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स्वर्ण ज्योति
स्वर्ण ज्योति

1 सितंबर 1962 को जन्म। मातृभाषा कन्नड़। अर्थशास्त्र और हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि। हिंदी, तमिल और अँग्रेज़ी भाषाओं का ज्ञान। काव्य संग्रह- अच्छा लगता हैतथा एक कुल्हड़ चायप्रकाशित। अनेक रचनाओं का तमिल और कन्नड़ में अनुवाद किया। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। अऩेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत। सम्प्रति - साहित्य सृजन एवं पांडिचेरी में निवास।


विश्व का एकमात्र अंक-काव्य  सिरि भूवलय
विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है भाषा। मानव का मानव से संपर्क माध्यम है भाषा। किंतु भाषा क्या है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? मानव ध्वनि संकेतों के सहारे अपने भावों और विचारों की अभिव्यक्ति करने के लिए जिस माध्यम को अपनाता है उसे भाषा की संज्
नई सोच
कभी उन्हें सीने से लगा कर हम नींद में खो जाते लफ़्ज़-लफ़्ज़ चुपचापसुनहरे ख्वाब बन जातेसफ़ा पलटने का भी कुछ ख़ास ही था मज़ा पाक-पकवानों से अलग वो स्वाद था चखानीमरोज़ की धूप मेंमिलने का बहाना बना ज
प्रगति
शहर की चकाचौंध में कुछ खो-सा गया है कि जेहन में गाँव का नक्शा रखा हैजहाँ दूर से ही दीख जाती हैंछतों पर सूखती मिर्चें और बड़ियांनीचे आँगन में सजती हैंतुलसी और गुलाब की क्यारियांखेत की पगडण्डी के इस ओर
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