ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
अमेरिका में औरतों की दशा
01-Jun-2018 02:26 PM 2694     

रोवन पोप के ये वाक्य एक खड़े हुए विमान से गूँजे, स्पीकर से बाहर आए और मेरे दिल को छू गए। "तुमको आदमी से दुगना बेहतर होना पड़ेगा, उनके आधे तक पहुँचने के लिए।" रोवन पोप अमेरिकन टेलीविज़न ड्रामा में काम करते हैं। ड्रामा का नाम "स्कैंडल" है। हालांकि रोवन कल्पित व्यक्ति है, परन्तु उनका संदेश बिलकुल सत्य है।
खड़े विमान के स्थल में, वे अपनी बेटी ओलिविया को डाँट रहे हैं। ओलिविया प्रभावशाली पोलिटिकल "क्राईसिस मैनेजर" है। रोवन उसको बताते हैं कि वह अपने जीवन में अच्छे चुनाव नहीं कर रही है और उसको याद दिलाते हैं कि उसको ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी अगर वह सफल होना चाहती है। वह औरत है, इसलिए समाज उसे हमेशा अनदेखा और अपमानित करेगा। जो आदमी इतने क़ाबिल नहीं हैं, अनुभवी नहीं हैं या पारंगत नहीं हैं वह औरतों का स्थान छीन रहे हैं। यह व्यवस्था ही औरतों के ख़िलाफ़ वायर्ड है, अत: उसको आदमी से दुगना बेहतर होना पड़ेगा सफल होने के लिए।
जब मैं छोटी थी, मेरे माँ-बाप ने मुझे यह सिखाया। एक औरत पर हमेशा सवाल उठाया जाता रहेगा, चाहे वह कुछ भी कर ले। अगर वह क़ाबिल है और अपनी क्षमता के बल पर नौकरी करती है। मेहनती है, तो भी आदमी उस पर भरोसा नहीं करेगा। मेरे स्कूल के डिबेट टूर्नामेंट के दौरान, मेरे पिता-जी मुझसे कहा करते थे, "तुमको एड़ी चोटी का बल लगाना पड़ेगा। बात यह नहीं है कि तुम्हारा प्रतिद्वंद्वी कितना अच्छा है; तुमको इतना बेहतर होना चाहिए कि तुम दोनों के बीच कोई प्रतियोगिता ना हो।" मैं उनके इस संदेश का पालन करने लगी उसकी बातों के महत्त्व को समझने के पहले से मैं जब बड़ी हुई तो मैंने औरतों का संघर्ष समझना शुरू किया।
एक औरत को, हर जगह संतुलन बिठाना पड़ेगा, चाहे वह काम हो या मित्रता। उसको ताक़तवर होना पड़ेगा, लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं, नहीं तो लोग उसको "घमंडी" बुलाएंगे। उसको विनम्र भी होना पड़ेगा, लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं, नहीं तो लोग उसको "कमज़ोर" बुलाएंगे। मैंने बार-बार सुना कि मुझे आदमी से ज़्यादा दयालु और सहनशील होना चाहिए। साथ ही मैं निराश होती हूँ कि जब एक आदमी अपनी राय बताता है और कार्य क्षमता का प्रदर्शन करता है तो, उसे सम्मान मिलता है; मगर जब एक औरत वही करती है, उसको सम्मान के स्थान पर निंदा और आलोचना मिलती है।
यह फ़र्क़ साफ़ है नवम्बर 2016 में, जब अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हुआ। हिलेरी रॉडम Ïक्लटन पहली औरत थी जिसे चुनाव में एक बड़ी पार्टी ने चुना। इलेक्शन प्रक्रिया के दौरान, उनको बहुत आलोचना और पक्षपात के ख़िलाफ़ लड़ना पड़ा। उनके आलोचक बार-बार उनकी आवाज़ की हँसी उड़ाते थे। कहते थे कि उसकी "तीखी" आवाज़ एक डाँटने वाली पत्नी की तरह है (रीव्ज़ 2015)। उसकी प्रस्तुति का हर दृष्टिकोण से विश्लेषण हुआ या उनके टोन, उनकी "भद्दी" हँसी और उनके रंगीन पैंटसुट्स का भी (रीव्ज़ 2015)।
जब Ïक्लटन कोई राय बनाती थीं, उनकी आलोचना हुई अपनी बात के लिए और अपने बातचीत के तरीक़े के लिए भी। "वे क्या बोलती हैं, यह छोड़िए," फ़्रैंक लंटज, जो एक चुनाव विश्लेषक है, कहता है, "उसकी बातचीत के तरीक़े को सुनिए... उसकी आवाज़ लोगों को चिढ़ाती है क्योंकि उनको लगता है कि हिलेरी लेक्चर दे रही है।" लंटज के शब्द उसकी मनोवृत्ति दिखाते हैं। जब एक Ïक्लटन जैसी औरत अपने सुशिक्षित और दृढ़ विचार लोगों को बताती है, तो लंटज को लगता है कि वह स्कूली बच्चा है और लेक्चर सुन रहा है। दूसरे शब्दों में, Ïक्लटन की बुद्धि लंटज को त्रस्त करती है।
हिलेरी Ïक्लटन ऐसी बात में अकेली नहीं हैं। उनकी जैसी बहुत सारी महिलाएँ इस समस्या का सामने करती हैं। 2017 में "लीन-इन" और "मकिंज़ी एण्ड कम्पनी" ने औरतों और उनके कार्यस्थल के बारे में एक अध्ययन किया। उन्हें पता लगा कि जब एक औरत कार्यस्थल में कोई विचार रखती है तो लोग उसको कहते हैं कि वह बहुत आक्रामक या घमंडी है (थोमस एट अल 2017)। जैन फ़ील्ड्स, मकडॉनल्ड्स यूएसए की पूर्वी प्रेज़िडेंट, कहती हैं कि उनके बॉस ने उनको नौकरी से निकाल दिया क्योंकि जैन ने कम्पनी की नीतियों के बारे में उसके ख़िलाफ़ कहा (चिर 2017)।
ये पक्षपात एक औरत के व्यवसाय को मार सकता है और यह जीवन में हमेशा दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, मैं ख़ुद ना तो राष्ट्रपति की उम्मीदवार, न ही कम्पनी की अधिकारी, न प्रभावशाली पोलिटिकल "क्राईसिस मैनेजर" हूँ। फिर भी, मैंने लिंग भेदभाव का सामना किया जब कभी मैंने नेतृत्व किया या लीडरशिप किया।
मैं अब अपने स्नातक अध्ययन के तीसरे साल में हूँ और मैं मॉक ट्राइयल टीम की प्रेज़िडेंट बनना चाहती हूँ। मॉक ट्राइयल एक क्लब है जिसमें छात्र कोर्ट में मामले पर तर्क वितर्क करते हैं। लगभग तीन साल पहले, जबसे मैं इस कार्यक्रम में शामिल हुई, मैं तभी से प्रेज़िडेंट बनना चाहती थी। इसलिए, मैंने बहुत मेहनत की, बहुत सारे मुश्किल काम किए और परिवर्तनों के लिए वकालत की, क्योंकि मैं इस टीम को सुधारना चाहती थी। मगर, अब लग रहा है कि मुझे प्रेज़िडेंट बनने का मौक़ा नहीं मिलेगा। एक लड़की को मौक़ा ना मिलना कोई नई बात नहीं है।
हमारे कार्यक्रम में सारे सदस्य प्रेज़िडेंट के लिए वोट करते हैं। यह चुनाव बहुत कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला होता है। इस साल, मैं सबसे अनुभवी उम्मीदवार हूँ। मेरा प्रतियोगी एक छात्र है जो मुझसे कम अनुभवी है और कम योग्य भी है। उसका व्यवहार लगातार भावनात्मक रूप से अपरिपक्व और अनुचित रहा है। पिछले तीन हफ़्तों में, उसने बार-बार मुझको अपमानित करने की कोशिश की। वह मुझसे रौब से कहता है कि मेरे विचार बेकार हैं। जब मैंने अपने शिक्षक से इसके बारे में बात की, उन्होंने मुझे कहा कि मुझे सहनशीलता सीखनी पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह आदमी है, इसलिए ज़्यादा प्रतिस्पर्धात्मक है।
मेरी राय अलग है। मैं मानती हूँ कि अव्यवसायिक और अनुचित व्यवहार कभी नहीं स्वीकार्य होता है। असल में, एक अच्छे नेता को हमेशा दूसरों के प्रति दयालु, संवेदनशील और मददगार होना चाहिए। जब कभी इस टीम पर औरतों ने उग्रता से व्यवहार किया या दूसरों के प्रति अनादर भाव दर्शाया तो हमारे शिक्षक ने ज़रूर उनको डाँटा और उनके व्यवहार को संशोधित करने के लिए कहा। वे टीम के पुरुषों को कभी नहीं बताते कि उनको सहनशील बनना पड़ेगा।
मुझे नहीं मालूम क्यों मेरे प्रतिद्वंद्वी को, जो एक पुरुष हैं उसके अव्यावसायिक व्यवहार को हमारा शिक्षक अनदेखा कर रहा है। सरल जवाब है : पुरुष विशेषाधिकार। आपने यह शब्द ज़रूर सुना होगा जब लोग दहेज या वेतन की बात करते हैं। इस मॉक ट्राइयल चुनाव में और 2016 चुनाव में, पुरुष विशेषाधिकार एक कपट के रूप में खेला गया। आज भी, अमेरिका में जहाँ औरतों ने इतनी सामाजिक प्रगति की, हमको फिर भी अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है। लोग उम्मीद करते हैं कि हम आदमी से ज़्यादा विनम्र, ज़्यादा व्यावसायिक और ज़्यादा सहनशील हों। वे हमेशा हमारी ओर देखते रहते हैं, हमारे कपड़ों और बोलने के लहज़े पर तंज कसते हैं और हमको निरंतर अनादर का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। "हमको आदमी से दुगना बेहतर होना पड़ेगा उनके आधे तक पहुँचने के लिए।"
इस लेख में मैं सभी आदमियों पर दोष नहीं लगा रही हूँ। वास्तव में, बहुत सारे आदमियों ने मेरी मदद की। जैसे दोस्त, नातेदार और गुरू। तथापि हर औरत जिसको मैं जानती हूँ उसके सामने ऐसी परिस्थिति आई, जिसमें उस पर दोष लगा सिर्फ़ इसलिए कि वह औरत है। मैं उन औरतों से यह कहना चाहती हूँ : अपनी योग्यता पर कभी शक नहीं कीजिए। अगर आप मेहनत करती रहेंगी तो एक दिन हम पूरी व्यवस्था को बदल सकती हैं।
उद्धरण :
कायरा, सुसन। वाई विमन आर नॉट टसी ई ओओ, अकोर्डिंग टू विमन हू ऑल्मोस्ट वर। द न्यू यॉर्क टाइम्स, द न्यू यॉर्क टाइम्स, 21 जुलाई 2017, www.newyorktimes.com/2017/07/
21/sunday-review/women-ceos-glass-ceiling.html
थॉमस, रेचल, मैरिऐन कूपर, एलन कोनार, मेगन रूनी, ऐश्ली फ़िंच, लारेयना यी, एलेक्षिस क्रिवकोविच, इरिना स्टारिकोवा, केल्सी रॉबिन्सन, और रेचल वैलेंटिनो। विमन इन द वर्कप्लेस 2017। विमन इन द वर्कप्लेस, लीन इन और मकिंज़ी एंड कम्पनी, 2017, www.womenintheworkplace.com
रीव, एल्स्पेथ। वाई डू सो मेनी पीपल हेट द साऊंड ऑफ हिलेरी Ïक्लटन्स वोईस? द न्यू रिपब्लिक, द न्यू रिपब्लिक, 1 मई 2015 www.newrepublic.com/article/121643/why-doso-many-people-hate-sound-hillary-clintons-voice

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