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डॉ. राजू रंजन प्रसाद
डॉ. राजू रंजन प्रसाद

25 जनवरी 1968 को पटना जिले के तिनेरी गांव में जन्म। पटना विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए.। "प्राचीन भारत में प्रभुत्त्व की खोज : ब्राह्मण-क्षत्रिय संघर्ष के विशेष संदर्भ में" विषय पर शोधकार्य के लिये आइसीएचआर से जूनियर रिसर्च फेलोशिप। पांच अंकों तक "प्रति औपनिवेशिक लेखन" की अनियतकालीन पत्रिका "लोक दायरा" का संपादन। सोसायटी फॉर पीजेण्ट स्टडीज, पटना एवं सोसायटी फॉर रीजनल स्टडीज, पटना के कार्यकारिणी सदस्य। शोध पत्रिका "सत्राची" की सलाहकार समिति के सदस्य। अनेक ब्लॉगों का संचालन एवं नियमित लेखन। संप्रति- इतिहास शिक्षक के रूप में कार्यरत।


अनुवाद की समस्या
अनुवाद एक अत्यंत कठिन दायित्व है। रचनाकार किसी एक भाषा में सर्जना करता है, जबकि अनुवादक को एक ही समय में दो भिन्न भाषा और परिवेश/वातावरण को साधना होता है। परिवेश और वातावरण पर बल देते हुए राधाकृष्णन ने गीता के अनुवाद के बहाने कहा था- "गीता के किसी
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