ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
चूहा दौड़ प्रतिक्रिया नियन्त्रण
01-Aug-2017 11:31 PM 1771     

चूहा दौड़

आधुनिकीकरण वरदान
या मुसीबतों की खान?
वहशी हैं सिंह
या आधुनिक भगवान?
हो जाता है इलाज
साँप के काटे का
पर अर्थशास्त्री हों या अधिवक्ता
है कोई जवाब इनके चाँटे का?
कैसे बचें हम
आधुनिक मानवों की इस होड़ से?
आतंकित हैं दिशायें तक
इस चूहा दौड़ से।


प्रतिक्रिया

सुनते हैं
स्वदेश का अभिषेक सर्वस्व से करते थे
पर दिखता है लूट का बाजार
सुनते हैं
एक ही घाट था शेर हो या गाय
पर दिखता है सिर्फ़ मत्स्य न्याय।
सुनते हैं
बाजार भाव समाचारों में
पर दिखता नहीं सामान बाजारों में।
सुनते हैं - पर -
ऐसे में फ़ूटे गर कुछ ज्वालामुखी जैसा
तो इसमें आश्चर्य कैसा?

नियन्त्रण

दुर्भिक्ष?
प्रकृति का प्रकोप।
बेकारी?
मनुष्य मात्र की अकर्मण्यता।
दुव्र्यवस्था?
अराजक तत्वों द्वारा फ़ैलाई हिंसा।
ऐसी गम्भीर समस्याओं पर
अपने उबाऊ निष्क्रिय संसार में
वातानुकूलित कमरे के गलीचे पर
हल्के गुलाबी माहौल और मदिरा के उन्माद में।
कहता है मेरा गम्भीर बौद्धिक मंत्रण
निश्चिन्त रहो, है पूरा नियन्त्रण।
सुलझ सकती है ये सारी उलझन
कह सकता हूँ बेधड़क।
दुर्भिक्ष में सहायता, बेकारों को उद्योग,
दुव्र्यवस्था पर शासन
सबका है समाधान
मात्र एक सड़क।
जब चाहे बनवा दें, मगर
कैसे भरेगा फ़िर हमारा घर?
क्यों करेगा कोई हमारा मान?
हमें नहीं बन्द करनी अपनी दुकान।

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