ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
इतना हुए क़रीब कि हम दूर हो गए
01-Sep-2016 12:00 AM 7620     

बहते हुए अश्कों से ग़म की लज्जत उठाने वाले इस अज़ीम शायर का नाम है गणेश बिहारी "तर्ज़", जिनकी किताब "हिना बन गयी ग़ज़ल" के हिंदी संस्करण का अनावरण हो उससे  पहले ही 17 जुलाई 2009 को वे इस दुनिया-ऐ-फ़ानी से कूच कर गए।
ज़िन्दगी का ये सफ़र भी यूँ ही पूरा हो गया
इक ज़रा नज़रें उठायीं थीं कि पर्दा हो गया
दर्द जब उमड़ा तो इक आंसू का कतरा हो गया
और जब ठहरा तो बढ़ कर एक दरिया हो गया
अपनों को अपना ही समझा ग़ैर समझा ग़ैर को
गौर से देखा तो देखा मुझको धोका हो गया
अव्वल अव्वल तो समाधी में अँधेरा ही रहा
आखिर आखिर हर तरफ जैसे उजाला हो गया
ऐसे और इस तरह के अनेकों शेर पढ़ कर मालूम हुआ कि तर्ज़ साहब कितने कद्दावर शायर थे। दर्द जब उमड़ा... जैसा शेर एक बार पढ़ने के बाद ज़ेहन से उतरने का नाम ही नहीं लेते। ज़िन्दगी को बहुत करीब से देखने और समझने वाला शख्स ही ऐसे शेर कह सकता है। 18 मई 1928 को लखनऊ में पैदा हुए तर्ज़ साहब की शायरी में हमें वहां की नफासत और नजाकत दोनों दिखाई पड़ती है।
इक ज़माना था कि जब था कच्चे धागों का भरम
कौन अब समझेगा कदरें रेशमी ज़ंजीर की
त्याग, चाहत, प्यार, नफरत, कह रहे हैं आज भी
हम सभी हैं सूरतें बदली हुई ज़ंजीर की
किस को अपना दुःख सुनाएँ किस से अब मांगें मदद
बात करता है तो वो भी इक नयी ज़ंजीर की
शोर शराबे और आत्मप्रशंसा से कोसों दूर रहने वाले इस ग़ैर मामूली शायर को मकबूलियत की वो बलंदी नहीं मिली जिसके वो हकदार थे। उनके बारे में मशहूर शायर जनाब अली सरदार जाफरी साहब ने कहा है कि "सारे हिन्दुस्तान में बिखरे हुए कुछ ऐसे शायर भी मिलेंगे जिनके नाम या तो अपने इलाकों से बाहर नहीं गए हैं या बिलकुल गुमनामी के आलम में हैं। मेरे अज़ीज़ दोस्त तर्ज़ ऐसे शायर हैं जो ज्यादातर अपने हल्कए अहबाब में रहना पसंद करते हैं। इनके इस मिजाज़ ने उर्दू के आम पढ़ने वालों को उनकी ग़ज़लों के हुस्न से महरूम रखा है।"
है बात वक्त वक्त की चलने की शर्त है
साया कभी तो कद के बराबर भी आएगा
ऐसी तो कोई बात तसव्वुर में भी न थी
कोई ख्याल आपसे हट कर भी आएगा
मैं अपनी धुन में आग लगाता चला गया
सोचा न था कि ज़द में मेरा घर भी आएगा
हिना बन गयी ग़ज़ल, जैसी अनमोल शायरी की किताब में तर्ज़ साहब की उम्दा ग़ज़लें, नज्में, कतआत संग्रहीत हैं। इस बेजोड़ किताब को पाने के लिये मो. 09892165892 पर सम्पर्क किया जा सकता है। संभव है आपको यह अनमोल किताब प्राप्त हो जाये।

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