ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
यहाँ पर भीड़ में सब अजनबी हैं
01-Jan-2017 01:52 AM 3753     

शायर जनाब अनवारे इस्लाम की बात करती हुई ग़ज़लों की किताब का शीर्षक है- मिजाज़ कैसा है।
उस की आँखों में आ गए आंसू
मैंने पूछा मिजाज़ कैसा है
दूर तक रेत ही चमकती है
कोई पानी नहीं है धोका है
किसके काँधे पे रखके सर रोऊँ
हाल सबका ही मेरे जैसा है
अनवारे इस्लाम साहब भोपाल से सुखनवर नाम से साहित्यिक पत्रिका नियमित रूप से प्रकाशित करते हैं। आज के दौर में उनके इस जोखिम भरे काम के लिए उन्हें बधाई दी जानी चाहिए।
तुम अपनी रोशनियों पर गुरूर मत करना
चराग सबके बुझेंगे हवा किसी की नहीं
वो होंठ सी के मेरे पूछता है चुप क्यूँ हो
किताबे जुर्म में ऐसी सजा किसी की नहीं
चराग़ जलने से पहले ही घर को लौट सकें
हमारे वास्ते इतनी सी दुआ किसी की नहीं
मिजाज़ कैसा है की ग़ज़लें बहुत सादा ज़बान में आपसे बात करती चलती हैं। सीधी सच्ची बातें हैं जो बहुत सरलता से ग़ज़ल के शेरों में पिरोई गयी हैं। वो अपने बारे में भी इस किताब में कुछ नहीं कहते जो कुछ कहती हैं उनकी ग़ज़लें कहती हैं। खास बात तो ये है के उनकी शान में, जैसा की अब हर किताब के शुरूआती पन्नों में इक रिवाज़ सा बन गया है, किसी बड़े शायर, नेता या फिर उनके यार दोस्तों ने कसीदे नहीं पढ़े।
है मुश्किल पिताजी के घर को बचाना
मिरे भाई अपना मकाँ चाहते हैं
मिरे हिस्से में तो लहू भी नहीं है
वो हाथों को रंगे हिना चाहते हैं
है बाकी ज़मीं पर बहुत काम फिर भी
सितारों से आगे जहाँ चाहते हैं
आकर्षक आवरण में लिपटी इस किताब में अनवारे इस्लाम साहब की अस्सी ग़ज़लें अपनी सादगी से पाठकों का मन मोह लेती हैं। ज़िन्दगी को खुशगवार बनाने वाली बातों को बहुत ख़ूबसूरती से अशआरों में पिरोया गया है। इन छोटी-छोटी बातों का अपना महत्व है अगर हम इन्हें अपने जीवन में उतार लें तो बहुत सी अनचाही तकलीफों से निजात पा सकते हैं। ये बातें बिना लाग लपेट के अनवारे साहब अपने दिलकश अंदाज़ में हमें बतातें हैं।
गुम न हो जाय साझी विरासत कहीं
अपने बच्चों को किस्से सुनाया करो
भीग जाने का अपना अलग लुत्फ़ है
           बारिशों में निकलकर नहाया करो
उन्होंने अपने उस्ताद शायर पिता स्व. सलाम सागरी से मिली शायरी की इस विरासत को जिंदा रखा है।
तू है मेरा के तेरे सिवा कौन है
मैं हूँ तेरा तो मुझसे जुदा कौन है
फूल कागज़ के हैं देखने के लिए
घर सजा लीजिये सूँघता कौन है
आपकी रचनाएँ सीबीएसई, महाराष्ट्र राज्य तथा विदेशों के हिंदी पाठ्यक्रमों में भी शामिल हैं। आलेख प्रकाशन वी-8, नवीन शाहदरा दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस किताब को खरीदने के लिए अनवारे साहब के मोबाइल नं. 9893663536 तथा ईमेल द्मद्वत्त्ण्ठ्ठदध्ठ्ठद्ध12ऋढ़थ्र्ठ्ठत्थ्.ड़दृथ्र् पर संपर्क किया जा सकता है।

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