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अनिल प्रसाद
अनिल प्रसाद
हथुआ, बिहार में जन्म, अंग्रेजी साहित्य में बी.ए. (ऑनर्स), एम.ए. एवं यू.जी.सी. के अंतर्गत पी.एच.डी.। साहित्य अकादमी के लिए य¶ापाल के "झूठा सच' के कुछ अं¶ाों का अंग्रेजी में अनुवाद। भारत, मिडिल ईस्ट, अमेरिका और चाइना में आयोजित अन्तराष्ट्रीय सम्मेलनों में पेपर एवं कविता पाठ। जुलाई 2016 में ऑक्सफ़ोर्ड, यूनाइटेड किंगडम में आयोजित अंतराष्ट्रीय सम्मलेन में आमंत्रित। अंग्रेजी, भोजपुरी और हिंदी में लेखन। यमन, लीबिया, पटना एवं मुंबई के वि·ाविद्यालयों में अध्यापन। सम्प्रति : प्रिन्स सत्ताम बिन अब्दुलअज़ीज़ वि·ाविद्यालय, सऊदी अरेबिया में कार्यरत।

मन रे जागत रहिये भाई
मै कबीर को पढ़ता नहीं सुनता हूँ। मैंने कबीर को पढ़ कर नहीं जाना, सुन कर जाना है : कुमार गन्धर्व से सुना है, पद्मश्री भारती बन्धु से सुना है, प्रह्लाद सिंह टिपाणिया से सुना है, मधुप मुद्गल से सुना है, आबिदा परवीन से सुना है, ¶ाबनम विरमानी से सुन
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