ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
किताबें पढ़ने का अनुशासन
01-Sep-2016 12:00 AM 6534     

भारत भाषा और संस्कृति की विविधता का देश है। भारत में ऐसे अनेकों महान लेखक, साहित्यकार, कवि, विचारक और दार्शनिक रहे हैं जिन्होंने एक पूरी पीढ़ी को अपनी कृतियों से प्रभावित किया है और नयी पीढ़ी के लिए भी ये प्रेरणादायक रहे है। इनकी कृतियों को पूरी दुनिया में न केवल प्रसिद्धि मिली, बल्कि लाखों पाठकों की सराहना भी प्राप्त हुई है।
भारतीय भाषाओं के विभिन्न साहित्यकारों में प्रमुख मुंशी प्रेमचंद, रविंद्रनाथ टैगोर, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रा नंदन पंत, मैथिलीशरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, हरिवंश राय बच्च्चन, सुभद्रा कुमारी जैसे महान लेखकों का नाम सभी को स्मरण है। इनकी कृतियों को आज भी बड़े चाव से पढ़ा जाता है। बुजुर्ग हों या बच्चे सभी इनकी कृतियों को रुचि लेकर पढ़ते हैं।
अपनी बात करूं तो मेरी सबसे पसंदीदा रचनाकार हैं सुभद्राकुमारी चौहान, जिनकी कवितायें मैं बार-बार पढ़ती हूँ। "खूब लड़ी मरदानी वो तो झांसी वाली रानी थी" और "यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे" जैसी कविताओं ने सुभद्रा जी को अमर कर दिया। गद्य में मुझे विष्णु प्रभाकर का अद्र्धनारीश्वर उपन्यास बेहद पसन्द है। इसे पढ़ते हुए आँखों के सामने दृश्य मानो चलचित्र जैसे गुजरने लगते हैं।
हिंदी साहित्य अपनी दर्जनों विधाओं की बदौलत ही भाषायी समृद्धि की ऊंचाईयों को हासिल कर सका है। हिंदी की विभिन्न बोलियाँ भी इस भाषा को भरा-पूरा बनाती हैं। जिनमें तरह-तरह की देशी परम्पराएँ और स्थानीय शैलियाँ प्रतिबिम्बित होती हैं। हिंदी ने अपने आधुनिक स्वरूप में विभिन्न भाषाओं की शब्द-सम्पदा कुछ इस स्वाभाविक प्रवाह के साथ अंगीकार की है कि अब ये शब्द हिंदी के ही हो गये हैं।
पढ़ना हमेशा ही कुछ न कुछ ज्ञान देकर जाता है और दिमाग के कई द्वार खोलता है, बचपन से मैंने यही सुना था। जब अमेरिका पहुँची तो यही देखने को मिला कि यहाँ पढ़ने का दीवानगी की हद तक चलन है। माँ-बाप द्वारा बहुत ही छोटी उम्र से बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। यहां की जीवनशैली में वैज्ञानिक सोच को सहजता से तरजीह दी जाती है और बच्चों को सबसे पहले पढ़ने और बाद में लिखने की विधि का ज्ञान दिया जाता है।
नेशनल सेंटर फॉर एजुकेशन के अनुसार जो बच्चे घर पर तरह-तरह की किताबें पढ़ते हैं, स्कूल में उनके अधिक सफल होने के परिणाम देखे गए हैं। वे गणित जैसे विषय में भी हाई स्कोरिंग करते हैं। अमेरिका में बचपन से ही किताबें पढ़ानी शुरू कर दी जाती हैं। माता-पिता अपने बच्चों को बहुत ही काम उम्र से कहानियों की छोटी-छोटी किताबें पढ़ कर सुनाते हैं। पिक्चर बुक्स की शुरुआत तो एक साल की उम्र से ही कर देते हैं। दस साल की उमर तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे सीरीज बुक्स पढ़ना करना शुरू कर देते हैं। चौथी कक्षा तक आते आते हैरी पॉटर, मैजिक ट्री हाउस जैसे पब्लिकेशन की सीरीज बुक्स पढ़ चुके होते हैं।
इस देश के किसी भी शहर में चले जाईये, सार्वजनिक स्थान हो, बस हो, मेट्रो ट्रैन हो या कोई पार्क की शांत जगह, आसानी से लोगों के हाथों में किताबें देखी जा सकती हैं।  डॉक्टर के यहां अपनी बारी का इंतज़ार करते अधिकांशतः मरीज अथवा उनके साथ गये लोग उपन्यास पढ़ते नजर आते हैं। बच्चों में पढ़ने की आदत डलवाने के लिये माता-पिता कड़ी मेहनत करते हैं। उन्हें हफ्ते में दो से तीन बार नयी किताबों से परिचय करवाने और खरीदने के लिये पब्लिक लाइब्रेरी ले जाते हैं।
अक्सर सुनने में आता है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय अभिभावक और उनके बच्चे हिंदी या अपनी प्रांतीय भाषा की किताबें नहीं पढ़ते और सिर्फ अंग्रेजी में लिखी किताबों में ही उनकी रुचि रहती है। यह मिथ्या धारणा है। मेरा अनुभव है कि प्रवासी भारतीय अपने बच्चों को हिंदी और अपनी मातृभाषा में लिखी हुई किताबें ज़रूर पढ़वाते हैं और आगे पढ़ते रहने के लिए प्रेरित करते हैं। इंडियन माइथोलॉजी की किताबें अपने घरों में रखने और उन्हें पढ़ने का चलन यहाँ सभी भारतीय परिवारों में देखने को मिलता है। मेरी एक मित्र जो ओडिशा से यहां आयी हैं, अपने बच्चों को अपनी भाषा की किताबें हर साल भारत से लेकर आती हैं। शुरूआत में वे खुद बच्चों के साथ बैठकर किताबें सुनाती थीं, पर अब उनके बच्चे स्वयं ही अपनी किताबें चयन करते हैं  और शौक से पढ़ते हैं।
इसी तरह हिंदी की छोटी-छोटी कहानियों की किताबों से लेकर प्रसिद्ध महान लेखकों की कृतियां यहां के बच्चे पढ़ते हैं। मिडिल स्कूल में बच्चे जीवन कथा और प्रेरक-व्यक्तित्व की किताबें अधिकतर पढ़ते देखे गए हैं। अब्राहम लिंकन, जॉर्ज वाशिंगटन से लेकर महात्मा ग़ांधी, लालबहादुर शास्त्री, स्वामी विवेकानंद की जीवनी बच्चों में व्यापक तौर पर प्रसिद्ध है। कुछ हाईस्कूल बच्चे इंडियन-अमेरिकन ऑथर की किताबें भी पढ़ते हैं, जिसमें चित्रा बेनर्जी, देवका रानी और झुम्पा लाहिरी की किताबें शामिल हैं। यह तथ्य यहाँ आसानी से देखने को मिलता है कि अपनी संस्कृति और भाषा से हमेशा ही बना रहता है।

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