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प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी
प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी
कानपुर में जन्म। पढ़ाई राजघाट, वाराणसी के प्रतिष्ठित जे. कृष्णमूर्ति फाउण्डेशन में हुई। 1984 से 2001 तक वसंत कॉलेज फ़ॉर विमैन के हिन्दी विभाग की अध्यक्ष रहीं। सूरीनाम में आयोजित सातवें वि·ा हिन्दी सम्मेलन की संयोजक। दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। विभिन्न साहित्यिक विभूतियों पर डॉक्यूमेंटरी फिल्मों का निर्माण। जापान, मॉरिशस, अमेरिका, इंग्लैंड सहित अनेक यूरोपीय और कैरिबियन देशों में काव्य-पाठ। सम्प्रति - नीदरलैंड स्थित "हिन्दी यूनिवर्स फाउंडेशन' की निदेशक हैं।

प्रणय-ब्रह्माण्ड गर्भ की उतरन
प्रणय-ब्रह्माण्डप्रणयदेह का ब्रह्माण्ड हैसाँसों की आँखेंस्पर्श करती हैंप्रणय काअंतरंग कोनाजहाँनिनादित है -अनहद नाद देहप्रेम का शब्द हैविदेह प्रणय कीसु
जे. कृष्णमूर्ति की अन्तर्दृष्टि
सार्थक और विशिष्ट जीवन में दृष्टि सम्पन्न जीवन-    दर्शन की गुणवत्ता स्वतः समाहित हो जाती है। सत्य की सिद्धियाँ भी जीवन में साधना से ही हासिल होती है। विगत दिनों नीदरलैंड के महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध डच और जर्मन भाषी कवि हैरमन फनफीन से
यूरोप के देहात
यूरोप के गांवों की प्राकृतिक छटा अनूठी है। सृष्टि झील, झरने, नदियों के दर्पण में अपना सौंदर्य निहारती है। दूर तलक घसियारे मैदान के मैदान भी दिखायी देते हैं। यूरोप की राष्ट्रीय सड़कों (नेशनल हाईवे) के दोनों ओर गांवों का ही साम्राज्य है। अधिकांश खेतो
नीदरलैंड के फिल्म महोत्सव और यूरोप
भारत में वालीवुड और विश्व में हॉलीवुड का चकाचौंधी हल्ला है, जिसमें क्राइम, अंडरवल्र्ड के कारनामों और वारदातों के जोखिमों का जोश और शोर, जंग और जश्न का रुतबा दिखायी देता है, जिसमें मनुष्यता के घुटन की पीड़ा का दंश भी हुंकारता हुआ महसूस होता है, लेकि

यूरोपीय पत्रकारिता का चरित्र
यूरोप की पत्रकारिता का इतिहास यूरोप के ही समानान्तर है। भारत की पत्रकारिता यूरोपीय देशों तक पहुंचते-पहुंचते जर्नलिज्म में और नीदरलैंड में आकर न्यूज़ ज़ुर्नाल में तब्दील हो जाती है। तकनीकी साधनों की सहूलियत ने यूरोप की पत्रकारिता की गति में त्वरा पैद
पालिम्यू जंगल और अमर इंडियन
तारीखों के इतिहास में बंद पड़ा है अतीत के एक सौ चालीस वर्षों का दर्दनाक इतिहास। अहर्निश होने वाली वर्षा ने धोया है, बहाया है दु:ख-दर्द का इतिहास। लेकिन पानी के धोने और बहाने से नहीं खतम होता है-ऐतिहासिक दर्द। जिसे पीढ़ियां जीती हैं, भोगती हैं।
डच केरमिस बनाम मेला
मेला मानवीय संस्कृति का सजग प्रतिनिधि है। मनुष्यता के संरक्षण का विलक्षण पहरुआ है। "मेला" शब्द में सामूहिकता की जीवंत संस्कृति समाहित है। मेले के स्थल पर सभी वर्ग, जाति, धर्म, देश और भाषा के लोग एक ही स्थल पर सामाजिक-सांस्कृतिक मनोविनोद और उल्लास
निज भाषा-लिपि स्वाधीनता का मूलाधार
पराधीनता का चित्त और चेतना से गहरा रिश्ता है। पराधीनता व्यक्ति को जितना पीड़ित और प्रताड़ित करती है। इसके विपरीत, स्वाधीनता उतना ही आह्लादित करती है वह फिर, राजनीतिक हो या व्यक्तिगत। स्वाधीनता वस्तुत: अन्तश्चेतना के आनंद का सृजनात्मक निनाद है।

स्वतंत्रता और प्रेम
प्रेम का जितना सघन संबंध प्रेम से है उससे कहीं अधिक विश्वास से है। विश्वास और आत्मीयता के अपरिहार्य आकर्षण से ही प्रेम की नींव पड़ती है। जिसे सौंदर्य और व्यक्तित्व के मानक अपनी तरह से रचते हैं। जिसमें किसी तरह की अविश्वसनीयता और विकर्षण की स्थिति आ
मेघों का घर नीदरलैंड
नीदरलैंड में वर्षाऋतु आती नहीं है वह सर्वदा यहीं रहती है। हमेशाा आकाशा में बिना कोलाहल किए बादलों की क्रीड़ा होती रहती है। कभी उत्तरी क्षेत्र से ठंडी हवाओं के मेघों का दल घुमड़ते हुए आता है और ठंडी बरसात का असर छोड़ जाता है। कभी नार्थ-सी की पशिचमी हव
महाकुंभ और वैश्विक गांगेय संस्कृति
भारत से बाहर विश्व के अन्य देशों के भारतवंशियों और भारतीयों के जीवन में भोलेशंकर बाबा से जुड़े पर्वाें का विशेष माहात्म्य है। हर माह की शिवरात्रि से लेकर महाशिवरात्रि तक का इसमें प्राधान्य रहता है जिसके अंतर्गत भारतवर्ष में शिव भक्ति की उपासना के व
प्रवासी भारतवंशियों की गाथा
भारतवंशी विश्व के अनेक देशों में बसे हैं। उनके पूर्वज जीविकोपार्जन के लिए अलग-अलग समय पर अनेक देशों में गए। अनेक तत्कालीन परिस्थितियों से वशीभूत होकर वहीं बस गए। आज वहां के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन से उनका जीवन जुड़ा हुआ है। जीवन-मूल्य,
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