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राहुल देव
राहुल देव

प्रख्यात पत्रकार। पैंतीस सालों से इलेक्ट्रॉनिक और पिं्रट मीडिया में सक्रिय। "सम्यक न्यास" के माध्यम से सामाजिक विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य, एचआईवी-एड्स, भाषा और सामाजिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करने में समर्पित। प्रोडक्शन हाउस प्रारंभ करके अनेक न्यूज चैनल्स के लिए कार्यक्रम और महत्वपूर्ण वृत्तचित्र बनाये। भारतीय भाषाओं के संकट पर अनेक विमर्श एवं गोष्ठियों का आयोजन। दि पायोनियर, करेंट, दि इलस्ट्रेटड वीकली, दि वीक, प्रोब, माया, दैनिक आज के अलावा जनसत्ता में संपादक रहे। आज तक में प्रमुख रहे और दूरदर्शन, जी न्यूज, जनमत और सीएनईबी न्यूज चैनल से भी जुड़े रहे।


भारतीय भाषाओं का भविष्य
सारी भारतीय भाषाएं अपने जीवन के सबसे गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ी हैं। यह संकट अस्तित्व का है, महत्व का है, भविष्य का है। कुछ दर्जन या सौ लोगों द्वारा बोली जाने वाली छोटी आदिवासी भाषाओं से लेकर 45-50 करोड़ भारतीयों की विराट भाषा हिंदी तक इस संकट के
भारतीय भाषाएं - एक विस्मृत विनाश
जो दिखता है वही ध्यान में आता है, रहता है। जो है लेकिन आँख से दिखता नहीं, सिर्फ सुना या महसूस किया जा सकता है, सूक्ष्म है, वह ध्यान में कम या देर से आता है। सारी दुनिया में, सारे मीडिया में, सारे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्लाइमेट चेंज की अ
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