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चुनौतियों को चीरता भारत विनिर्माण केन्द्र
01-Feb-2016 12:00 AM 1165     

कृषि, औद्योगिक, सूचना और ज्ञान क्रांतियों ने विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाया। स्वतंत्र देश सजग थे, शिक्षा को बढ़ावा दिया और नवाचार को प्रोत्साहन। औद्योगिक क्रांति ने देशों को विकसित, विकासशील और अविकसित देशों में बांट दिया। औद्योगिक क्रांति ने 18वीं सदी के उत्तरार्ध दशकों से प्रारंभ होकर 20वीं सदी के पूर्वार्ध दशकों तक मशीनीकरण को बढ़ावा दिया, उत्पादन सौ गुना तक बढ़ा, नये-नये विज्ञान जनित आविष्कार हुए जैसे बिजली, स्टीम इंजिन, लोकोमेटिव, कार आदि यातायात की सुविधाएं बढ़ीं। बिजली से घर-घर प्रकाश गया। फैक्टरी में मशीनों पर काम तेजी से बढ़ा। भारत औद्योगिक क्रांति से वंचित रहा। कदाचित मशीनों का प्रयोक्ता बना, निर्माता नहीं बन पाया क्योंकि तब भारत स्वतंत्र न था।
आजाद इंडिया को शोषित शिक्षा में पिछड़ा, थोड़े संसाधन वाला बड़ी आबादी का भारत मिला। राजनीतिक प्रयासों से उच्चतर शिक्षा के लिये क्ष्क्ष्च्र्द्म खुले, एकख्र्, एक्तकख्र्, कख़्क्ष्ख्र् जैसे निगमों का गठन हुआ। क्च्क्ष्ङ की लैब खुली। लेकिन उद्योग और संस्थानों में प्रतिस्पर्धा, साझेदारी और नवाचार, इनोवेशन की कमी रही। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की प्रगति धीमी रही। भारत की प्रतिद्विंद्विता चीन से है क्योंकि  बराबर आबादी वाला पड़ोसी देश है। चीन में आर्थिक विकास बहुत तेजी से हुआ, सीमा पार व्यापार बढ़ा। 2011 में आर्थिक विकास दर चीन में 9.5 प्रतिशत थी और भारत की 6.6 प्रतिशत। हां अब चीन की अर्थव्यवस्था चरमराई है। 2015 में चीन में 6.5 प्रतिशत जबकि भारत में 7.5 प्रतिशत का अनुमान है। चुनौती है भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना, निवेश बढ़ाना, रोजगार के नये अवसर सृजन करना। जन सामान्य को कार्य-साधकों साक्षर बनाना।
15 अगस्त 2014 को लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ड़दृथ्र्ड्ढ ठ्ठदड्ड थ्र्ठ्ठत्त्ड्ढ त्द क्ष्दड्डत्ठ्ठ कहते हुए देशी-विदेशी विनिर्माताओं को भारत में मैन्यूफेक्चरिंग करने का आह्वान किया, इस हेतु सरकार अनुकूल नीति बनाएगी। तदनुसार 25 सितंबर 2014 को "मेक इन इंडिया' मिशन का प्रारंभ हुआ। कम कीमत में भारत में निर्मित मंगलयान के सफल परीक्षण से भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता का परिचय विश्व की अर्थशक्तियों को भी हुआ। 30 देशों के करीब 3000 कंपनियों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। अक्टूबर 2014 तक 200 मिलियन (106) रुपये के निवेश प्रस्ताव आए। 25 सेक्टर- विनिर्माण क्षेत्र, चिह्नित किये गये जिनमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की (क़क़्क्ष्) अधिक संभावनाएं हैं।
भारत में 65 प्रतिशत युवा शक्ति है, कुशल श्रमिक कम लागत में मिल सकते हैं। भारत आउट सोर्सिंग हब बन सकता है। विदेशी कंपनियां यहां विनिर्माण करें, उन्हें लाभ और भारत की अर्थव्यवस्था सुधरेगी, मजबूत बनेगी।
पिछले दशक में चीन ने "मेक इन चाइना' अभियान चलाया, बहुत सफल परिणाम निकले। अब चीन की क्रक़्घ् (घ्घ्घ्) क्रय शक्ति के सापेक्ष सकल घरेलू उत्पाद 18.09 ट्रिलियन (1012) डॉलर है, जबकि अर्थव्यवस्था अमेरिका की 17.35 ट्रिलियन डॉलर है। भारत की 7.41 ट्रिलियन डॉलर है। विश्व में मंदी और चीन में भी आर्थिक विकास दर 2015 में घटकर 6.5 प्रतिशत हो गई है, जबकि भारत की आर्थिक विकास दर बढ़कर 7.5 प्रतिशत हुई।
"मेन इन इंडिया' मिशन को आगे बढ़ाते हुये मुंबई में 13-18 फरवरी 2016 को मेक इन इंडिया सेंटर में सप्ताह भर कार्यक्रम होंगे। मेक इन इंडिया सप्ताह में 22 सेक्टर चर्चा सत्र होंगे, 10 सेक्टरों पर केंद्रित प्रदर्शनी होगी, जिसमें राज्यों और विभिन्न देशों के उत्पादन लक्ष्यों और क्षमताओं को दिखाया जायेगा। देश-विदेश के सेमिनार होंगे, ए2क्र, क्र2क्र मीटिंग होंगी। (एउबिजनेस, क्रउगवर्नमेंट)। प्रमुख सत्र हैं- एशिया बिजनेश फोरम, "मेक इन इंडिया : पथ आगे' सेमिनार, इंडस्ट्री-एकेडिमिया संगोष्ठी, सोशल मैन्यूफेक्चरिंग में अग्रणी, डिजाइन से सशक्तिकरण, सेक्टर सत्र (22), ए2क्र और क्र2क्र सत्र (52) इस प्रकार मेक इन इंडिया सप्ताह में "शोकेस अ कनेक्ट अ कोलेबोरेट' अर्थात, "दिखाओ जुड़ों और साझेदारी करो' का संदेश है। प्रत्येक सेक्टर का इन 10 बिन्दुओं में विवरण दिया जायेगा- सारांश, निवेश का कारण, स्टेटिटिक्स डेटा, विकास कारक (ग्रोथ ड्राइवर), विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति, आर्थिक मदद, निवेश के अवसर, विदेशी नवेशक, संबंधित संस्थाएं (एजेन्सी) निवेश नीति प्रमुख हैं। इसमें 4 उप नीतियों पर स्पष्टता लायी जायेगी। ये हैं- 1. नए प्रोसेस-इन्फ्रास्ट्रक्चर-सेक्टर, 2. विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (वर्तमान निवेश नीति, निवेसक-प्रकार, सशर्त निवेश-क्षेत्र, सामान्य निवेश-क्षेत्र, निवेश विथि, टैक्स (कर) प्रावधान, प्रोत्साहन, निवेश की निकासी आदि। 3. बौद्धिक सम्पदा (क्ष्घ्ङ) (उद्देश्य, भारत में क्ष्घ्ङ,  अंतर्राष्ट्रीय संधियां, भारतीय पेटेंट ऑफिस से सुविधाएं, भारत में क्ष्घ् प्रशासन आदि।
नीति है, नियम है लेकिन विनिर्माण में निवेशक देखता है कि निवेश करना वहां उचित है जहां बिजनेश करना आसान हो। मोदी सरकार भी इस पर सचेत है, कुछ सुधार हुए हैं। केंद्रीय सरकार के स्तर पर है, और अपेक्षित हैं राज्य सरकारों से भी। सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका है, वे औद्योगिक एवं आर्थिक विकास के कारक है, ग्रोथ इंजिन हैं।
राज्य सरकारों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। अक्टूबर 2014 में अप्रैल, 2015 के बीच क़क़्क्ष् में 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय घरेलू उद्योग समूहों को मेक इन इंडिया अभियान से जुड़ने और निवेश करने और बढ़ाने के लिए राज्यों में रोड शो करेगी।
बिजनेस करने में आसानी (ड्ढठ्ठद्मड्ढ दृढ़ ड्डदृत्दढ़ डद्वद्मत्दड्ढद्मद्म) का सूचकांक वल्र्ड बैंक ने 12 प्वाइंट सुधारकर 130 किया है। चीन में 84 है, जापान में 34 है और अमेरिका में और आसान है, सूचकांक 7 है। यह 189 देशों के बीच निकाला गया है। भारतीय उद्योग संघ (क्11) के अनुसार मेक इन इंडिया सप्ताह में 3घ्द्म (घ्ड्ढदृद्रथ्ड्ढ, घ्दृथ्त्ड़त्दृद्म ः घ्ठ्ठद्धद्यदड्ढद्धद्मण्त्द्र) अर्थात श्रम शक्ति, नीति और साझेदारी पर केंद्रित संपर्क और चर्चा के बड़े अवसर हैं।
"मेक इन इंडिया' सप्ताह में नीतियों और साझेदारी पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी, कुछ अनुबंध भी होंगे। एशिया बिजनेस फोरम में आर्थिक चुनौतियों, निवेश के अवसरों, डिजाइन और इनोवेशन पर बहुराष्ट्रीय, बहु-राज्यीय, बहु-उद्योग चर्चाएं होंगी। नवाचार युत युवा शक्ति के लिये हेकाथन (क्तठ्ठड़त्त्ठ्ठद्यण्दृद), 24 घंटे मेराथन इनोवेशन प्रयोग परक चर्चा समाधान सत्र का भी आयोजन होगा। इसमें कोडकर्ता, इंजीनियर और डिजाइनकर्ता मिलकर शहरी डिजाइन समस्याओं को हल करने के लिए रचनात्मक विचार और तरीके प्रस्तुत करेंगे।
सृजनात्मक कौशलयुक्त जन शक्ति बनाने और बढ़ाने की दिशा में 16 जनवरी 2016 को एन्ट्रे प्रेन्युर्स (नव उद्यमी) सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसके पहले ग्च्क़्क  (मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एण्ड एन्ट्रेप्रेन्यूरशिप) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने 15 जून 2015 को स्किल इंडिया अभियान शुरू किया। घ्ग्ख़्ज्ज्ञ् (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) का उद्देश्य है : भारतीय युवाओं के बौद्धिक एवं कार्य कौशल विकास के लिये नये अवसर और कार्यक्षेत्रों का सृजन करना। कौशल विकास के लिये नये सेक्टरों का पता लगाना। 500 मिलियन (106) युवाओं को 2020 तक ट्रेनिंग और सृजन कार्य अभ्यास की व्यवस्था करना।
स्किल इंडिया प्रोग्राम की विशेषताएं हैं : - कौशल युत युवाओं के लिये नौकरी और उद्यमिता के लिये ट्रेनिंग और आर्थिक मदद देना। - परंपरागत कलाकारों, जैसे कारपेंटर, मेसन, वेल्डर, टेलर, बुनकर के लिए ट्रेनिंग और आर्थिक मदद देना। - नए कार्य क्षेत्र, जैसे रियल एस्टेट, भवन/पथ निर्माण का पता लगाना। - वैश्विक मानकों के अनुसार ट्रेनिंग की व्यवस्था। - सॉफ्ट स्किल प्रोग्राम में व्यक्तित्व विकास, संवाद, व्यवहार, नियुक्ति योग्य कौशल की ट्रेनिंग देना। - नवाचार पथ शिक्षण पद्धति जैसे ग्रुप डिस्कशन, ब्रोन स्टोर्मिंग करके अनुभव, केस स्टडीज।
इसमें नयापन है कि बेरोजगार और पढ़ाई छोड़ने वालों को भी सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी, जिससे उन्हें कहीं जॉब मिल सके। कॉर्पोरेट, ग़्क्रग्र्द्म शिक्षा संस्थान और समाज का सहयोग ट्रेनिंग के लिये लिया जायेगा। आज चुनौती है कि 80 प्रतिशत प्राथमिक श्रमशक्ति को सॉफ्ट स्किल, संवाद, व्यवहार, कार्यदल कौशल पाने के अवसर नहीं मिले। प्रतिवर्ष 12.8 मिलियन नये युवा जन जुड़ जाते हैं। ट्रेनिंग की वर्तमान क्षमता मात्र 3.1 मिलियन प्रति वर्ष है। कोरिया में 96 प्रतिशत स्किल ट्रेनिंग किये होते हैं, जर्मनी में 75 प्रतिशत, जबकि भारत में केवल 2 प्रतिशत। इस प्रकार बड़ा अंतर है, स्किल ट्रेनिंग की संभावनाएं बहुत अधिक है।
तकनीकी शिक्षा को कौशल-परक बनाने की दिशा में नीति आयोग ने ग़्च्घ्र्क़ (नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेम वर्क) को प्रस्तावित किया। ॠक्ष्क्च्र्क  ने 14 स्किल सेक्टर और छक्रक् ने 10 स्किल सेक्टर प्रस्तावित किए हैं। छक्रक् ने ए. ज्दृड़ (बैचलर ऑफ वोकेशन) को मान्यता दी है। यह 10अ2 के बाद तीन वर्ष का प्रोग्राम है। स्किल इंडिया अभियान से कौशल-सघन जनशक्ति का विकास होगा जो "मेक इन इंडिया' के लिये महत्वपूर्ण है। "स्टार्ट अप इंडिया' से नवाचार मय कुशल जनशक्ति को प्रोत्साहन दिया जाता है, जो नव नवीन उद्योग धंधे शुरू करें, बढ़ावें। "मेक इन इंडिया' से औद्योगिकीकरण अद्यतन टैक्नोलॉजी प्रधान होगा। इसके साथ-साथ जन सामान्य को टैक्नोलॉजी के माध्यम से कार्य साधक कौशल परक साक्षरता बनाना, सरकारी सेवाओं को जन सामान्य तक पहुंचाना और राष्ट्रीय विकास में जनसामान्य की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इस उद्देश्य से डिजिटल इंडिया मिशन 1 जुलाई 2015 को शुरु किया गया। इससे डिजिटल साक्षरता, ढांचा और सेवातंत्र मजबूत होगा। शहर और गांव के बीच सुविधा विषमता कम होगी। डिजिटल इंडिया के 10 अवयव हैं- डिजीलोकर (डिजिटल डॉक्यूमेंट मंजूषा), भारत नेट (2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ब्राॉडबैंड कनेक्टिविटी), ग्.क्रदृध्. ठ्ठद्रद्र (ग्न्र्क्रदृध्.त्द का मोबाइल वर्जन) च्त्ढ़द (इलक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर), राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, ई-एजुकेशन (इंटरनेट से शिक्षण सुविधा), ई-हेल्थ (इंटरनेट से स्वास्थ्य सुविधा) नेक्स्ट जनरेशन नेटवर्क (ग़्ठ्ठद ख्घ् आधारी एक्सचेंज) और वाई-फाई हॉटस्पोर्ट्स।
इस प्रकार भारत को आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में "मेक इन इंडिया', "स्किल इंडिया', "स्टार्ट अप इंडिया' और "डिजिटल इंडिया' पूरक स्तंभ हैं। विशाल कार्य साधक युवा शक्ति कौशल सम्पन्न होकर भारत को विनिर्माण केंद्र बनाएगी, हमारा भरोसा है

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