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गरिमापूर्ण हो जीवन और मृत्यु
कई जैन संत अपने जीवन के अंतिम दिनों में किसी लाइलाज बीमारी से ग्रसित होने या जीवन की निर्थकता अनुभव होने या उसकी कोई उपयोगिता न रह जाने पर स्वेच्छा से अन्न-जल त्यागकर शरीर को नियति के हवाले कर देते हैं जिसे वे "संथारा" नाम देते हैं। इसे एक प्रकार ...
सैद्धांतिकता के पीछे एक व्यावहारिक पहलू पाठ्यक्रम-पाठन-पठन
विज्ञान में जिस तरह थ्योरी को समझाने के लिये प्रेक्टिकल कक्षाओं की अनिवार्यता तार्किक है वैसे ही शिक्षण संस्थानों से जुड़ी कई सैद्धांतिक संहिताएँ अपने व्यावहारिक पहलुओं के साथ एक नये रूप में उजागर होती हैं। भारत में विक्रम विश्वविद्यालय से शिक्षा प...
फिसल-फिसल जाता है रेशम
फिर अपनी ही एक पंक्ति से बात प्रारंभ करने की धृष्टता के लिए क्षमा। पंक्ति है : फिसल-फिसल जाता है रेशम तन-मन छूती खादी देना। पता नहीं, मनुष्य ने जब पहले-पहल तन ढांपना शुरू किया था तब वह लज्जावश था या ठिठुरन के कारण लेकिन ऊन, रेश...
तरक्की की राह पर चालीस कदम
चीन पर कोई हुक्म नहीं चला सकता और न ही चीन को प्रगति से कोई रोक सकता है। 18 दिसंबर 2018 को बीजिंग के विशाल कक्ष में कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को संबोधित करते हुए चीन के राष्ट्रपति शीं जिन फ़िंग के ये शब्द पूरी दुनिया विशेषकर अमेरिका को एक खुली च...
गर्व ही नहीं, चिंतन का क्षण भी
भारत के एक दृढ़ निश्चयी नायक, स्वतंत्रता सेनानी, प्रथम उप प्रधानमंत्री और लौह-पुरुष के नाम से विख्यात सरदार पटेल की लगभग तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से निर्मित, दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा का उनके 144वें जन्म दिन 31 अक्तूबर को बड़े तामझाम से लोकार्पण...
जनता की आलोचना
नेताओं की आलोचना खूब होती है पर जनता की आलोचना कोई नहीं करता। आजकल नेता यह कहते हुए पाये जाते हैं कि देश की सवा सौ करोड़ जनता उनकी मालिक है और वे जनता के नौकर हैं। नौकरों की आलोचना करने वाले थक गये हैं और नौकर इतनी मोटी चमड़ी के हैं कि उन पर कोई असर...
सनक, सेल्फी और भेड़चाल
इंटरनेट आधारित मीडिया के असीमित विस्तार से मानवीय संचार को असीमित विस्तार मिला है। सोशल मीडिया ने वर्तमान में मुख्यधारा के मीडिया जितनी जगह बना ली है। हाल तो ये है कि जो भी कुछ हम सोशल मीडिया में देखते हैं, वही सब देर-सबेर समाचार के रूप में टेलीवि...
मैं भी
ये सिर्फ मानव जाति पर लागू नहीं होता बल्कि संसार की हर वस्तु पर लागू होता है। ज़रा-सी हवायें अगर एक साथ मिलकर चलने लगें तो झंझावात पैदा कर दें। धरती के सीने से विनाशकारी लावा यूँ ही नहीं निकलता। सदियों से जमी आक्रोश की आग जब अपनी तीव्रता तक पहुँच ज...
अकबर प्रयाग से बड़ा नहीं हो सकता
प्रयाग का मूल शब्द है याग जो यज् अ घञ् के योग से बना है। यागः का अर्थ होता है उपहार, यज्ञ, वह अनुष्ठान जिसमें आहुति दी जाती है। याग से पहले प्र उपसर्ग लगा देने से प्रयाग बना है। प्रयाग अर्थात एक विशिष्ट प्रकार का यज्ञ।उत्तराखंड को देव भूमि क...
स्त्री और आबादी
दुनिया की वर्तमान 7.6 अरब आबादी (वर्ष 2017), संयुक्त राष्ट्र संघ (यूनाइटेड नेशन्स) के अनुसार वर्ष 2030 में बढ़कर 8.6 अरब, वर्ष 2050 में 9.8 अरब, और वर्ष 2100 में 11.2 अरब हो जायेगी। जनसंख्या में सर्वाधिक बढ़ोतरी अफ़्रीका व एशियाई देशों में हो रही हैं...
पॉलिथीन और पाबंदी
बा जार से सब्जी लाना हो या पैक दूध या फिर किराना या कपड़े, पॉलिथीन के प्रति लोभ ना तो दुकानदार छोड़ पा रहे हैं, ना ही खरीदार। पॉलिथीन न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य को भी नष्ट करने पर आमादा है। इससे बचने के लिए वैकल्पिक उत्पादों पर हमें गौर...
भाषा की नाक पर रूमाल रखने का समय
बेला महका रे महका आधी रात को यह पंक्ति एक फिल्म गीत की है, जो एक मीठी-गंध का स्मरण कराती है। कदाचित लगभग आधी शताब्दी पूर्व, आकाशवाणी की "विविध भारती" सेवा ने, देर रात को प्रसारित होने वाले, मधुर फिल्म गीतों के एक कार्यक्रम का नाम ही दिया था, "बेला...
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