ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
भारत से प्रेम की कहानी
01-Dec-2018 06:48 PM 1039     

इज़राइल में 18 साल की उम्र के प्रत्येक युवक को सेना में शामिल होने और तीन साल तक सेवा करने के लिये कानून द्वारा बाध्य किया जाता है। और आम तौर पर सैनिक सेवा पूरी करने के बाद बहुत से युवा लोग कुछ महीनों के लिये भारत की यात्रा पर जाते हैं। मैंने भी ऐसा ही किया। 2011 में मैंने ख़ुद को पहली बार भारत में पाया। एक अलग संस्कृति से यह मेरा पहला परिचय हुआ। उस समय मुझे थोड़ी असुविधा भी महसूस हुई। सड़कों में लोगों की भीड़-भाड़, वाहनों का शोरगुल, हर जगह मसालेदार भोजन की आती हुई तेज़ गंध, सब कुछ विचित्र-सा लग रहा था। हाल ऐसा था कि कई बार मैंने जल्दी से जल्दी वापस लौटने की बात सोची।
लेकिन एक महीना बीत जाने पर मैं नए माहौल का आदी बन गया। तब मैं दूसरी नज़रों से चारों तरफ़ देखने लगा। तभी पता चला कि मेरे सामने एक बहुमुखी संस्कृति है जिसका अध्ययन करने में बड़ा मज़ा आया। मैंने स्थानीय लोगों से बात करनी शुरू की जिन्होंने मेरे प्रति सौहाद्र्रपूर्ण व्यवहार किया। धीरे-धीरे भारत के विभिन्न धर्मों से मेरी रुचि विकसित होने लगी। अनेक मंदिर देखने के बाद विभिन्न देवताओं के बारे में मेरी जानकारी बढ़ने लगी। वाराणसी में मैंने भगवान शिव के बारे में बहुत कुछ जाना। अयोध्या में मैं भगवान राम की महत्ता से अवगत हुआ। बोधगया और धर्मशाला में भगवान बुद्ध की विचारधारा का मैंने परिचय लिया। अमृतसर के हरिमंदिर साहिब में मैंने गुरू ग्रंथ साहिब की शिक्षा को जाना और एक लंगर में भोजन भी किया। मैंने कई बड़ी-बड़ी मस्जिदों का भी चक्कर लगाया। उदाहरण के लिये दिल्ली में भारत की सबसे बड़ी जामा मस्जिद और मुंबई में हाजी अली की दरगाह में गया। दरगाह में कव्वाली गायन ने मुझे सम्मोहित किया।
तीन महीने भारत में गुज़ारकर जब मैं घर वापस लौटा तो मैंने पाया कि मुझे भारत से प्रेम हो गया और मेरी प्रेम कहानी का यह केवल आरंभ था। तब से आज तक मैं कई बार भारत का भ्रमण कर चुका हूं। उत्तर से दक्षिण तक और पूर्व से पश्चिम तक मैं भारत के 15 राज्यों में घूम आया हूं। मेरा सपना है कि भारत के बाकी सभी राज्यों का दौरा करूं। भारतीय संस्कृति बेहतर तौर पर समझने के लिये मैंने तेल अवीव विश्वविद्यालय के पूर्वी ऐशिया के अध्ययन विभाग में दाख़िला लिया और हिंदी भी सीखने लगा। कुछ लोगों का कहना है कि भारत में अंग्रेज़ी बोलकर ही लोग काम चला लेते हैं, हिंदी की ज़रूरत नहीं। लेकिन मुझे लगता है कि हिंदी बहुत सुंदर होने के साथ-साथ एक ऐसी भाषा है जो देश में विभिन्न लोगों को जोड़ने का काम करती है। मैंने अपने गुरु डॉ. गेनादी श्लोम्पेर की अगुआई में हिंदी सीखने में काफ़ी उपलब्धियां प्राप्त की हैं। अब मैं हिंदी की किताबें, अख़बारों और पत्रिकाओं को पढ़ने की स्थिति में हूं तथा उन लोगों से संवाद कर सकता हूं जिनको अंग्रेज़ी नहीं आती।
2014 में मेरे जीवन में एक महत्त्वपूर्ण घटना घटी जब अपने गुरुजी और कई सहपाठियों के साथ मैं भारत के शैक्षिक भ्रमण पर रवाना हो गया। वह भ्रमण प्रेरक और अद्वितीय था। हमारे दल ने भिन्न-भिन्न स्कूलों और विश्वविद्यालयों में इज़रायल की ज़िंदगी के कई पहलुओं पर व्याख्यान दिये। हम प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, बोधगया, दार्जिलिंग, कोलकाता, भुवनेश्वर और पुरी गए तथा वहां के दर्शनीय स्थान देखे। गोरखपुर में हमारा गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया, वह विशेष तौर पर यादगार है। कहते हैं कि भारतीय समाज "अतिथि देवो भव" की भावना को मानता है। मैंने इस भाव को महसूस किया। मैंने भारत में सहिष्णुता का अर्थ भी समझा। मैंने देखा कि यहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है। इसका एक उदाहरण हमें पुराने शहर मगहर में देखने को मिला जहां संत कबीर के दो स्मारक बने हैं। एक समाधि के रूप में तो दूसरा मकबरे के रूप में।
मुझे भारत के तरह-तरह के व्यंजनों का स्वाद भी बहुत अच्छा लगा। उदारहण के लिये पंजाब की सब्ज़ी भाजी और दक्षिण भारत का मसाला डोसा मेरे पसंदीदा व्यंजन हैं। इज़रायल में बहुत से स्थानों में आपको भारतीय भोजन मिलेगा। मगर भारत में बनाया हुआ खाना सबसे अच्छा है। भारत की कई यात्राएं कर चुकने के बाद मैं ख़ुद शुद्ध शाकाहारी बन गया। सभी जंतुओं को समान मानने के कारण मुझसे अब मांस, मछली या अंडा नहीं खाया जाता है।
मैंने भारतीय संगीत और हिंदी पिक्चरों को पसंद करना शुरू किया है। आज तक मैंने सौ से अधिक हिंदी फ़िल्में देखीं जिनमें "शोलेे" सबसे प्रिय है। तेल अवीव में हिंदी दिवस के दौरान मैंने अपने मित्रों के साथ फ़िल्म "मिस्टर इंडिया" के एक दृश्य का मंचन किया। इस तमाशे में मैंने अनिल कपूर की भूमिका निभाई।
2016 में मेरा एक सपना पूरा हो गया जब मुझे इज़रायल स्थित भारतीय राजदूतावास के वाणिज्यिक विभाग में नौकरी मिली। भारत की सेवा करना मेरे लिये सम्मान की बात है। मेरे काम का लक्ष्य हमारे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
2017 में हमारे संबंध चरम सीमा तक पहुंचे जब भारत के प्रधानमंत्री इज़रायल की यात्रा पर आए और मुझे तेल अवीव में उनके दर्शन करने का अवसर मिला। भारत के प्रधानमंत्री का इज़रायल में पहली बार पधारना एक ऐतिहासिक क्षण था।
पहली भारत यात्रा से मेरे जीवन ने करवट ली। इसमें जो सकारात्मक परिवर्तन आए हैं उनके लिये मैं उन सभी लोगों का और विशेष कर अपने भारतीय दोस्तों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने जीवन की इस राह पर मेरा साथ दिया और आगे बढ़ने के लिये प्रेरित किया।

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