ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
सुशीला शिवराण
सुशीला शिवराण

एक नई भोर

तूम पुरुष हो ना
क्यों न हो तुममें दम्भ
तुम पैदा ही ताकतवर हुए
तुम्हारा बनाया समाज
ख़ूब पोसता है तुम्हारे दम्भ को
सिखाता है तुम्हें
कि तमाम कमियों
तमाम ख़ामियों के

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