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सौरभ पाण्डेय
सौरभ पाण्डेय
3 दिसम्बर 1963 को जन्म। सॉफ़्टवेयर तथा निर्यात-प्रबन्धन में डिप्लोमा एवं प्रबन्धन की डिग्री। त्रैमासिक पत्रिका वि·ागाथा में सलाहकर्ता, ई-पत्रिका ओपन बुक्स ऑॅनलाइन डॉट कॉम के प्रबन्धन-सदस्य, परों को खोलते हुए श्रृंखला का सम्पादन। काव्य-संग्रह छन्द मञ्जरी सम्प्रति- केन्द्रीय सरकार की विभिन्न परियोजनाओं को संचालित करने के क्रम में राष्ट्रीय स्तर की कॉर्पोरेट इकाई में नेशनल हेड।

कबीर के बहाने मुँह चिढ़ाते सवाल
कबीर की बात करने वाला, उनके कहे के दम पर समाज में व्यापी विद्रूपता पर कुठाराघात करने वाला समुदाय या वर्ग क्या वाकई कबीर के मंतव्यों का अनुगामी है? और वही परिणाम चाहता है जैसी कबीर की अपेक्षाएँ थीं? गर्भनाल पत्रिका का जून-2016 अ
हिन्दी और आंचलिक भाषाओं की सच्चाइ
भाषा वस्तुतः किसी भूभाग के जन की भावनाओं, जन की मनोदशा, जन के मूलभूत आचरण, जन की उच्चारण क्षमता तथा उच्चारण ग्राह्रता के सापेक्ष संप्रेषण की कुल शाब्दिक सुव्यवस्था का परिपालन हुआ करती है। इस परिप्रेक्ष्य में हिन्दी की वर्तमान दशा को समझना आवश्यक ह
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