btn_subscribeCC_LG.gif btn_buynowCC_LG.gif

वो भ्रम मरता कुआँ
01-Oct-2017 02:59 PM 1395     

वो भ्रम

इंसान सवार है
निश्चित अनिश्चित के नाव पे
अपने पराये के बीच
किस पर विश्वास करे
मुश्किल है कहना
समय का फेर है
सब मुखौ’टों का खेल है
किसी ने देखा है मुखौटों के पीछे
का वह चेहरा!
है स्नेह या स्वार्थ
एक ने लूटा, अब दूसरे की बारी
अंतिम निर्णय है करना
निश्चित या अनिश्चित
अपने या पराये
मुखौटा उतरने दो
भ्रम टूट जाएगा
तब तक निश्चित और अपने जा चुके होंगे
अनिश्चित और पराये
मृगमरीचिका की तरह
दूर से हँसते तुम्हारी नादानी
पे जश्न मनाते
किसी और की तलाश में
नई जगह नई पारी
जहाँ अपने स्वार्थ के लिये
ढूँढ लेंगे तुम्हारे जैसे किसी और को
नये मुखौटों को पहन
पहचान सकते हो, तो बच जाओ
वरना तैयार रहो
फिर से उसी भ्रम में!
जीने के लिये।


मरता कुआँ

स्रोत था जीवन का मैं
अमृत था मेरा जल
तृप्त होते थे मुझसे तुम रोज
सिंचित करता था हर पल
करते थे पूजा सुबह शाम मेरी
था वर्चश्व तुम्हारे जीवन पर
सोते जागते थे तुम मेरे साथ
सुनता था तुम्हारे दुःख सुख की बात
जब से हुई है नल और कल से दोस्ती तुम्हारी
लुप्त हो रही है मेरी पहचान
है मेरे भी रिश्तेदार शहर के हर मुहल्लों में
अब वो भी हो गये विलुप्त
अब है मेरी बारी, मैं ले रहा हूँ अन्तिम साँसें
रो रही है आत्मा अब मेरी
कर रहे हो दफ़न मुझे
तड़पा तड़पा के हर रोज
मनाओगे ख़ुशी बना के मेरा कब्र
कोई नहीं चाहता जीर्णोद्धार मेरा
रोओगे तुम एक दिन
जब टूट जाएगी दोस्ती नल और कल की
देर हो जायेगी तब तक
खोदोगे मेरा क़ब्र मिलेगा अवशेष
नही मिलेगा जीवन का वह स्रोत
चाहते हो खुशहाली कर दो मेरा जीर्णोद्धार
करूँगा सिंचित सबको
यही है अंतिम इच्छा हमारी।

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^