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कृति-स्मृति Next
राम की शक्ति पूजा
है अमानिशा, उगलता गगन घन अन्धकारखो रहा दिशा का ज्ञान, स्तब्ध है पवन-चारअप्रतिहत गरज रहा पीछे अम्बुधि विशालभूधर ज्यों ध्यानमग्न, केवल जलती मशाल।स्थिर राघवेन्द्र को हिला रहा फिर-फिर संशयरह-रह उठता जग जीवन में रावण...
निःशस्त्र सेनानी
सुजन, ये कौन खड़े हैं? बन्धु! नाम ही है इनका बेनाम।कौन करते है ये काम? काम ही है बस इनका काम। बहन-भाई, हां कल ही सुना, अहिंसा आत्मिक बल का नामपिता! सुनते है श्री विश्वेश, जननि? श्री प्रकॄति सुकॄति सुखधाम। ...
सखि वे मुझसे कह कर जाते
सखि, वे मुझसे कहकर जाते,कह, तो क्या मुझको वे अपनी पथ-बाधा ही पाते?मुझको बहुत उन्होंने मानाफिर भी क्या पूरा पहचाना?मैंने मुख्य उसी को जानाजो वे मन में लाते।सखि, वे मुझसे कहकर जाते।स्वयं सु...
कामायनी
कोमल किसलय के अंचल मेंनन्हीं कलिका ज्यों छिपती-सीगोधूली के धूमिल पट मेंदीपक के स्वर में दिपती-सी।मंजुल स्वप्नों की विस्मृति मेंमन का उन्माद निखरता ज्यों-सुरभित लहरों की छाया मेंबुल्ले का विभव बिखरता ...
वीरों का कैसा हो बसंत
आ रही हिमालय से पुकारहै उदधि गरजता बार-बारप्राची पश्चिम भू नभ अपारसब पूछ रहे हैं दिग-दिगन्त-वीरों का कैसा हो बसन्त।। फूली सरसों ने दिया रंगमधु लेकर आ पहुँचा अनंगवधु वसुधा पुलकित अंग-अंगहै ...
ब्रह्मराक्षस
शहर के उस ओर खँडहर की तरफ़परित्यक्त सूनी बावड़ीके भीतरीठण्डे अँधेरे मेंबसी गहराइयाँ जल कीसीढ़ियाँ डूबी अनेकोंउस पुराने घिरे पानी मेंसमझ में आ न सकता होकि जैसे बात का आधारलेकिन बात गहरी हो। बावड़ी क...
नदी के द्वीप
हम नदी के द्वीप हैं।हम नहीं कहते कि हमको छोड़ कर स्रोतस्विन बह जाय।वह हमें आकार देती है।हमारे कोण, गलियां, अन्तरीप, उभार, सैकत-कूल,सब गोलाइयां उसकी गढ़ी हैं। मां है वह। है, इसी से हम बने हैं।किन्त...
दुखी जीवन
दुख का एक बड़ा कारण है अपने-ही-आप में डूबे रहना, हमेशा अपने ही विषय में सोचते रहना। हम यों करते तो यों होते, वकालत पास करके अपनी मिट्टी खराब की, इससे कहीं अच्छा होता कि नौकरी कर ली होती। अगर नौकर हैं तो यह पछतावा है कि वकालत क्यों न कर ली।...
अंग्रेजी के गुण और दोष
जब से भारत में राष्ट्रीयता का आविर्भाव हुआ, लोग अंग्रेजी शिक्षा के विरुद्ध बहुत-सी बातें कहने लगे हैं। इस शिक्षा का सबसे बड़ा दोष यह बताया जाता है कि इसके कारण भारत के शिक्षितों और अशिक्षितों के बीच एक खाई-सी खुद गई और जो भी आदमी ग्रेजुएट हुआ, वह अ...
एक पुरानी चट्टान
आज जब हम अंग्रेजी हटाने की बात करते हैं, तब सवाल अंग्रेजी का नहीं है। सवाल तीन हजार साल पुरानी आदत बदलने का है। यह चट्टान अंग्रेजों ने हमारे ऊपर नहीं रखी है। वह एक प्रागैतिहासिक चट्टान है, जो आजादी के ज्वालामुखी में तप रही है और लावा बनकर बहना चाह...
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