ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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हस्तक्षेप का कवि विनोद कुमार शुक्ल
हस्तक्षेप का कवि विनोद कुमार शुक्ल

विनोद कुमार शुक्ल समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण कवि हैं। अपनी कविता में उन्होंने तमाम ऐसे विषयों को जगह दी है, जिसकी जरूरत आज समाज में सबसे ज्यादा है। तेजी से भागती दुनिया में पीछे छूटे हुए लो ...

01-Aug-2017 11:21 PM 328
वैद वेदना
वैद वेदना

कथाकार कृष्ण बलदेव वैद के शब्द मेरी देह पर उड़ती हुई खाक की तरह झरते हैं और यह खाक देह पर ठहरती नहीं, पल-पल उसी में विलीन होती जाती है। आँखों की कोरों पर भाषा के काजल की तरह कुछ देर ठिठकती जरूर है ज ...

01-Aug-2017 11:19 PM 356
नई दुनिया का पुराना कवि
नई दुनिया का पुराना कवि

दो जुलाई 2017 को दिवंगत, 21 फरवरी 1924 को नवलगढ़, राजस्थान में जन्मे और गया बिहार में पले-बढ़े श्री गुलाब खंडेलवाल हिंदी के वरिष्ठतम साहित्यकार थे।
जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो कई यादें त ...

01-Aug-2017 11:15 PM 368
जे. कृष्णमूर्ति की अन्तर्दृष्टि
जे. कृष्णमूर्ति की अन्तर्दृष्टि

सार्थक और विशिष्ट जीवन में दृष्टि सम्पन्न जीवन-    दर्शन की गुणवत्ता स्वतः समाहित हो जाती है। सत्य की सिद्धियाँ भी जीवन में साधना से ही हासिल होती है। विगत दिनों नीदरलैंड के महत्वपूर ...

01-Aug-2017 11:10 PM 327
बाँसुरी की टेर
बाँसुरी की टेर

श्री अरविन्द कहते थे कि मानव जाति के इतिहास में वह समय भी आता है जब युध्द को मित्र की तरह गले लगाना पड़ता है। गहरे आशय से भरी उनकी यह बात मुझे हिरण्यकश्यपु के वध की याद दिलाती है और कहने का मन होता ...

02-Jun-2017 03:12 AM 455
आते ही जाने वाला
आते ही जाने वाला

हरिवंशराय बच्चन ने - मधुशाला - काव्य रचते हुए गाया -- इस दुनिया में आते ही मैं कहलाया जाने वाला। जल्दी-जल्दी ढलते दिन में बीतता जाता जीवन किसी एक दिन नहीं रहता। वे अपनी कविता में रूप-रस-गंध-स्पर्श ...

01-May-2017 08:27 PM 502
नये वर्ष की देहरी पर राम की याद
नये वर्ष की देहरी पर राम की याद

हे राम मेरा यह हृदय ही तुम्हारा घर है और इस पर बड़ी विपत्ति आयी हुई है। इस घर
पर काम-क्रोध-लोभ-अहंकार ने धावा बोल दिया है। ये चारों तस्करों की तरह तुम्हारे
घर ...

01-Apr-2017 12:36 AM 649
महात्मा गांधी चरित स्वयं ही काव्य
महात्मा गांधी चरित स्वयं ही काव्य

भारत के हृदय प्रदेश के उज्जयिनी नगर निवासी यशस्वी कवि श्री शिवमंगल सिंह "सुमन" की नोटबुक में पण्डित नेहरू ने, 1954 में यह वाक्य लिख दिया था- "अपने जीवन को कविता बनाना चाहिये"।
1989 में जब पूरे ...

01-Oct-2016 12:00 AM 2972
साबरमती के तट पर
साबरमती के तट पर

साबरमती नदी के तट को सीमेंट का बना दिया गया है। दूर से देखने पर अब वह पेरिस की सेन नदी के तट की फूहड़ आकृति जान पड़ता है। साबरमती के ही तट पर गांधी आश्रम, जिसे "साबरमती आश्रम"  नाम से जाना जाता ...

01-Oct-2016 12:00 AM 2985
स्मृतिगंधा
स्मृतिगंधा

जैसे पूरा यथार्थ आमने-साने की पहाड़ियों के बीच फैला है। एक पहाड़ी उजाले की दूसरी अंधेरे की। उजाले में अंधेरे की पहाड़ी दिखाई देती है-- उजाले को अपने पास बुलाती, इतने पास कि उजाले की पहाड़ी अंधेरे में ड ...

01-Apr-2016 12:00 AM 687
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