ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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अविस्मरणीय डॉ. राम चौधरी

त्यागमूर्ति डॉ. राम चौधरी के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है। उनका जीवन एक महान् शिक्षाविद् का जीवन था जो अपने विश्व विद्यालय की चार दीवारों के बाहर अमेरिका के प्रवासी भारतीय समाज में और भारत में

"रीछ" के बहाने कुछ यादें

दूधनाथ सिंह की वे कहानियां पाठकों का खास ध्यान खींचती हैं जो दिलचस्प किन्तु प्रतीकात्मक होने के कारण उलझी हुई, जटिल और चमत्कारपूर्ण होती हैं। उनकी कहानी "रीछ" अपनी प्रतीकात्मकता, फन्तासी तथा यौन-चि

भिन्न षड्ज...

इस बार इंग्लैंड में लगभग दस वर्षों बाद ऐसी भयानक बर्फबारी हुई है। हमारे शहर वॉलसॉल में भी सड़कों पर आठ-आठ इंच बर्फ जमी थी। जिंदगी की सारी भागदौड़ पर प्रकृति ने विराम-सा लगा दिया था, यों कहूँ कि अपने-

कुँवर नारायण श्रद्धांजलि

कविता एक उड़ान हैै। यह प्रसिद्ध पंक्तियां मेलबोर्न की साहित्य-संध्या में न जाने कितनी बार कही होंगी। इन पंक्तियों के साथ मैं कुँवर नारायण का क्या परिचय दूँ, खुद "कविता" का परिचय उनके ही शब्दों में द

गवाही और जिजीविषा का कवि

हिंदी जगत में कुँवर नारायण का परिचय कराने की आवश्यकता नहीं। वे तो हिंदी कविता के एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं, उनको दुनिया की अनेक भाषाओं में अनूदित किया गया है, भारत और विदेशों में उत्कृष्ट पुरस्

मृत्यु और संस्कृतियों की रूपांतरण क्षमता

समकालीन हिंदी कवियों में सम्भवतः सर्वाधिक सम्मानित कवि कुँवर नारायण इस साल नब्बे वर्षीय हो जाएंगे। दक्षिण दिल्ली के चित्तरंजन पार्क स्थित उनका आवास अब भी रचनाकारों, आलोचकों एवं अन्य बुद्धिजीवियों क

हस्तक्षेप का कवि विनोद कुमार शुक्ल

विनोद कुमार शुक्ल समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण कवि हैं। अपनी कविता में उन्होंने तमाम ऐसे विषयों को जगह दी है, जिसकी जरूरत आज समाज में सबसे ज्यादा है। तेजी से भागती दुनिया में पीछे छूटे हुए लो

वैद वेदना

कथाकार कृष्ण बलदेव वैद के शब्द मेरी देह पर उड़ती हुई खाक की तरह झरते हैं और यह खाक देह पर ठहरती नहीं, पल-पल उसी में विलीन होती जाती है। आँखों की कोरों पर भाषा के काजल की तरह कुछ देर ठिठकती जरूर है ज

नई दुनिया का पुराना कवि

दो जुलाई 2017 को दिवंगत, 21 फरवरी 1924 को नवलगढ़, राजस्थान में जन्मे और गया बिहार में पले-बढ़े श्री गुलाब खंडेलवाल हिंदी के वरिष्ठतम साहित्यकार थे।
जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो कई यादें त

जे. कृष्णमूर्ति की अन्तर्दृष्टि

सार्थक और विशिष्ट जीवन में दृष्टि सम्पन्न जीवन-    दर्शन की गुणवत्ता स्वतः समाहित हो जाती है। सत्य की सिद्धियाँ भी जीवन में साधना से ही हासिल होती है। विगत दिनों नीदरलैंड के महत्वपूर

बाँसुरी की टेर

श्री अरविन्द कहते थे कि मानव जाति के इतिहास में वह समय भी आता है जब युध्द को मित्र की तरह गले लगाना पड़ता है। गहरे आशय से भरी उनकी यह बात मुझे हिरण्यकश्यपु के वध की याद दिलाती है और कहने का मन होता

आते ही जाने वाला

हरिवंशराय बच्चन ने - मधुशाला - काव्य रचते हुए गाया -- इस दुनिया में आते ही मैं कहलाया जाने वाला। जल्दी-जल्दी ढलते दिन में बीतता जाता जीवन किसी एक दिन नहीं रहता। वे अपनी कविता में रूप-रस-गंध-स्पर्श

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