ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
ब्रिटेन के गाँव-देहात
02-Jun-2017 01:49 AM 2922     

दुनिया के अन्य देशों की तरह यूके में भी तमाम ग्रामीण क्षेत्र हैं जहाँ छोटे-छोटे सुन्दर व आकर्षक गाँव बसे हुए हैं। यहाँ के लोगों को अपने इन गाँवों पर बहुत गर्व है। उत्तरीय आयरलैंड से लेकर स्काटिश हाईलैंड और वेल्स की खूबसूरत वादियों और कार्नवाल के मोहक समुंदरी किनारों तक यह गाँव फैले हुए हैं। हरी-भरी पहाड़ियों व सुरम्य वादियों के बीच यह गाँव उनमें  जड़े हुए हीरे से प्रतीत होते हैं। और किसी परीलोक से कम नहीं लगते। इन अनूठे गाँवों में रहने वालों की संख्या 40 से लेकर 15 सौ तक कुछ भी हो सकती है। अधिकतर लोगों को इन गाँवों के बारे में जानकारी नहीं होती। और जो लोग इनके बारे में जानते हैं उनके लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।
इन गाँवों में कुछ परिवार तो पीढ़ियों से रहते चले आये हैं। और कुछ लोग रिटायर होने के बाद यहाँ आकर शांति पूर्ण जीवन बिताते हैं। इसके अलावा शहरों में रोज काम करने वाले तमाम लोग भी वहाँ के शोर-शराबे व तनाव की जिन्दगी से दूर यहाँ की साफ़-सुथरी हवा में रहना पसंद करते हैं। और काम के लिए रोज ट्रेन से यात्रा करके शहर जाते हैं। शहर में चोरी, बेईमानी और लूट-पाट जैसी बातें इन गाँवों में नहीं होतीं। शाम के अँधेरे में भी टहलते और घूमते हुए व्यक्ति अपने को सुरक्षित महसूस करता है। इन उनीदे से गाँवों की धीमी रफ़्तार में चलने वाली जिन्दगी कुछ लोगों को इतना आकर्षित करती है कि ग्राम्य जीवन का अनुभव लेने लोग दूर-दूर से यहाँ पहुँचते हैं। और बेड एंड ब्रेकफास्ट जैसे छोटे होटलों में या किसी काटेज को किराये पर लेकर रहते हैं। इन गाँवों में घर कभी एक-दूसरे से काफी दूर-दूर होते हैं और कभी कतारबद्ध होते हैं। घरों के आगे-पीछे अनेकों तरह के फलों व फूलों के सुन्दर बगीचे होते हैं। ब्रिटेन में मौसम का कोई भरोसा नहीं। खुली धूप के बीच अचानक बादल प्रकट हो जाते हैं और बारिश होने लगती है। इसलिए यहाँ लोग अधिकतर रेनकोट, छाता और घुटनों तक के बूट्स में दिखाई पड़ते हैं। यहाँ के किसानों के पास बहुत भूमि होती है जिसमें वह खेती-बाड़ी करके अन्न उगाते हैं। खेतों के बीच बने किसानों के घर देखने में बड़े सुन्दर लगते हैं। यह किसान गाय, भेड़ें, घोड़े, मुर्गियाँ व सुअर आदि भी पालते हैं। ब्रिटेन में गाय होती हैं भैसें नहीं। गाय के दूध के साथ उसका मक्खन, क्रीम व चीज़ बनाकर मार्केट में बेचा जाता है। मुर्गियाँ, भेड़ें, सुअर और गायों को मारकर उनका माँस बेचकर भी यह किसान अपना गुजारा करते हैं। कुछ फार्मर्स चाकलेट, स्वीट्स, केक, ब्रेड, मीट-पाई आदि बनाकर भी मार्केट में बेचते हैं। मधुमक्खियों को पालकर उनसे शहद बनाकर भी बेचते हैं कुछ लोग। गर्मियों के सीजन में तमाम यंग व बेरोजगार लोग सेव, नाशपाती, आड़ू, शहतूत, स्ट्रॉबेरी आदि जैसे फलों की "फ्रूट-पिकिंग" करने इन गाँवों में आते हैं। समुन्द्र के किनारे बसे गाँवों में तो तमाम लोग मछुआरे भी होते हैं जो मछलियाँ पकड़कर और उन्हें बेचकर अपना जीवन-निर्वाह करते हैं। और जिन लोगों के पास फलों के बड़े-बड़े बागीचे हैं वे फलों को बेचने के साथ उनसे शराब व जैम आदि बनाकर भी फार्मर्स मार्केट में जाकर बेचते हैं।
गाँवों के परिदृश्य में चारों ओर फैली हरीतिमा, छोटी-छोटी नहरें, चंचल झरने, खेतों में आराम से चरती गायें, भेड़ों और घोड़ों के झुंड दिखाई देते हैं। गाँवों में पथरीली व पक्की सड़कों के साथ कीचड़ से लथपथ पगडंडियाँ भी होती हैं जिन पर ट्रैक्टर व घोड़ागाड़ी आते-जाते दिखते हैं। पगडंडियों पर खरगोश, गिलहरियाँ व कुछ और वन्य जीव आजादी से भागते व फुदकते रहते हैं। सड़क व पगडंडियों के दोनों तरफ पेड़ों की सुन्दर कतारें, उन पर लिपटी बेलें, जंगली फूलों के झाड़, उनके पीछे जंगल व चहचहाते पक्षी वातावरण को अद्भुत बना देते हैं। खुले आसमान के नीचे ग्रामवासियों की जिन्दगी पहाड़ियों पर ऊपर-नीचे घूमते-फिरते व सर्दियों में घर के अन्दर आग जलाकर या चारो तरफ बर्फ से आच्छादित प्रकृति के वैभव को निहारते हुए गुजरती है। स्वच्छ हवा और साफ़-सुथरे गाँवों का शांत जीवन आत्मा और शरीर दोनों को आनंद की अनुभूति देता है।
इन गाँवों की मुखाकृति में चर्च, कब्रिस्तान, विलेज हाल, पोस्ट आफिस, विलेज शॉप आदि होते हैं। विलेज शाप को कार्नर शाप भी कहते हैं जहाँ रोजमर्रा की जरूरत की चीजें मिलती हैं। जैसे कि ब्रेड, दूध, दही, तेल, बटर, चीज, अंडे, शक्कर, आइसक्रीम, स्वीट्स, केक, फल, फूल, मेवे, मैदा, चावल, माँस-मछली, दवाइयाँ मैगजीन व जरूरत की अन्य तमाम चीजें भी। लकड़ी व शीशे की आकर्षक कारीगरी की चीजें भी इन दुकानों में मिलती हैं। कई बार इन विलेज शॉप के अन्दर ही पोस्ट आफिस भी होता है। एक तरीके से यह विलेज शॉप और पोस्ट आफिस यहाँ के लोगों के लिए बातचीत करने का केंद्र हैं। इन गाँवों में कम से कम एक पब भी होता है जहाँ लोग गपशप करते हुए शराब आदि पीकर रिलैक्स होते हैं। इन पबों में खाना भी सर्व किया जाता है। यह पब सामूहिकरण के केंद्र हैं और अंग्रेजों के सामाजिक जीवन में बहुत महत्त्व रखते हैं। पब में लोग बातचीत के दौरान डिं्रक्स पीते हुए स्नूकर और डार्ट जैसे गेम भी खेलते हैं। इसके अलावा लोगों के मिलने-जुलने के लिए सांप्रदायिक हाल भी होते हैं। चर्च व विलेज हाल जैसी जगहों में भी लोगों का सामूहिक तौर पर मिलना-जुलना होता है। गाँवों के छोटे समुदाय में सब एक-दूसरे को जानते हैं और मुसीबत में एक-दूसरे की सहायता करने को तैयार रहते हैं। विलेज हाल का इस्तेमाल कई तरीके से होता है : इसमें लोगों के लिए एक क्लब होता है, यहाँ ग्रुप-मीटिंग भी होती हैं, कुछ शिक्षाप्रद बातों के लिए क्लास भी लगती हैं और कई खास अवसरों पर उत्सव भी मनाये जाते हैं। इन गाँवों में हर साल हेमंत रितु आने पर सितम्बर के महीने में फसल काटने का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। और बड़ा मेला लगता है। जिसमें प्रकार के अन्न व फल-फूल आदि का शो होता है और उन्हें बेचा भी जाता है। साथ में शिल्पकला की प्रतियोगिता, चैरिटी शो, कुत्तों व घोड़ों का शो व रस्साकसी आदि के कम्पीटीशन का आयोजन भी होता है। प्रोग्राम के अंत में पुरस्कार वितरण किये जाते हैं। गर्मी के मौसम में "लैवेंडर फेस्टिवल" भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। खेतों में उगे लैवेंडर के बैगनी रंग के फूल ऐसे लगते हैं जैसे किसी ने दूर तक बैगनी रंग की चादर बिछा दी हो। और इन फूलों की खुशबू से सारा बातावरण महक उठता है।  
शहरों की चमक-दमक से दूर ग्राम्य जीवन की सरलता और शांति का आनंद लेते हुए ग्रामवासियों को कुछ बातों की असुविधा भी सहनी पड़ती है। जैसे कि गाँवों में अस्पताल, क्लिनिक, सुपरमार्केट, लाइब्रेरी और किसी बड़े रेस्टोरेंट आदि का न होना। इन सब चीजों के लिए लोगों को बहुत दूर जाना पड़ता है। जिसके लिए यातायात की बहुत असुविधा उठानी पड़ती है। किसी पगडंडी पर एक बस स्टॉप होता है जहाँ लोगों को बस के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ता है। या फिर कार से यात्रा करनी पड़ती है। कुछ गाँवों में महीने में एक बार मोबाइल लाइब्रेरी भी आती है। और सुपरमार्केट में शापिंग के लिए किसी एक खास दिन व खास समय पर लोगों के लिए कोच भी चलने लगी हैं जो उन्हें पास के टाउन में शापिंग के लिए ले जाने व वापस लाने के लिए होती हैं।       
यहाँ के जीवन में रमे लोग तमाम असुविधाओं के होते हुए भी हतोत्साहित नहीं होते। छोटे समुदाय में रहने वाले यह ग्रामवासी बहुत जिंदादिल होते हैं। कभी बियर फेस्टिवल, कभी चैरिटी का कार्यक्रम, कभी घोड़ों का शो, कभी क्रिकेट और गोल्फ आदि खेलने मे लोग समय व्यतीत करते हैं। किसी न किसी बहाने अक्सर ही लोग मिलजुल कर कोई उत्सव मनाते रहते हैं। या कहो कि जिन्दगी को उत्सव की तरह जीते हैं। जिन्दगी शायद इसी का नाम है।

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