ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
ख्याल रूह
08-Jul-2017 08:19 PM 2066     

ख्याल


होता है हर शख्स को
ख्यालों से अपने प्यार
लगता है उसको उम्दा
सिर्फ अपना ही बस ख्याल
है ये इंसानी फितरत
जिसे करता है वह बार-बार।

ख्याल कितना भी हो खूबसूरत
जब तक नहीं होता है
उसका इजहार
फना हो जाता है यह
पड़े-पड़े पन्नों में
महरूम रह जाता है
रोशनी में आने से।

यदि बनाना है उसे दमदार
तो शब्दों में पिरोना होगा
दिल की गहराईयों में डूबकर
काग़ज पर उकेरकर
प्रियतम तक पहुँचाना होगा।



रूह

रूह में समाये हो तुम इस कदर,
कि दर्द भी काफूर हो जाता है हवा की तरह।
न जाने होगा आपसे मिलना कभी
स्वप्न हमारा साकार होगा भी कभी।

समाये हो रूह में तो अब क्या चाहिये  
फिर भी चाह यह बरकरार है।
मिलने को दिल बेताब है
रूह की हद तक जाने की चाह है।

चाह तो बस चाह है
जो अब चाहत बन गयी है।
रूह में उतर जाने की हिम्मत बन गयी है
न जाने ये हिम्मत कब किनारे पे ले जायेगी
तेरी रूह से एकाकार करायेगी।

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