ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
सुनो नदी उसने कहा
CATEGORY : कविता 01-Oct-2018 08:35 PM 123
सुनो नदी उसने कहा

सुनो नदी

नदी तुम यूँ ही बहती रहना
नदी तुम कभी भी कुछ मत कहना
नदी तुम नहीं हो सिर्फ नदी
तुम्हें कहा है हमने "माँ"
माँ की तरह तुम सब कुछ सहना
नदी तुम कभी भी कुछ मत कहना
बूँद-बूँद मरना
बस पाप हरना
खबरदार, एक शब्द न कहना
देवी हो तुम, चुप ही रहना
चुपचाप यूँ ही बहती रहना
नदी तुम कभी भी कुछ मत कहना।


उसने कहा

कहा था मैंने
हद की हद न पार करो
मौन मेरी हार नहीं
उसे मखौल मत बनाओ
कहा था मैंने बिना कहे
पर तुम निर्लिप्त, तुम स्वकेन्द्रित
तुम संवेदनशून्य रहे
अपनी धुन में चलते रहे
हद से हद तक बढ़ते रहे
स्नेह था मेरा, मेरा मौन
दबकर, सड़कर बना मवाद
अब निकली है मेरी चीख
अब निकला है मेरा गुबार
अब हदें तोड़ दी हैं मैंने भी
तोड़ दिए हैं सारे पाट
अब चलो बह चलें हम अबाध
तुम अपनी चलो
मैं अपनी चलूँ
अब किस बंधन का आधार...
अब किस बंधन का आधार...

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