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प्रेमपाल शर्मा
प्रेमपाल शर्मा
15 अक्टूबर 1956, गांव दीघी, बुलन्द शहर में जन्म। रचनाएँ : 1 उपन्यास, 1 कविता संग्रह, 1 व्यंग्य संग्रह, 4 कहानी संग्रह, 7 लेख संग्रह, 1 अनुवाद तथा 6 शिक्षा विषयक किताबें प्रकाशित। इफको सम्मान, हिन्दी अकादमी पुरस्कार, इंदिरा गांधी राजभाषा पुरस्कार से सम्मानित। सम्प्रति - पूर्व संयुक्त सचिव, रेल मंत्रालय, दिल्ली।

शिक्षा नीति : बुनियादी सवाल
सिंगापुर के जन्मदाता ली क्वान अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि मैं जब विदेश में पढ़ रहा था तब पहली बार मुझे अपनी भाषा, अपनी मातृभाषा कम जानने और इसीलिए पिछड़ जाने का एहसास हुआ। लौटकर सबसे पहले मैंने अपने बच्चों को उनकी मातृभाषा में शि
गाँधी और उनके आलोचक
गाँधी, दुनिया के उन बिरले लोगों में हैं जिन पर सबसे ज्यादा जीवनियाँ लिखी गयी हैं। एक अनुमान के अनुसार करीब दो सौ जिनमें आधे से ज्यादा दुनियाभर के प्रतिष्ठित लेखकों, पत्रकारों द्वारा लिखी गयी हैं। हिन्दुस्तान में यह सम्मान अन्य किसी को प्राप्त नहीं
भाषा का अप्रतिम योद्धा
सिर्फ पांचवी कक्षा तक स्कूल गए हाल ही में दिवंगत तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि ने तमिल भाषा, साहित्य के जरिए राजनीति और समाज में वह स्थान हासिल कर लिया जो हिन्दी में कोई नहीं कर पाया। भाषा मनुष्य के जिंदा होने का प्रमाण है और
क्या जनसंख्या समस्या है?
जनसंख्या नीति को बदलकर दो बच्चों तक सीमित करने के लिए एक संसद सदस्य ने लोकसभा में निजी विधेयक पेश किया है। दो से ज्यादा बच्चों के अभिभावकों पर चुनाव आदि सुविधाओं पर तुरंत प्रतिबन्ध लगाने की मांग भी की है। इसके समर्थन में उन्होंने पश्चिमी उत्तरप्रद

बढ़ते उत्सव, सिकुड़ती किताबें
लो जी फिर आ गया पुस्तक मेला! पिछले तीन बरस वर्ष से हर साल जनवरी में। पिछले कई वर्ष के चित्र दिमाग में छितरा रहे हैं। सर्दियों की गुनगुनी धूप में सुबह ग्यारह-बारह बजे प्रगति मैदान में प्रवेश करती भीड़। ज्यादतर बच्चे, स्कूल, कॉलिज के छात्र नौजवान। छु
शिक्षा व्यवस्था के शेष प्रश्न
शिक्षा का प्रश्न इतना महत्वपूर्ण है कि सरकार कोई भी आये देश और समाज के हित में इससे बच नहीं सकती। एक खबिरया चैनल भी इन प्रश्नों से जूझ रहा है। कुछ वाजिव् चिताऐं भी सामने आयी हैं जिसमें सबसे ज्यादा तवज्जों इस बात को दी गयी है कि हजारों पद देश भर के
पढ़ने-पढ़ाने का माध्यम
नयी शिक्षा नीति के संबंध में कुछ सुझाव, टीएसआर सुब्रमनियम, पूर्व कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय को सौंप दी है। केंद्र सरकार ने सारे देश से सुझाव मांगे हैं- 31 जुलाई तक। पढ़ने-पढ़ाने का माध्यम किसी भी शिक्षा-
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