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प्रो. डॉ. मार्गोट गात्सलाफ
प्रो. डॉ. मार्गोट गात्सलाफ

29 जनवरी 2914 को स्टोलबर्ग, जर्मनी में जन्म। शदानोव विश्वविद्यालय लेनिनग्राद में इंडोलॉजी का अध्ययन किया। मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी में भारत विद्या अध्ययन के अलावा भारत सरकार की छात्रवृत्ति पर दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन। कार्ल माक्र्स यूनिवर्सिटी लिपज़िग से पीएचडी की तथा वहीं भारतीय संस्थान में प्रबंध निदेशक रहीं। हिंदी-उर्दू के भाषा साहित्य के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं की दशा और शब्दावली पर शोध। लीपज़िग विश्वविद्यालय में अनुसंधान सहायक, पर्यवेक्षक तथा हिंदी के प्राध्यापक के तौर पर जुड़ी रहीं। हिंदी शब्दकोशों के विकास के लिए गठित कार्यदल में उप प्रमुख रहीं। नागपुर में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन में शामिल हुई। जर्मन-भारतीय सोसाइटी के रबींद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार के अलावा एक दर्जन से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित।


हिन्दी साहित्य का जर्मन अनुवाद
मनुष्यों की परिस्थितियों को आपस में समझने के लिये, उनके शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक सहजीवन के लिये साहित्य के अनुवादों का बहुत बड़ा महत्व है, क्योंकि केवल एक-दूसरे को समझने में अपरिचित, अन्य प्रकार के तथ्यों का अस्वीकारण कम हो जाता है। पारस्परिक समझ के
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