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शिकागो में मना "दीपम"
01-Nov-2019 11:27 AM 229      जब मैं यह आलेख लिख रही हूँ भारत में दिवाली की तैयारियां बड़े ज़ोरों से चल रही होंगी। लेकिन विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए दीवाली का पर्व उसी अंदाज में मनाना संभव नहीं हो पाता, जैसा भारत में मनाया जाता है। लेकिन हम सभी की त्यौहार मनाने का भावना कभी कम नहीं होती। दीवाली मनाने की इसी भावना को व्यापक रूप देते हुए इस बार शिकागो में बसे ऐम्पियन्स ने दिवाली मिलन समारोह "दीपम" का आयोजन करके न केवल त्यौहार का सूनापन मिटा दिया बल्कि त्यौहार को फिर से जीवंत कर दिया। "दीपम" महज एक दिवाली मिलन न होकर एक बहुत बड़ा सामूहिक सांस्कृतिक कार्यक्रम बन गया, जिसमें बड़े और बच्चों सहित करीब 250 लोगों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लेकर आनंद की अनुभूति की। जैसा कि कहा जाता है कि जिस काम का आगाज़ अच्छा हो उसका अंत भी अच्छा होता है। यही उक्ति "दीपम" उत्सव के दौरान सच साबित हुई। आम तौर पर कोई बड़ा सेलिब्रिटी या किसी प्रायोजक को महत्व दिया जाता है और सभी बुजुर्ग माता-पिता केवल एक कोने में दर्शक बने इस तरह के कार्यक्रमों को देखते हैं। "दीपम" ने भारतीय संस्कार और धर्म परायणता को सर्वोपरि रखते हुए बुजुर्ग माता-पिता से दीप प्रज्वलन रूपी आशीर्वाद से कार्यक्रम शुरू करके आदरभरी परम्परा को बनाये रखा। इस दौरान लगभग पंद्रह बुजुर्ग युगलों की आँखों में जो ख़ुशी थी वो देखते ही बन रही थी। इस आशीर्वाद शुभांजलि ने दीवाली मिलन काय्र्रक्रम को दीवाली महोत्सव का रूप दे दिया। इसके बाद प्रथम पूज्य गणेश जी की वंदना और फिर पहले भारतीय और तत्पश्चात अमरीकी "राष्ट्रगीत" गान के बाद सांस्कृतिक कार्योक्रमों का आयोजन हुआ। हिंदी में चलित कार्यक्रम ने जो समां बांधा उसका कहना ही क्या था। बच्चों, बड़ों के नाच गाने, वाद्ययन्त्र, कविता, हिंदी स्पीच के साथ हास्य नाटक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले जितने खुश थे उससे भी ज्यादा खुश थे कुछ नए लोग जो पहली बार इसमें शामिल हुए और खुद को एक परिवार का हिस्सा महसूस कर रहे थे। एक दम्पति ने भावुक होकर कहा - "हम 34 साल से यहाँ पर हैं, लेकिन इस तरह का उत्सव हमने पहले कभी नहीं देखा।" आयोजन को लेकर उनके यह उद्गार दिल के छूने वाले थे। गर्व हुआ कि हम भी इस समारोह का हिस्सा हैं। सांस्कृतिक प्रस्तुति के बाद सभी ने भारतीय स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया और मिलकर संगीत में झूमते हुए वही रौनक ला दी जो बचपन की यादों के रूप में हमारे भीतर कहीं छुपी हुई थी। इस तरह के समारोह हमारी संस्कृति के बारे में जानने के लिए न केवल आकर्षण हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा का काम करते हैं जो सभी प्रवासी भारतीय बच्चों को भारतभूमि की संस्कृति और परिवारों को एक साथ मिल-जुलकर रहने के सनातन संस्कार सिखाती है। इस कार्यक्रम ने अमेरिका में पढ़-लिख रहे भारतीय बच्चों को एक ऐसा मंच भी दिया जहाँ उन्हें हमारी सांस्कृतिक धरोहर को और भी नजदीक से जानने का अवसर प्राप्त हुआ। ऐम्पियन्स ग्रुप के कार्यकर्ता और वालंटियर्स ने निस्वार्थ भाव और व्यवस्थित तरीके से कार्यक्रम को संचालित किया। पूरे महोत्सव को उन्होंने जिस मुकाम पर पहुँचाया वह सच में उत्साहित करने वाला है।
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