ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
गंगा के प्रति आस्था बालगृह
01-Oct-2017 02:53 PM 1371     

गंगा के प्रति आस्था

आस्था के प्रदर्शन में अब बदलाव होना चाहिए
पुष्प, दीप, वस्त्र के विसर्जन का रुकाव होना चाहिए।

विसर्जित पुष्प, दीप, वस्त्र आखिर जाते कहाँ हैं
इस तथ्य पर भी तो गहन विचार होना चाहिए।

तन, कच्छा, गमछा सब कुछ धोया रगड़-रगड़ कर
मन को भी शुद्ध करने का प्रयास होना चाहिए।

सदियों से करते आए हम गंगा से दुव्र्यवहार
उन सभी गलतियों का अब सुधार होना चाहिए।

तुम्हारे घर में रहती हो या उससे मिलने जाओ
हर सूरत गंगा का आदर सम्मान होना चाहिए।

हटा भी दो अब मन से अन्धविश्वास की चादर
गंगा के प्रति प्रेम भरा व्यवहार होना चाहिए।
 
गंगा को पवित्र, निर्मल रखने का प्रण लें सभी आज
इस जिम्मेदारी का निर्वाह हर हाल होना चाहिए।



बालगृह 
निर्मम आंधी ने हर डाले
अलग-अलग बगिया के फूल
मसल गए कुछ, कुचल गए कुछ
ख़ाक हो गए कितने फूल।

संग बिंधे गुलदस्ते में कुछ
रंग बिरंगे कोमल फूल
स्नेह, प्यार से वंचित और  
संबल के अभिलाषी फूल।

खिड़की से छनती किरणों को  
छूकर खिल उठते यह फूल
बादल को चटकाकर जैसे  
बिखर पड़े चमकीली धूप।

अंधियारी है रात घनेरी   
बुझे-बुझे मुरझाये फूल
कोई रहबर मिल जाये तो
संवर जायेंगे फिर यह फूल।

विनती है यह परम पिता से
हर एक भूला-उजड़ा फूल  
मसला, कुचला कोई ना जाये  
बगिया में महके हर फूल।

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