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थाईलैंड में भारत के धारावाहिक
01-Dec-2018 06:43 PM 1633     

पिछलों तीस सालों में अनेक धारावाहिक थाईलैंड में लोकप्रिय थे। मसलन जापानी, चीनी, कोरिया और भारतीय। लेकिन भारत के धारावाहिक धीरे-धीरे खो गए, परंतु सन् 2015 में भारत के धारावाहिक फ़िर थाईलैंड में लोकप्रिय हुए। विशेष तौर पर ऐसे धारावाहिक जिनके नामों और कथ्य में भगवान बुद्ध का नाम और संदर्भ इस्तेमाल हुआ है। इस तरह के धारावाहिक थाई लोगों को इसलिये भी बहुत पसंद है क्योंकि थाई लोगों में लगभग 90 प्रतिशत बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं और बुद्ध प्रतिमा की पूजा करते हैं।
थाई समाज में बौद्ध संदर्भ के अलावा अन्य भारतीय धारावाहिकों जैसे महाभारत, सीता-राम, गणेश, महाकाली, चंद्रनंदिनी, कर्ण सूर्य का पुत्र, चंद्रकान्ता आदि भी लोकप्रिय हुए हैं। आजकल महाकाली धारावाहिक भी बहुत पसंद किया जा रहा है। यह शो देवी पार्वती के महाकाली बनने की यात्रा पर है। शो की शुरुआत में पार्वती एक सपना देखती हैं जिसमें महाकाली नरसंहार कर रही हैं। वे उस सपने से डर जाती हैं और शिव से इसका ज़िक्र करती हैं, लेकिन शिव कोई जवाब नहीं देते। वहीं दूसरी ओर स्वर्गलोक में शुम्भ-निशुम्भ का आतंक मचा है। ऐसे में ज़रूरी है कि पार्वती अपने भीतर छिपी महाकाली की शक्तियों को जानें। आगे की कहानी इसी पर आधारित है ।
यह सवाल उठाया गया है कि क्या लाभ है इस महाकाली देखने में? यह महाकाली धारावाहिक सिखाता है कि इस संसार में पुरुष स्त्री का अपमान न करें और ख़ुद अपनी रक्षा करने में समर्थ एक स्त्री को पुरुष की ज़रूरत क्यों पड़ती है? इसके अलावा इस धारावाहिक से थाई लोगों को भारत की संस्कृति, सभ्यता, हिन्दू धर्म के बारे में जानकारी मिलती है।
थाईलैंड में धारावाहिक देखने वाले 20 से 60 आयु वर्ग के लोग हैं और विशेषता महिलाओं और विद्यार्थियों की संख्या इसमें अधिक है। भारतीय धारावाहिक थाईलैंड में इसलिये भी लोकप्रिय हैं क्योंकि ज्यादातर थाई लोग भारत के देवी-देवताओं को जानते, मानते और पूजा करते हैं।
शिव, गणेश, नारायण, ब्रह्मा आदि की जानकारी थाईलैंड के विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रम का हिस्सा है और इस प्रकार वहाँ के विद्यार्थी इससे वाकिफ रहते हैं। इसके अलावा भारतीय धार्मिक साहित्य से भी इनके बारे में जानने समझने का मौका मिलता है। यही कारण है कि इन धारावाहिकों की कहानी को समझना आसान हो जाता है।
इन धारावाहिकों की लोकप्रियता का एक दूसरा कारक है थाई जनता में भारत के इतिहास, खासकर राजवंशों के बारे में जानकारी। जिससे कथा में आई राज परम्परा को यकीनी तौर पर स्वीकार किया जाता है और लोग रुचिपूर्वक उसे देखते हैं।
भारतीय धारावाहिकों में प्रकट हुई संस्कृति, सभ्यता और जीवन शैली के बारे में थाई लोगों की सोच थोड़ी अलग होती है। विशेषता प्रेम और परिवार के संबंध में धारणा। थाई समाज में परिवार की दृढ़ता के बारे में अब भी व्यापक मान्यता है। यानि परिवार की एकजुटता के लिये प्रेम जैसी भावनाओं को बहुत ज्यादा तरजीह नहीं दी जाती है। उन्हें लगता है कि इन धारावाहिकों में प्रदर्शित व्यक्तिगत प्रेम को बढ़ा-चढ़ाकर प्रदर्शित करने की भावना परम्परागत थाई परिवारों की धारणा को कमजोर कर सकते हैं।
इस तरह धारावाहिकों में प्रकट हुए संगीत, स्थल और नृत्य थाई लोगों के लिए मात्र विलास का जरिया है। हालांकि यह भी सच है कि इन धारावाहिकों को देखते समय थाई जनता की भारत के बारे उत्सुकता अत्यंत बढ़ जाती है। अनेक लोग भारत यात्रा के लिये मन बनाते हैं और अंततः भारतप्रेमी हो जाते हैं।

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