ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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महाप्राण निराला कुछ स्मृतियाँ
प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी पर मुझे याद आता है कि आज महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी का जन्मदिन है। उसके साथ ही न जाने कितनी और स्मृतियाँ उभर आती हैं। दारागंज, इलाहाबाद में बिताये हुए बचपन के वे सुहाने दिन, जिनकी उन दिनों कोई महत्ता आभासित नही...
डॉ. रवीन्द्र अग्निहोत्री राजभाषा को समर्पित व्यक्तित्व
एक ऐसा व्यक्तित्व जिसमें सरलता थी, सौम्यता थी, स्पष्टवादिता थी, निडरता थी, कर्मठता थी, सादगी थी और ऐसे ही व्यक्तित्व का नाम था डॉ. रवीन्द्र अग्निहोत्री जो विगत 15 जनवरी 2019 को हमारे बीच नहीं रहे। अग्निहोत्री जी उस दौर में बैंकिंग जगत् के राजभाषा-...
कृष्णा सोबती के बिना कुछ कम दुनिया रह गई हमारी दुनिया
पिछले दिनों देहरादून में अपने बेटे के फ़्लैट में हमने देखा कि उसकी मेज पर एक उजला टेबल लैंप रखा हुआ है। हमें कुछ संतोष और अभिमान हुआ। यह टेबल लैंप हिंदी की प्रख्यात लेखिका कृष्णा सोबती ने हमें उपहार में दिया था। हमने इसे अपने बेटे के पास भेज दिया- ...
अविस्मरणीय डॉ. राम चौधरी
त्यागमूर्ति डॉ. राम चौधरी के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है। उनका जीवन एक महान् शिक्षाविद् का जीवन था जो अपने विश्व विद्यालय की चार दीवारों के बाहर अमेरिका के प्रवासी भारतीय समाज में और भारत में भी विस्तृत था। वे अपने पेशे से न्यूयॉर्क प्रदेश के...
"रीछ" के बहाने कुछ यादें
दूधनाथ सिंह की वे कहानियां पाठकों का खास ध्यान खींचती हैं जो दिलचस्प किन्तु प्रतीकात्मक होने के कारण उलझी हुई, जटिल और चमत्कारपूर्ण होती हैं। उनकी कहानी "रीछ" अपनी प्रतीकात्मकता, फन्तासी तथा यौन-चित्रों-संवादों के कारण पर्याप्त विवादग्रस्त और चर्च...
भिन्न षड्ज...
इस बार इंग्लैंड में लगभग दस वर्षों बाद ऐसी भयानक बर्फबारी हुई है। हमारे शहर वॉलसॉल में भी सड़कों पर आठ-आठ इंच बर्फ जमी थी। जिंदगी की सारी भागदौड़ पर प्रकृति ने विराम-सा लगा दिया था, यों कहूँ कि अपने-आप से बातचीत करने का एक अवसर दिया। बर्फ की व...
कुँवर नारायण श्रद्धांजलि
कविता एक उड़ान हैै। यह प्रसिद्ध पंक्तियां मेलबोर्न की साहित्य-संध्या में न जाने कितनी बार कही होंगी। इन पंक्तियों के साथ मैं कुँवर नारायण का क्या परिचय दूँ, खुद "कविता" का परिचय उनके ही शब्दों में दे दिया इतना हर्ष मुझे होता था। विद्यार्थी जीवन में...
गवाही और जिजीविषा का कवि
हिंदी जगत में कुँवर नारायण का परिचय कराने की आवश्यकता नहीं। वे तो हिंदी कविता के एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं, उनको दुनिया की अनेक भाषाओं में अनूदित किया गया है, भारत और विदेशों में उत्कृष्ट पुरस्कारों से वे सम्मानित हो चुके हैं। पर सबसे महत्त्वप...
मृत्यु और संस्कृतियों की रूपांतरण क्षमता
समकालीन हिंदी कवियों में सम्भवतः सर्वाधिक सम्मानित कवि कुँवर नारायण इस साल नब्बे वर्षीय हो जाएंगे। दक्षिण दिल्ली के चित्तरंजन पार्क स्थित उनका आवास अब भी रचनाकारों, आलोचकों एवं अन्य बुद्धिजीवियों की गोष्ठी का स्थल बना हुआ है। अपनी पीढ़ी के अंतिम बच...
हस्तक्षेप का कवि विनोद कुमार शुक्ल
विनोद कुमार शुक्ल समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण कवि हैं। अपनी कविता में उन्होंने तमाम ऐसे विषयों को जगह दी है, जिसकी जरूरत आज समाज में सबसे ज्यादा है। तेजी से भागती दुनिया में पीछे छूटे हुए लोग, रौंदी गई, लुटी गई चीजें, सताई गई जातियां, संरक्...
वैद वेदना
कथाकार कृष्ण बलदेव वैद के शब्द मेरी देह पर उड़ती हुई खाक की तरह झरते हैं और यह खाक देह पर ठहरती नहीं, पल-पल उसी में विलीन होती जाती है। आँखों की कोरों पर भाषा के काजल की तरह कुछ देर ठिठकती जरूर है जैसे किसी वाक्य की रेखा हो और जो बह जाना चाहती हो।...
नई दुनिया का पुराना कवि
दो जुलाई 2017 को दिवंगत, 21 फरवरी 1924 को नवलगढ़, राजस्थान में जन्मे और गया बिहार में पले-बढ़े श्री गुलाब खंडेलवाल हिंदी के वरिष्ठतम साहित्यकार थे।जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो कई यादें ताज़ा हो गईं। बात जुलाई 2000 की है जब मैं अपने सबसे ...
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