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नीलम कुलश्रेष्ठ
नीलम कुलश्रेष्ठ
13 जून 1952 को आगरा में जन्म. रसायन विज्ञान में एम.एस.सी., डिप्लोमा इन एक्सपोर्ट मार्केटिंग. स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता, विज्ञान, इतिहास, आर्किटेक्चर, आर्किओलौजी, चित्रकला, मूर्तिकला पर लेखन. "हरा भरा रहे पृथ्वी का पर्यावरण', "ज़िंदगी की तनी डोर : ये स्त्रियाँ' व अन्य पुस्तकें पुस्तकें प्रका¶िात. कहानी संग्रह "हेवनली हेल' को अखिल भारतीय अम्बिका प्रसाद दिव्य पुरस्कार प्राप्त. सम्प्रति - बड़ोदरा व अहमदाबाद में बहुभाषी महिला साहित्यिक मंच "अस्मिता' की स्थापना व उपाध्यक्ष.

किंवदन्ती बन गई किताब
कीसी भी हिंदी लेखक की पुस्तक के यदि तीन संस्करण यानि 1500 किताबें प्रका¶िात हो जाए तो उसका मन टेड़ा-टेड़ा चलने लगता है। कभी कोई हिन्दी लेखक कल्पना में भी सोच नही सकता कि उसकी पुस्तक की लाख प्रति भी बिक पायेगी। ऐसे में चमत्कार होता है अनुपम मिश्
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