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सूर्यबाला
सूर्यबाला
25 अक्टूबर 1944 को वाराणसी में जन्म। प्रख्यात साहित्यकार। प्रमुख कृतियाँ - उपन्यास : मेरे संधि पत्र, सुबह के इंतज़ार तक, अग्निपंखी, यामिनी-कथा, दीक्षांत। कहानी संग्रह : एक इंद्रधनुष, दिशाहीन, थाली भर चांद, मुंडेर पर, गृहप्रवेश, कात्यायनी संवाद, सांझवाती, इक्कीस कहानियां, पांच लंबी कहानियां, सिस्टर! प्लीज आप जाना नहीं, मानुष-गंध, वेणु का नया घर, प्रतिनिधि कहानियां, सूर्यबाला की प्रेम कहानियां। व्यंग्य : अजगर करे न चाकरी, धृतराष्ट्र टाइम्स, देशसेवा के अखाड़े में, भगवान ने कहा था। बाल साहित्य : झगड़ा निपटारक दफ़तर। सम्मान- प्रियदर्शिनी पुरस्कार, घनश्याम दास सराफ़ पुरस्कार।

महिला दिवस और फ्रेंच टोस्ट
वह महिला दिवस की खुशनुमा सुबह थी। यानी पूरी तरह अपनी, सिर्फ एक महिला की सुबह। इस सुबह में किसी पुरुष का हस्तक्षेप बिलकुल नहीं था। (क्योंकि पुरुष अभी सो रहा था)। मुझे सारा संसार महिलामय दृष्टिगत हो रहा था। करोड़ों साल से उगते आ रहे सूर्य का प्रभामंड
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