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मोहन राणा
मोहन राणा

1964 में दिल्ली में जन्म। कविता संग्रह - जगह, जैसे जनम कोई दरवाजा, सुबह की डाक, इस छोर पर, पत्थर हो जाएगी नदी, धूप के अँधेरे में तथा रेत का पुल प्रकाशित। द्विभाषी संग्रह- With Eyes Closed, अनुवादक - लूसी रोजेंश्ताइन, Poems, अनुवादक - बर्नार्ड ओ डोनह्यू और लूसी रोज़ेंश्ताइन। कविताओं के अनुवाद मराठी, नेपाली, इतालवी, स्पहानी, पुर्तगाली और जर्मन में हुए हैं। यूके हिन्दी समिति सम्मान, तथा पद्मानंद साहित्य सम्मान से पुरस्कृत।


चकमक आवाज़
चकमक हम पास हो कर भी टटोलते अपने स्पर्श कोकभी छू लेना मन भर था पर अब नहीं रही वह सीमा हमारी देह परजैसे कुछ अनजान गमक उपस्थित चिरपरिचित के नेपथ्यसालता हुआ बहुत पास फिर भी अलभ्य आसंग वो बावला अपन
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