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पंकज चतुर्वेदी
पंकज चतुर्वेदी
संपादक, पुस्तक संस्कृति, त्रैमासिक

पॉलिथीन और पाबंदी
बा जार से सब्जी लाना हो या पैक दूध या फिर किराना या कपड़े, पॉलिथीन के प्रति लोभ ना तो दुकानदार छोड़ पा रहे हैं, ना ही खरीदार। पॉलिथीन न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य को भी नष्ट करने पर आमादा है। इससे बचने के लिए वैकल्पिक उत्पादों पर हमें गौर
हम अभी भी नहीं सुधर रहे हैं
आजादी के बाद के विकसित भारत के सबसे गंभीर सूखे से जूझ रहे दे¶ा में योजना व घोषणा के नाम पर भले ही खूब कागजी घोड़े दौड़ रहे हों, लेकिन हकीकत के धरातल पर ना तो समाज और ना ही सरकार के नजरिये में कुछ बदलाव आया है। जहां पानी है, वहां उसे बेहिसाब उड़ा
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