ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
उदयन वाजपेयी
उदयन वाजपेयी
जन्म 1960 सागर, मध्यप्रदेश। चर्चित कवि-कहानीकार। कहानी संग्रह- सुदेशना, दूर देश की गन्ध, कविता संग्रह- कुछ वाक्य, पागल गणितज्ञ की कविताएँ, एक निबन्ध संग्रह, फिल्मकार मणिकौल के साथ उनके सम्वाद की पुस्तक "अभेद आकाश' प्रकाशित। कृतियों का तमिल, बंगाली, मराठी, फ्राँसीसी, पोलिश, बुल्गारियायी, स्वीडिश, अँग्रेजी आदि में अनुवाद। कृष्ण बलदेव वैद फैलोशिप और रज़ा फाउण्डेशन पुरस्कार से सम्मानित।

साबरमती के तट पर
साबरमती नदी के तट को सीमेंट का बना दिया गया है। दूर से देखने पर अब वह पेरिस की सेन नदी के तट की फूहड़ आकृति जान पड़ता है। साबरमती के ही तट पर गांधी आश्रम, जिसे "साबरमती आश्रम"  नाम से जाना जाता है, स्थित है। यह आश्रम महात्मा गांधी और उनके करीब
देशाटन का आनंद है अलग
भारत की संस्कृति एक आत्मसंबद्ध निरंतर संस्कृति है इसलिए यहां का हर क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से हर दूसरे क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हम देश के दूसरे इलाके में भोजन करते हैं, तो हम नए स्वाद का अनुभव करने के साथ देश की एकता को भी चख लेते हैं।देश घूमन
ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया
1बहुत बरस नहीं हुए जब कबीर-गायन सुनते हुये मेरी मुलाकात एक बूढ़े ग्रामीण से हुई। उन्होंने पहले काफी संकोच से मुझसे समय पूछा और फिर मुझे कबीर में भीगता देख हल्के से पूछा, ""क्या आप जानते हैं कि ये क्या गाया जा रहा है?'' तब स्टेज पर बैठी गायिका
झूठ का समाजशास्त्र
कवि ¶ाुंतारी तानी कावा ने अपनी एक कविता में लिखा है : "कुछ बातें हम झूठ बोलकर ही कह सकते हैं।' बात सही है सचमुच कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो बोली ही नहीं जा सकतीं। उन्हें प्रकट करने के लिए झूठ का सहारा लेना पड़ता है। उदाहरण के लिए अगर आप किसी ऐस

बिना सम्मान समता का मूल्य नहीं
हमारा यह समय अन्याय चीजों के लिए जाना जायेगा। मसलन बाजार के घर के कोनों तक में घुस आने के लिए, बुद्धि के तिरस्कार के लिए पुस्तकों की अवमानना के लिये, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों के स्थापित होने के लिए, परम्परा के अवमूल्यन के लिए आदि-आदि। इन सब पर अलग से ब
पारम्परिक ज्ञान भी मेक इन इंडिया है
भारत उन विरले देशों में है जहां के नागरिक अपने पारम्परिक विवेक और ज्ञान से लगभग अलग हो चुके हैं। इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि भारत एक ऐसी सभ्यता है जहां आत्म विस्मृत नागरिकों का वास है। इसका एक बड़ा कारण भारत का करीब सौ से अधिक वर्षों का उपनिवेशीकर
विलायती मामा
1.उन दिनों "प्रवासी' शब्द इस्तेमाल नहीं होता था। शायद इसीलिए इंग्लैंड में रह रहे अपने मामा को हम विलायत गया बताये थे। वे इंग्लैंड में रहकर दूर अवश्य रह रहे थे पर प्रवासी नहीं थे। उनके दूर होने का दु:ख हमारे नाना-नानी की बूढ़ी आँखों की गहरायी
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