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रम्य रचना Next
स्त्री द्वेषी
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता, वाले देश में भी (बाक़ी देशों की बात तो छोड़ ही दीजिये) नारी की पूजा कैसे होती है सब जानते हैं। जैसे ताजपोशी का अर्थ भले ही सम्मानसूचक हो मगर बरिबंड सुपुत्र की जो मरम्मत जूतों से होती है उसे भी ताजपोशी ही कहा ...
लतीफ़े सिर्फ़ ख़वातीन पर
चुटकुले सुनना और सुनाना एक बड़ा अच्छा शग़ल है। किसी भी महफ़िल में दो लोग हीरो बन जाते हैं - एक तो गाना गाने वाला अगर वो सुर में गाता हो और वाक़ई अच्छा गाता हो; दूसरा जोकर मतलब जोक सुनाने वाला - बशर्ते कि एक तो वो पुराने लतीफ़े न सुनाये, दूसरे पंच लाइन ...
आशिक़ी.कॉम
जी हाँ ये बात सौ फ़ीसदी सही है। जिस किसी को प्रेम का रोग लग जाता है उसका इलाज हक़ीम लुकमान भी नहीं कर सकते। इस बीमारी के बारे में सिर्फ़ शायरों ने ही नहीं बल्कि विशुद्ध पंडित कवियों ने भी लिखा है -कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय व खाये ब...
सात जन्मों का बंधन
केवल सात ही क्यों आठ या नौ क्यों नहीं? सवाल टेढ़ा है। पर जाने दो। सवालों का कोई अंत थोड़े ही है। कोई और पूछने लगेगा ग्यारह क्यों नहीं? लेकिन ये बंधन न तो माँ-बाप के साथ होता है न ही भाई-बहनों के साथ। बाक़ी रिश्ते-नाते, अड़ौसी-पड़ौसी तो अल्ला-अल्ला खैरस...
आधी दुनिया - अधूरी दुनिया
भगवान ने अपनी तरफ़ से बड़े इंतज़ाम के साथ कार्य प्रारम्भ किया था। एक अच्छे सीईओ की तरह उन्होंने दो बराबर के पार्टनर बनाये - आदम और हौव्वा। उनके लिये रोटी, कपड़ा और मकान का पूरा बंदोबस्त किया गया था। उन्हें खुली छूट थी कि वे जैसे चाहें दुनिया काम को अन...
नुक़्ता-ए-नज़र बनाम तर्क-कुतर्क
ऊँचाई पर खड़े व्यक्ति को नीचे खड़े लोग बहुत छोटे (चींटियों जैसे) नज़र आते हैं। मज़े की बात ये है कि नीचे वालों को भी ऊँची इमारत, पहाड़ आदि यानि बुलंदी पर खड़ा आदमी उतना ही छोटा दिखाई देता है। यह कमाल है दृष्टिकोण का। जनाब! आईना भी कहने को सच बोलता है, ल...
"द" से देश पर "न" से निबंध
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की अस्सी प्रतिशत जनता गाँवों में रहती है। गाँव के लोग बहुत खुशहाल रहते हैं। भारत के गांव प्राकृतिक सौंदर्य से भरे पूरे होते हैं - हरियाली से सजे हुए, शांति से परिपूर्ण। वहाँ स्वच्छ, ठंडा पानी प्रदूषण से विहीन होता ...
बहुत नाइंसाफी है
देखिये साहब नाइंसाफी तो हुई है। इस बात से क़तई इंकार नहीं किया जा सकता कि समाज के एक समूचे वर्ग के साथ अन्याय किया गया है। कोई भी व्यक्ति पैदाइशी दलित नहीं होता। नेक इरादे से किया गया एक वर्गीकरण सियासत के लालच का शिकार हो गया। जी हाँ, गये वक़्त के ...
पीतल पे सोने का पानी
कभी-कभी विपरीतार्थक शब्द भी बड़े सार्थक होते हैं, जैसे "झूठा सच" और कभी-कभी स्थितिपरक शब्द भी प्रयोग में लाये जाते हैं मुहावरे के तौर पर, जैसे "आँख के अंधे नाम नयनसुख"। ख़ैर नाम में क्या रखा है। नाम तो फिल्म वालों ने नामुमकिन की हद तक विचित्र किन्तु...
मसला तीन तलाक़ का
इतना शोर-शराबा क्यों है भाई! ग़ौर कीजियेगा हमने शोले फिल्म का मशहूर जुमला "इतना सन्नाटा क्यों है" नहीं इस्तेमाल किया। इसलिये नहीं किया क्योंकि सन्नाटा तो "था" "है" नहीं। मसला दरअसल तलाक़ नहीं शादी है। शादी ना हो तो तलाक़ का सवाल ही नहीं उठता। मगर लोग...
बेबी, खाना खा लिया?
जैसे हाउस वाइफ होती हैं, याने कि वो महिला जिसकी जिम्मेदारी घर संभालना रहती है। मसलन खाना बनाना, कपड़े धोना एवं घरेलू कार्य करना। वह कहीं काम पर नहीं जाती है। उस पर कमाने की जिम्मेदारी नहीं होती है। काम पर जाना और कमा कर लाना पति का काम होता है। समय...
भारतवंशी और भारतीयता
व क़्त की रफ़्तार भी अजीब है। कभी सुस्त (जब बोरियत हो) तो कभी तेज़ (जब ख़ुशगवारी हो)। देखो ना, अभी पिछले साल ही तो नौ जनवरी को प्रवासी दिवस मनाया था। लो, अब फिर सामने आ खड़ा हुआ। ऐ उम्र-ए-रवां आहिस्ता चल। और किसी का नहीं तो हमारी बढ़ती उमर क...
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