ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
ग़म तो है हासिले ज़िन्दगी दोस्तो
01-Nov-2016 12:00 AM 7325     

उर्दू के मशहूर शायर जनाब नक्श लायलपुरी की किताब "तेरी गली की तरफ" का एक पृष्ठ देवनागरी में और दूसरा उर्दू लिपि में छपा है, जो इसे नायाब बनाता है।

लोग फूलों की तरह आयें
के पत्थर की तरह
दर खुला है मेरा
आगोशे-पयम्बर की तरह
ये भी ग़म दे के गुज़र जाते
तो क्या रोना था
हादिसे ठहरे हुए हैं किसी मंज़र की तरह
सच है नक्श साहब और उनका घर आगोशे पयम्बर से कम नहीं। जो इंसान इतना प्यारा, सरल, सीधा और सच्चा हो और जिससे मिलकर ऐसी राहत और सुकून मिले जैसे तेज़ गर्मी में किसी बरगद के पेड़ के नीचे आने से मिलती है तो वो पयम्बर नहीं तो और क्या होगा? नक्श साहब के लिखे "रस्मे उल्फत को निभाएं तो निभाएं कैसे..." और "तुम्हें हो न हो मुझको तो इतना यकीं है..." जैसे फ़िल्मी गानों का मैं दीवाना था और आज भी हूँ, लेकिन उनकी शायरी के बारे में मुझे इल्म नहीं था। इस किताब को पढ़कर मुझे अंदाज़ा हुआ के वे कितने अजीम शायर हैं।
तेरी आँखों में कई रंग झलकते देखे
सादगी है के झिझक है के हया है क्या है?
रूह की प्यास बुझा दी है तेरी कुरबत ने
तू कोई झील है, झरना है, घटा है क्या है?
नाम होठों पे तेरा आए तो राहत सी मिले
तू तसल्ली है, दिलासा है, दुआ है क्या है?
24 फरवरी 1928 को बंटवारे से पहले पंजाब के लायलपुर के एक गाँव गोगेरा में नक्श साहब का जन्म हुआ। बंटवारे के बाद उनका परिवार लखनऊ चला आया। नक्श साहब का मन जब लखनऊ में रमा नहीं तो वो मुंबई के लिए रवाना हो गए। इस शहर में उन्हें भूखे पेट खुले में सोना, काम की तलाश में दर-दर भटकना पड़ा। लेकिन घुन के पक्के नक्श साहब ने हिम्मत नहीं हारी। संघर्ष के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिली जिसे करते हुए वे शायरी करते रहे। फिर एक दिन नौकरी छोड़कर फिल्मों की ओर रुख किया। धीरे-धीरे उनकी गिनती फिल्मों के चर्चित गीतकारों में होने लगी।
ज़हर देता है कोई, कोई दवा देता है
जो भी मिलता है मेरा दर्द बढ़ा देता है
वक्त ही दर्द के काँटों पे सुलाए दिल को
वक्त ही दर्द का एहसास मिटा देता है
नक्श रोने से तसल्ली कभी हो जाती थी
अब तबस्सुम मेरे होठों को जला देता है
काँटों से भी खुशबू की बात करने वाले ऐसे नायाब शायर को वो बुलंदी नसीब नहीं हुई जो उनके समकालीन शायरों को हुई। शायरी की इस लाजवाब किताब को किताबदार 5/ए, 18/110 जलाल मंजिल, टेमकर स्ट्रीट, जे.जे. हस्पताल के पास मुंबई-400008 से प्राप्त किया जा सकता है।
कोई परदेस अगर जाय तो क्या ले जाये
भीगी भीगी हुई आँखों की दुआ ले जाये।

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