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रूस में प्रवासी भारतीय समाज
01-Jan-2016 12:00 AM 3709     

भारत वि?ा का दूसरा सबसे बड़ा डायस्पोरा है। पचास देशों से अधिक में रह रहे प्रवासी भारतीयों की जनसंख्या करीब दो करोड़ है। रूस के सांख्यिकी विभाग गरोसस्तात'त के अनुसार रूस में बीस हज़ार से अधिक भारतीय रहते हैं। जो रूस में अपने वातावरण और संस्कृति से कटे होने तथा अपनी विरासत और रूसी सभ्यता से तालमेल, रहन-सहन की समस्याओं, आस्थाओं व विचारों के विरोधाभाषों से जद्दोजहद करते दिखाई देते हैं।
कृष्णचंद चोपड़ा रूस में 17 सालों से रहते हैं। उनका कहना है कि भारत एक महान देश है और उसकी परम्पराएं भी महान हैं। उन्होंने अनुभव किया कि रूस में भारतीय मूल के अधिकांश लोगों का जीवन बहुत कठिन हैं। हिन्दुओं की धार्मिक आस्थाएँ ऐसी हैं, जो उनके जीवन के विविध पक्षों में प्रभावित करती हैं। मैं शाकाहारी हूँ, किन्तु रूसी लोग मुझे हमेशा कहते रहते हैं कि आप रूस में मांस खाये बिना रह नहीं सकते। यहां तो शाकाहारी खाना बहुत महँगा है।
मेहताजी यहाँ दस सालों से रहते हैं। उन्होंने अनेकता में एकता को हिन्दू धर्म का गुण कहा। वे भी सहमत हैं कि रूस में हिन्दू धर्म का ठीक प्रकार से प्रत्येक परिवार में प्रचार नहीं है। इंग्लॅण्ड में धार्मिक शिक्षा अनिवार्य है। वहां रहने वाले भारतीयों की मांग पर वहां की सरकार ने इस बात को स्वीकार कर लिया कि वे विद्यालयों में हिन्दू धर्म की शिक्षा की व्यवस्था कर देंगे। अफ़सोस की बात है कि रूस में ऐसा कभी नहीं होगा। रूस में हिन्दुओं कि तुलना में मुसलमानों की एकता अद्भुत है। सरकार उनकी बहुत अधिक सहायता करती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि रूस में प्रवासी भारतीयों को अपनी संस्कृति से मोह है। प्रवासी भारतीयों को एक प्रश्न-पत्र दिया गया था जिसमें उन्होंने भारत के बारे में धारणा व्यक्त की। तो सभी ने भारत की सराहना की और भारत को एक सुन्दर देश कहा। इस प्रश्न के उत्तर में कि आपकी दृष्टि से भारत अथवा भारतीय संस्कृति की क्या विशेषता है, अधिकांश ने आध्यात्मिकता एवं अहिंसा को भारतीय संस्कृति की विशेषता कहा।
जमील जी कोलकाता से आये हैं और रूस में पांच सालों से रहते हैं और काम करते हैं। उनका विचार यह है कि भारतीय आदमी को रूस में कोई भी काम पाना काफी मुश्किल है, यह रूसी लालफीताशाही से सम्बंधित है। रूस की सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं में बहुत कम भारतीय काम करते हैं। मैं एक मैगज़ीन में काम करता हूँ। अब तो सब ठीक है लेकिन तीन-चार साल पहले मैं कोई काम पा नहीं सका, क्योंकि मेरे पास कोई दस्तावेज़ नहीं था।
नीता जी रूस में केवल एक साल से रहती हैं अपने पति के साथ। उनके पति रूस में एक चिकित्सीय कंपनी में काम करने के लिए निमंत्रित किये गये। नीता जी काम नहीं करती, वे गृहिणी हैं। उन्होंने कहा- रूस में बहुत से गुजराती, पंजाबी और बंगाली लोग आते हैं रहने के लिए। बातचीत करते हुए वे बीच-बीच में अंग्रेज़ी का प्रयोग करते हैं। मेरी कठिनाई यह है कि रूस में कोई अंग्रेज़ी या हिन्दी भाषाएँ नहीं जानता और मुझे इशारों और संकेतों से लोगों से बात करना पड़ती है। जब मुझे कहीं भी बस या मेट्रो से जाना है, मैं कुछ नहीं समझ सकती हूँ क्योंकि सब कुछ रूसी में लिखा होता है। रूसी भाषा बहुत कठिन है, इसका व्याकरण संस्कृत व्याकरण से मिलता-जुलता है।
अनिल छात्र है, वह रूस में चिकित्सा सीखने के लिए कई महीने पहले आया। जब उससे यह पूछा गया कि तुम क्या भारतीय वि?ाविद्यालयों से संतुष्ट हो, तो उसका कहना था कि अनुशासनहीनता, हड़ताल तथा ज्ञान के प्रति कम रुचि के कारण वह भारतीय वि?ाविद्यालयों से संतुष्ट और प्रसन्न नहीं है। "मैं यहाँ सिर्फ मेडिसिन सीखने के लिए आया हूँ, मुझे आशा है कि छह-सात साल बाद मैं भारत वापस आऊंगा। मैं शल्य चिकित्सा में पी.एच.डी. करना चाहता हूँ - यह है मेरी दिली तमन्ना है।'
रूस में रहने वाले अनेक भारतीय प्रवासियों ने वहां की अधिसंख्या जनसँख्या में परस्पर कलह, मतभेद, भ्रष्टाचार तथा बेईमानी को प्रमुख समस्याएँ बताया। फिर भी बहुत से प्रवासी कहते हैं कि वे कभी भारत नहीं जाना चाहते। भारतीय क्यों दूसरे देश जाते हैं काम करने और रहने के लिए? इस प्रश्न का उत्तर भारत की अनेक समस्याओं में पाया जा सकता है। अनेक प्रवासियों ने कहा "अशिक्षा और गरीबी'। यह सच है कि भारत में बहुत से लोग गरीबी की रेखा के नीचे रहते हैं। अशिक्षा पर भी प्रायः सभी ने निशान लगाया। कुछ लोगों ने साम्प्रदायिकता और जातीयता को भारत की प्रमुख समस्या बताया। कुछ लोगों की दृष्टि में गंदगी भारत की दूसरी समस्या है। मनोहर जी ने, जो रूस में तीन सालों से रहते हैं, कहा "यहां तो रास्ते बहुत साफ़ हैं।'

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