ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
स्वीडन में भारतीय समाज
01-Jan-2016 12:00 AM 3353     

भारतीय और भारतवंश का समाज यूरोप में ब्रााडफोर्ड जैसी जगहों को छोड़कर बिलकुल अल्पसंख्यक है लेकिन भारतीय संस्कृति की पहचान बढ़ती जा रही है और इसके साथ भारत एक प्रमुख आर्थिक खिलाड़ी बन गया है। यूरोप में भारतीय माइग्रेशन द्वितीय महायुद्ध से पहले इंडियन इंडिपेंडेंस और इसके बाद लगातार लहरों में हुआ करता था। ब्रिाटेन में भारतीय प्रवास के अलावा ऐतिहासिक रूप से भारत से जुड़ा हुआ है। नैथरलैंड, जर्मनी और फ्रांस (विशेष रूप से उन्नीसवीं सदी के भारत प्रवास के केन्द्रों से) में एक महत्वपूर्ण भारतीय उपस्थिति है। वह शायद आज ख़ास तौर पर बेरोज़गारी की समस्याओं की वजह से हो सकता है और इसके इस अलावा छात्र अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जाते हैं। यूरोपीय एकीकरण नीति आत्मसात करने की नीति नहीं है। तो ऐसे में यूरोप में मल्टीकल्चरलिस्म से मुकाबला करते हुए भारतीय समुदाय के लोग तथाकथित पर्सन ऑफ़ इंडियन ओरिजिन की पहचान, जो उन्हें विरासत में मिली (हालांकि यह काल्पनिक भी है) लुप्त न होने देने का दृढ़ नज़र आते हैं। आम तौर पर यूरोपीय कानून जातीय और सांस्कृतिक अनेकता की सुरक्षा के पक्ष में हैं। कई भारतीय संघ यूरोप में उपलब्ध हैं और शुरू में भेदभाव के खिलाफ लड़ने के लिए स्थापित हुए जिससे फिर दोस्तों के नेटवर्क सक्रिय हुए। इन संगठनों की भूमिका है कि नए देश में भारतीय समुदाय को मदद या भावनात्मक समर्थन मिल सके और इस प्रकार से एक समुदाय की भावना और भारतीयता की भावना पैदा हो और जारी रहे। वै?िाक संदर्भ में यूरोप में भारतीय आबादी की भूमिका पर बहुत कम अध्ययन हुए हैं। लंदन, बर्लिन या पेरिस शहरों में हज़ारों की संख्या में भारतीय रहते हैं। उन्होंने वहाँ हिंदू मंदिर बनवाए और भारतीय परंपरा को जीवित रखने के क्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। लेकिन अन्य यूरोपीय देशों में, खासकर स्वीडन आदि में प्रवासी भारतीयों की दशा पर बहुत ज्यादा प्रकाश नहीं पड़ा है। अनेक बरसों पहले टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक सर्वेक्षण में उल्लिखित किया कि भारतीय स्वीडन में दक्षिण एशिया लोगों के बीच सबसे बड़ा समूह का ग्रुप है। पिछले दशक के दौरान, काम करने के लिए स्वीडन में आने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ती रही है। 2001-2010 में भारतीय छात्रों की एक बड़ी संख्या ने शिक्षा खत्म करने के बाद वि?ाविद्यालयों में, टेलीकम्युनिकेशन या जैव चिकित्सा कंपनियों में अत्यधिक कुशल रोजगार पाकर देश में बसने का तय किया है। इन विद्यार्थियों में से एक रमेश नंबूरी जो मध्यप्रदेश में पैदा हुए और स्वीडन में पढ़ने आये, से हमारी रोचक बातचीत हुई। उसके कुछ अंश यों हैं : आप अकेले या परिवार के साथ रह रहे हैं? भारत की संस्कृति आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है? मैं यहाँ अकेले रह रहा हूँ। मेरे माता-पिता भारत में रहते हैं। और हाँ, मैं अपनी संस्कृति को महत्त्व देता हूँ, क्योंकि मुझे लगता है वह मेरे दिल में है और आखिरकार मैं भारतीय हूँ जो भारत में पैदा हुआ और प्रौढ़ हुआ। क्या आप भारत की गतिविधियों की खबर रखते हैं? यकीनन मैं नियमित रूप से भारतीय समाचार चैनलों को देखता हूँ और भारतीय समाचार-पत्रों के नेट संस्करणों को रोज़ पढ़ता हूँ ताकि मुझे पता चले कि भारत में क्या हो रहा है। मैं स्पष्ट रूप से राजनीति में रुचि रखता हूँ इसलिए मैं खासतौर पर भारतीय राजनीति का उठा-पटक पर नज़र रखता हूँ। क्या स्वीडन रहने में आपकी लाइफ स्टाइल बदल गयी है? हाँ लगता है, थोड़ा-सा मेरा सोचने का तरीका बदल गया है और साथ ही अपना व्यवहार भी। मैं अपने को अब और अधिक स्वतंत्र और पहले से कहीं अधिक सामाजिक महसूस करने लग रहा हूँ।

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