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पड़ौसी
01-Jan-2019 01:35 PM 2197     

पड़ौसी के अहाते में खड़े वृक्षों की छाया हमारे घर पर पड़ती है। इस घर में रहते हुए पाँच बरस हो गये, पड़ौसी हमारे घर कभी नहीं आया। वह तड़के घर से निकल जाता है और देर रात कब लौटता है, पता ही नहीं चलता। कभी-कभार वह अपने अहाते में दिख जाता है। उसके अहाते में उसकी छाया भी दिखती है। वह रोज अपनी छाया के साथ न जाने कहाँ चला जाता है। फिर वृक्ष ही उसके घर पर छाया किए रहते हैं। घोंसले में बैठी गौरैयाँ हमें दिन भर आवाज देती रहती हैं।
उसकी बोलचाल किसी से नहीं है। शायद अपने घर से भी नहीं। वह घर में है, यह अंदाज लगाना मुश्किल है। जब कोई उसके द्वार पर दस्तक देता है तो वह बहुत देर तक दरवाजा नहीं खोलता। दस्तक देने वाला यह सोचकर लौट जाता है कि वह घर पर नहीं है। बस हल्की हवा में पेड़ सरसराते रहते हैं। जैसे कह रहे हों कि हम भी न जाने कबसे उसे बुला रहे हैं। उसके अहाते में आम और अमरूद के पेड़ हैं। उन्हीं के पास जासोन के लाल फूल खिले रहते हैं। जासोन की टहनियाँ कालोनी की सड़क की तरफ झुकी रहती हैं। उन पर खिले फूल आने-जाने वालों को ताकते रहते हैं। कोई उन्हें तोड़ ले तो दूसरे दिन वे फिर खिल उठते हैं। टहनियाँ थोड़ी और आगे आ जाती हैं। पड़ौसी के आम की डार हमारे घर की ओर झुकती ही चली आ रही है। रोज हमारे अहाते में थोड़ी-सी छाया बढ़ जाती है। जब आम में बौर आता है तो पड़ौसी के अहाते से कोयल बोलती है। वह अक्सर हमारे घर की ओर झुकी हुई टहनी पर भी आ बैठती है। टहनी पर छोटी-छोटी अमियाँ लटकने लगती हैं। कुछ ही दिनों में डाल इतनी झुक जाती है कि हम उसके आम भी तोड़ सकते हैं।
जब चटनी खाने का मन करता है तो पत्नी कहती है-- आम की जो डाल हमारे अहाते में आ गयी है उसके आमों पर हमारा अधिकार है। फिर मन ही मन सोचती है कि आम की जड़ें तो पड़ौसी के अहाते में हैं। जिसकी जमीन पर जड़ें हैं, आम भी उसी के कहलाते हैं। पर यह बात आम का पेड़ कहाँ जानता है और तोते तो बिल्कुल ही नहीं जानते कि आम किसके हैं।
जब तोते हमारे अहाते की टहनी पर बैठते हैं तो पत्नी सोचती है कि वे उसकी इच्छा पूरी करने आये हैं। पर वे सिर्फ अपनी ही इच्छा पूरी करते हैं। बिना डण्ठल को काटे वे टहनी पर ही आम को कुतरते रहते हैं और एक फ्यूज बल्ब की तरह गुठली लटकी रह जाती है। अमरूद का पेड़ बहुत दिनों से हमारे अहाते की ओर झुकने की कोशिश कर रहा है पर आम की डालियाँ उसका रास्ता रोके हुए हैं। एक दिन हमने देखा कि आम की घनी टहनियों के बीच से अमरूद की एक डाल हमारी तरफ झाँकने लगी है और उस पर एक अमरूद फल रहा है, जैसे पड़ौसी हाथ बढ़ाकर अमरूद देने की पेशकश कर रहा हो। हमें शक था कि पड़ौसी रोज अपने आम और अमरूद गिनकर जाता है और घर लौटकर उन्हें फिर गिनता है। हम उन्हें तोड़ते नहीं कि कहीं वह हम पर शक न करे। एक दिन वह अमरूद किसी तोते ने हमारे अहाते में गिरा दिया। उस लाल अमरूद पर सिर्फ एक ही चोंच का घाव था। पत्नी उसे उठा लायी फिर उसकी चटनी पिसी और घर के लोगों ने बड़े स्वाद से खायी। हमने थोड़ी-सी चटनी पड़ौसी के घर भिजवाई। उसे बताया कि आपका एक अमरूद हमारे अहाते में आ गिरा था। वह हमारे इस व्यवहार से खुश हुआ यह तो हम कभी नहीं जान पाये--बस कुछ ही दिनों से उसके अहाते में अचानक फूलने लगी रातरानी से भीनी-भीनी खुशबू आने लगी है। कभी-कभी चीटियाँ दीवार फाँदकर हमारे अहाते में शक्कर के दाने छिपाने लगी हैं...

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