ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
जंतुओं की भाषा
08-Jul-2017 07:32 PM 2786     

प्रा    चीनकाल में एक राजा अपने राज्य में घूम रहा
    था। उसकी मुलाकात एक मछुआरे से हुई। वह
    बाजार जाने के लिए तैयार हो रहा था कि राजा ने उससे पूछा-
 "यह मछली तुम कितने में बेच रहे हो?"
मछुआरे ने कहा, "आप जो उचित समझेेे।"
राजा ने सोने का सिक्का देते हुए कहा कि "मैं तुम्हारी ईमानदारी से बहुत खुश हुआ।"
मछुआरा सिक्का लेकर घर चला गया। राजा महल की ओर वापस लौट रहा था तो मछली ने कहा-
 "आप घर पर मुझे बनवाकर अन्य लोगों के साथ खाएंगे तो सबको जंतुओं की भाषा मालूम हो जाएगी। यदि आप चाहते हैं कि किसी अन्य को इसकी जानकारी न हो तो अकेले खाइएगा।" राजा को जब यह मालूम हुआ तो उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद नौकर को मछली बनाने के लिए दिया और कहा कि -
 "तुम इसमें से एक भी टुकड़ा मत लेना।" नौकर ने खूब अच्छी तरह से मछली कढ़ी तैयार की और सोचने लगा कि आखिर क्या बात है? मैं इसे नहीं खा सकता। यदि मैंने चोरी से एक टुकड़ा खा भी लिया तो राजा को कैसे पता चलेगा? यह सोचकर उसने जैसे ही एक टुकड़ा खाया कि उसके पीठ से कुत्ते की आवाज आई कि-
 "मुझे भी थोड़ा दे दो। भूख लगी है।"
यह सुनकर नौकर मछली लेकर राजा के पास गया। राजा ने पूछा- "क्या तुमने मछली खाई?" नौकर ने कहा- "नहीं!" राजा अकेले ही पूरी मछली खा गया। इसके बाद उन्हें मक्खियों की आवाज सुनाई दी, जिसमें मक्खियां भनभनाती हुई आपस में बात कर रही थीं कि राजा के साथ धोखा हुआ है! यदि राजा को पता चला तो उसकी खैर नहीं।
राजा ने मक्खियों से पूछा- "किसने धोखा दिया?"
मक्खियों ने कहा- "आप ध्यान से सोचिए तो आपको पता चल जाएगा।"
यह सुनकर राजा ने बहुत देर तक सोचा लेकिन उन्हें कुछ याद नहीं आया।
एक दिन राजा और वह नौकर शिकार खेलने गए। रास्ते में उन्हें एक छोटी-सी पहाड़ी मिली, जहां पर चींटियों ने अपना घर बना रखा था। जब वे दोनों उसके पास गए तो उन्हें चींटियों की बातचीत सुनाई दी। वे आपस में कह रही थीं कि अगर कोई यहां से तीन समुद्र पार करेगा तो उसे सेबों से लदा हुआ एक पेड़ मिलेगा। यदि कोई सेबों को तोड़ने के बाद उस पेड़ के अंदर का गूदा बिना खाल के टूटे निकाल देगा तो रात में उसके अंदर सोना भर जाएगा। फिर सुबह सोना निकालने के बाद पुनः रात में सोना भर जाएगा। यह सुनकर राजा तो चुप रहा लेकिन नौकर मुस्कराने लगा। राजा ने उससे पूछा- "तुम क्यों मुस्करा रहे हो?" तो उसने कहा- "कोई बात नहीं है।" फिर वे दोनों आगे चलना शुरू किए और एक पहाड़ पर पहुँच गए। जहां पर गाय चराने वाले ग्वालों ने आग जलाई थी और वह फैलते-फैलते चींटियों के घर तक आ गई।
इतने में सारी चींटियां चिल्लाने लगीं तो नौकर तुरन्त घोड़े से उतरकर उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़ा।
यह देखकर राजा ने नौकर से पूछा- "यह तुम क्या कर रहे हो?"
नौकर ने कहा- "इन चींटियों के मरने से क्या मिलेगा?" (राजा समझ गया कि इसे भी जन्तुओं की भाषा समझ में आती है।) राजा नौकर को छोड़कर आगे बढ़ गया। इसके बाद चीटियों के सरदार ने नौकर से कहा कि- "तुमने हमारी जान बचाई है, बोलो तुम्हें क्या चाहिए?"
नौकर ने कहा कि "मुझे कुछ नहीं चाहिए। भला बताओ! तुम मुझे क्या दे सकती हो?"
उसने अपनी एक टांग तोड़कर नौकर को देते हुए कहा "ये लो मेरी टांग। जब कभी भी तुम्हारे ऊपर कोई मुसीबत आए तो इसे बजाना। हम सब तुम्हारी मदद के लिए पहुँच जाएंगे।"
इसके बाद नौकर राजा के पास गया। फिर वे दोनों आगे चलना शुरू किए। कुछ दूर जाने के बाद उन्हें एक लोमड़ी और बहुत सारे चूहे दिखाई दिए। उन्होंने ने देखा कि चूहे जोर-जोर से चिल्ला-चिल्ला कर इधर-उधर भाग रहे थे, क्योंकि लोमड़ी उन्हें खाना चाहती थी। यह सुनकर नौकर घोड़े से उतरा और वहां जाकर लोमड़ी को मार डाला। यह सब देखकर राजा ने कहा - "अरे! अब मुझे पता चल रहा है कि तूने भी वह मछली खाई है।
नौकर ने कहा "नहीं!"
राजा ने कहा "अच्छा! तब कोई बात नहीं। चलो घर वापस चलते हैं।" घर आने के बाद राजा ने नौकर से कहा "मेरी बेटी के पास मोती की तीन मालाएं हैं और उसको मालूम है कि उनमें कितनी मोतियाँ हैं। मैं इन मालाओं को मैदान में फेंक दूंगा। तुम्हें एक दिन का समय देता हूँ कि सारी मोतियों को वापस लाकर दो। यदि एक भी मोती कम हुई तो मैं तुम्हारा सिर कलम कर दूंगा।"
यह सुनकर नौकर बहुत उदास हुआ। दूसरे दिन मोतियां ढूंढ़ने गया। दोपहर बीत जाने के बाद भी बस उसे केवल तीन ही मोती मिले। नौकर हताश होकर पेड़ के नीचे बैठ गया। उसने देखा कि एक चींटी गुनगुनाते हुए पेड़ पर चढ़ रही थी -
"अहा! मैं गर्मियों में भी कितनी खुश हूँ।"
उसे देखते ही नौकर को टांग की याद आई और वह उसे बजाना शुरू कर किया। इतने में सारा मैदान चींटियों से भर गया। वे बोलीं "हमसब आपकी क्या सहायता करें?" नौकर ने राजा की पूरी कहानी सुनाई।
उसने कहा कि "मुझे मालूम नहीं है कि मैदान पर कितने मोती बिखरे हैं?"
यह सुनकर सभी चींटियां मैदान पर फैल गईं। उन्होंने सारे मोती लाकर नौकर को दे दिये।
नौकर ने सारे मोती राजा के हवाले किये। राजा ने बेटी से पूछा "क्या सभी मोती मिल गए?" बेटी ने कहा "हां!" राजा ने नौकर को दूसरा काम दिया। उन्होंने कहा कि "तुम्हें तीन समुद्र पार करना होगा। उसके बाद वहां सेब का एक पेड़ मिलेगा। उस पेड़ की खाल उतार कर लाना है, लेकिन शर्त यह है कि खाल कहीं से भी टूटनी नहीं चाहिए।"
यह सुनकर नौकर बहुत भयभीत हुआ,  लेकिन फिर भी चल पड़ा। चलते-चलते वह समुद्र के किनारे पहुंच गया और थक कर एक पेड़ के नीचे जैसे ही लेटना चाहा कि घास से आवाज आई कि "मुझ पर सोना पाप है। पहले तुम एक घास का टुकड़ा लेकर सूंघो और उसे हाथ और पांव पर रगड़ो। इससे तुम समुद्र पार कर सकोगे।"
यह सुनकर उसने वैसा ही किया तो उसके पीठ पर पंख उगने लगे। नौकर ने निश्चय किया कि थोड़ा आराम करने के बाद समुद्र पार करूंगा। इसके बाद उसने पहला, दूसरा और फिर तीसरा समुद्र पार किया। उसे वहां एक सेब का पेड़ मिला। वह सोचने लगा कि इतना कठिन काम मैं कैसे करूंगा? अंत में उसे चूहों की याद आई। उसने सोचा कि यदि मुझे दो चूहे मिल जाते तो हमारा काम आसान हो जाता। वह सोच ही रहा था कि बहुत सारे चूहे वहां एकत्र हो गए और पूंछने लगे "क्या हम सब आपकी सहायता कर सकते हैं?"
नौकर ने उनसे कहा "मुझे इस सेब के पेड़ की खाल चाहिए लेकिन शर्त यह है कि खाल कहीं से भी टूटनी नहीं चाहिए।"
यह सुनते ही चूहों ने अपना काम करना शुरू कर दिया और कुछ समय बाद खाल उतार कर उसे दे दी। नौकर ने उसे लाकर राजा को दिया। राजा ने पूछा - "क्या पूरा काम सही ढंग से हुआ है?"
नौकर ने कहा "हां!"
राजा ने मन ही मन में सोचा कि यदि मैं इसे अन्य कोई दूसरा काम देता हूँ, तो किसी न किसी रूप में कोई न कोई इसकी मदद करेगा। इससे अच्छा यही होगा कि मैं उसे शांतिपूर्वक जीवन यापन करने दूं।
कुछ समय बीतने के बाद एक दिन राजा बहुत बीमार हुआ। उसे लगा कि अब मैं और अधिक दिन ज़िंदा नहीं रहूंगा। उसने नौकर को बुलाया और कहा कि -
"अब मेरी बचने की उम्मीद नहीं है। तुम बहुत बुद्धिमान और चतुर हो इसलिए हमारी पुत्री से शादी करके राज्य का सारा कार्यभार संभालो।"
यह कहकर राजा मर गया। नौकर ने उनका अंतिम संस्कार किया। शोक का समय बीतने के बाद उसने राजा की लड़की से शादी की। तत्पश्चात दोनों सुखपूर्वक रहने लगे।

QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^