ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
हां, मैं कवि हूं इस देश का....
01-Oct-2016 12:00 AM 3495     

हां, मैं कवि हूं।
मैं कवि हूं इस क्षेत्र का
कहलाता हूं ऊंची नाक वाला
समझता हूं समस्याएं
अपने क्षेत्र की
यहां के निवासियों का दर्द
मेरा दर्द है।
हैरो की ज़मीन मेरी है....

मैं कवि हूं इस शहर का
जो केन्द्र है विश्व का।
मैं हिस्सा हूं
इस शहर की संस्कृति का
यह करता है स्वागत सबका
अपना बनाता है
यह शहर केवल एक शहर नहीं
यह लंदन शहर है
पूरा विश्व इसमें समाया है
मैं कवि हूं इस शहर का।

मैं कवि हूं इस देश का
मैनें इसे अपनाया है
अपना बनाया है।
अब इस देश की मिट्टी
नहीं लगती पराई मुझे...
यहां की पतझड़, सर्दी, गर्मी और बरसात
मेरे पसीने की गंध को
सुगंध बनाते हैं।
चुपके-चुपके चले आते हैं
मेरे गीतों में
मैं कवि हूं इस देश का...

 

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