btn_subscribeCC_LG.gif
डॉ. विजय शर्मा
डॉ. विजय शर्मा
35 साल का शैक्षणिक अनुभव। देशभर में सेमिनार, वर्कशॉप का संचालन। बहुभाषीय साहित्यिक संस्था "सहयोग" की पूर्व अध्यक्ष। किशोर विज्ञान कथा "लौह शिकारी" तथा "अपनी धरती, अपना आकाश : नोबेल के मंच से’, वॉल्ट डिज़्नी : ऐनीमेशन का बादशाह, स्त्री साहित्य और नोबेल पुरस्कार, अफ्रो-अमेरिकन साहित्य : स्त्री स्वर एवं विश्व सिनेमा, कुछ अनमोल रत्न पुस्तकें प्रकाशित। नामी पत्रिकाओं में लेख, पुस्तक समीक्षा, फिल्म समीक्षा, कहानी, अनुवाद प्रकाशित। सम्प्रति - पूर्व एसोशिएट प्रोफेसर, लोयोला कॉलेज ऑफ एडूकेशन, जमशेदपुर।

हिंदी प्रवासी साहित्य से अपेक्षाएँ
भारत से प्रवास पर जाने का कार्य सदैव होता रहा है। आवागमन के साधनों ने इस प्रक्रिया में और तेजी ला दी है। भारतीय प्रवासी दुनिया के कोने-कोने में बसे हुए हैं। असगर वजाहत वर्तमान साहित्य के प्रवासी महाविशेषांक के अपने संपादकीय में कहते हैं, "बीसवीं श
QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^