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अंतर्राष्ट्रीय पैठ बनाते हिंदी के शब्द
01-Oct-2018 07:47 PM 1979     

डार्विन और उसके सहयोगी हक्सले, विजविड और कोनिनफार का यह मानना था कि भाषा ईश्वर का दिया हुआ उपहार नहीं है, भाषा शनै:-शनै: ध्वन्यात्मक शब्दों और बोली से उन्नति करके इस दशा को पहुँची है। इसी तरह कई भाषा विज्ञानियों का मत है कि मनुष्य बहुत काल तक गूँगा रहा, संकेत से काम चलाता रहा, जब काम न चला तो भाषा बना ली और परस्पर संवाद करके शब्दों के अर्थ नियत कर लिये। अर्थात भाषा के माध्यम से संवाद करने की चाह में मनुष्य ने सदैव नए-नए शब्दों को अपनाया है।
समय के साथ-साथ नए शब्दों का जन्म होता रहता है। कुछ शब्दों को मान्यता प्राप्त हो जाती है तो कुछ शब्द अपने आप परिवेश में जगह बना लेते हैं, तो कई शब्द नकार दिए जाते हैं और धीरे-धीरे विलुप्त हो जाते हैं। समय अबाध गति से चलता रहता है तथा समय के साथ-साथ स्थितियां और परिस्थितियां बदलती जाती हैं, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ही अंग्रेजी के बाद अब हिंदी भी बदल रही है। अंग्रेजी के बहुप्रचलित शब्दों को हिंदी अपनाने जा रही है। थिंक टैंक, पोस्टल ऑर्डर और ड्राफ्ट जैसे शब्द हाल ही में हिंदी के कोष में शामिल हो गए हैं। वहीं ब्यूरो, रेस्तरां, डीलक्स, टेबिल, पेन, शब्दों को भी हिंदी में मान्यता दी गई है। गारंटीड को हिंदी में गारंटित, क्लासिकल को क्लासिकी और कोडिफायर को कोडकार लिखा जा सकता है।
बाहरी भाषा के शब्दों को लेकर अंग्रेजी का रुख लचीला रहा है, यही कारण है कि ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी हर साल जहां हिंदी और दूसरी भाषा के कई शब्दों को लेती रहीं हैं, वहीं हिंदी अब तक इस मामले में अपेक्षाकृत रूढिवादी रही है। परंतु इंटरनेट के दौर में अंग्रेजी के प्रचलित शब्द हिंदी शब्दावली का अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं। ऐसे में अंग्रेजी शब्दों को हिंदी शब्दकोष के लिए वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की ओर से मान्यता दे दी गई है। आयोग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रचलित शब्दों को उनके प्रचलित अंग्रेजी रूप में ही अपनाना शुरू कर दिया है। आयोग ने अब तक 8.5 लाख तकनीकी शब्दों के हिंदी पर्याय दिए हैं। कुछ तकनीकी शब्द ऐसे हैं जिनका पर्याय नहीं मिला। ऐसे में इनको अंग्रेजी में स्वीकार किया गया हैं। इनमें तत्व और यौगिकों के नाम जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाईऑक्साइड के अलावा तौल और माप की इकाइयां डाइन, कैलोरी, एम्पियर हैं। इनके अलावा ऐसे शब्द जो किसी व्यक्ति के नाम पर रखे गए हैं जैसे बायकॉट (कैप्टन बायकॉट), गैरीमैंडर (मिस्टर गैरी), फारेनहाइट तथा रेडियो, रडार, इलेक्ट्रोन, प्रोटोन, न्यूट्रान, गणित के शब्द साइन, को-साइन, टेंजेंट, लॉग सिग्नल भी हिंदी में यही रहेंगे। इसके अलावा आयोग ने बीस हजार नए शब्द संकलित किए हैं। जिन्हें अखिल भारतीय शब्दावली के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
लेकिन जिन अंग्रेजी शब्दों का पर्याय हिंदी में है तथा जो शब्द जनसाधारण की भाषा में प्रचलित हो गए हैं ऐसे सभी शब्दों को हिंदी में ही लिखा जाना चाहिए। आजकल तकनीकी अनुवाद पर बहुत अत्यधिक बल दिया जा रहा है। लेकिन तकनीकी अनुवाद से मूल भाव का व्युत्पन्न नहीं किया जा सकता है। एक ऐसा ही वाक्या महाराष्ट्र सरकार के सचिवालय में आया जब गूगल द्वारा अनुवाद किए गए परिपत्र का मूल-अर्थ ही बदल गया। 27 अगस्त, 2015 को जारी एक सर्कुलर को गूगल से ट्रांसलेट किया गया था, जिससे उसका अर्थ ही बदल गया था। महाराष्ट्र में अब सरकारी कामकाज में गूगल का ट्रांसलेशन टूल "गूगल ट्रांसलेट" इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के इस टूल को इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। सरकार ने ऑफिशल नोटिफिकेशन जारी करके कहा है कि सरकारी कागजात का अनुवाद अन्य भाषाओं में करने के लिए गूगल ट्रांसलेट को इस्तेमाल न किया जाए। (सं. ण्द्यद्यद्र://ध्र्ध्र्ध्र्.दड्ढध्र्द्मत्र्द्म.ड़दृथ्र्/ण्त्)
इस परिप्रेक्ष्य में यह विशेष तौर पर उल्लेखनीय है कि राजभाषा नियम 1976 के नियम 6 के अनुसार राजभाषा अधिनियम में उल्लिखित सभी कागज-पत्रों/दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों का यह उत्तरदायित्व है कि वे यह सुनिश्चित करले कि जो दस्तावेज द्विभाषी जारी हो तथा साथ-ही-साथ मूल भाषा से दूसरी भाषा में किए गए अनुवाद में भावार्थ तो नहीं बदल गया है। गूगल ट्रांसलेट टूल पूरी दुनिया में इस्तेमाल होता है, लेकिन कई बार यह बड़े अजीब अनुवाद कर देता है। कई बार शब्दों का वह जैसे का तैसा अनुवाद कर देता है, जिससे वाक्य का भाव ही बदल जाता है। रचनाकारों और शब्द-शिल्पियों के साथ-साथ आम भारतीय भी यह जानकार खुश होंगे कि आम लफ्जों को अब आक्सफोर्ड डिक्शनरी में जगह मिल गई है। हमारी आम भाषा में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द अरे यार, चूड़ीदार, भेलपुरी, ढाबा जैसे शब्द अब केवल भारतीय लफ्ज में ही नहीं रहेंगे, बल्कि अब इन्हें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी जगह दी जाएगी। भले ही अपनी मिट्टी में हिंदी की जड़ें कुछ कमजोर हो रही हों, लेकिन सात समंदर पार हिंदी का परचम लगातार बुलंद हो रहा है। ऑक्सफोर्ड एडवांस्ड लर्नर्स डिक्शनरी के नौवें संस्करण में भारतीय अंग्रेजी से 240 से अधिक शब्दों को शामिल किया है। हम भारतीय 16 वर्ष की लंबी अवधि में अब तक, 240 शब्दों के साथ यह घुसपैठ करने में कामयाब रहे हैं। लेकिन, गुंजाइश बहुत अधिक है। नौवें संस्करण में 900 से अधिक नए शब्द जोड़े गए हैं। उनमें से लगभग 20 प्रतिशत ऑनलाइन दुनिया से हैं।
आक्सफोर्ड डिक्शनरी के हालिया 11वें संस्करण में हिंदी के 80 शब्दों ने जगह बना ली है। इन शब्दों में बिंदास, लहंगा, मसाला, बदमाश, हवाला, बंद, चमचा शामिल हैं। आध्यात्म के क्षेत्र के चर्चित शब्द योग, कर्म, धर्म, निर्वाण, गुरु जैसे शब्द तो दो दशक पहले ही इंटरनेशनल मार्का हो चुके हैं। अब बात भेलपूरी, ढाबा जैसे शब्दों तक पहुंच चुकी है। इस तरह आक्सफोर्ड में हिंदी के शब्दों का योग 700 तक पहुंच गया है। कुछ शब्द तो वाया आक्सफोर्ड वापस हिंदी के देश में आकर अपनी नई स्वीकार्यता प्राप्त कर रहे हैं, जैसे योग- योगा हुआ तो बंगला- बंगलो और पायजामा- पैजामा हो चुका है। (सं. ध्र्ध्र्ध्र्.थ्त्ध्ड्ढण्त्दड्डद्वद्मद्यठ्ठद.ड़दृथ्र्/ड्डड्ढद्मण्/द्यदृड्डठ्ठन्र्- दड्ढध्र्द्म/39-39-3255.ण्द्यथ्र्थ्)
जानकारों का मानना है कि अंग्रेजी अब आगे का रास्ता अख्तियार करने के लिए दूसरी भाषाओं पर निर्भर है। इसमें हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाएं सबसे अधिक मददगार हैं। फिर जैसे-जैसे "ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास" लंदन, न्यूयार्क की गलियों में अपनी धमक बढ़ा रहा है, हिंदी का कद भी बढ़ता जा रहा है, तो इसके एकदम उलट यह भी सत्य है कि अंग्रेजी में बोलचाल करने वाले लोगों का तीसरा सबसे बड़ा समूह भारत में निवास करता है।
आक्सफोर्ड में शामिल हिंदी शब्दों का तो आंकड़ा तो मिल गया लेकिन आम भारतीय बोलचाल में रोजाना अंग्रेजी के कितने शब्द शामिल हो रहे हैं, इसका हिसाब रखने वाला कोई नहीं है। कुछ साहित्यकार तो दबी जुबान से स्वीकार करने लगे हैं कि अपने देश में हिंदी संस्कृतनिष्ठ शुद्धता के फेर में आम लोगों से दूर हो रही है जबकि विदेश में लोकप्रियता के बल पर हिंदी आगे बढ़ रही है। लोगों का तो यहां तक मानना है कि राजभाषा के पैरोकार अगर नहीं सुधरे तो वो दिन दूर नहीं जब हमारी लिपी रोमन होगी।

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