगे। सीता कालरात्रि है, उसके साथ मत खेलो!"
हनुमान बोलता रहा -"इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो राम को टक्कर दे सकता है। वह सारे विश्व को ध्वंस करके फिर दुबारा बना सकता है। कोई देवता उनके साथ लड़ने के योग्य नहीं है। तुम तो केवल राक्षस हो!" हनुमान की इस ज़ोरदारी से रावण को गुस्सा आ गया। आँखें चमकाकर उन्होंने आदेश दिया - "इस बन्दर को मार डालो!"
क्या हनुमान पकड़ा गया? कैसे निकलेगा वह?

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 15.00 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^