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शिकागो में छोटा मध्यप्रदेश
01-Sep-2019 09:56 PM 660     

शिकागो और उसके आसपास रहने वाले मध्यप्रदेश में पैदा होने वाले युवाओं ने बीते महीने आपस में मिलने-जुलने के लिये पिकनिक का आयोजन किया। इस पिकनिक में बच्चों के अलावा बुजुर्ग अभिभावकों ने भी हिस्सा लिया और जमकर लुत्फ उठाया। आयोजन की धींगामस्ती के दौरान ऐसा लग रहा था मानो सभी भारत में ही कहीं किसी स्थान पर मिल रहे हैं। अपने लोग, अपना खाना, अपनी ही बातें। घर से दूर जब इतना कुछ मिले तो घर की कमी कम खलती है।
शिकागो में "एॅमपियन्स इन ग्रेटर शिकागो" समूह हमेशा ही कुछ नया और अच्छा करने की कोशिश करता रहता है। भारतीय संस्कृति, तीज-त्यौहार, अपनों की सेवा को बढ़ावा देना इस ग्रुप का सबसे बड़ा मिशन है। एक ही संस्कृति और भाषा से जुड़े लोग जब एक-दूसरे से मिलते हैं तो जो सुकून मिलता है वो शायद कही नहीं, खास करके जब आप इतने दूर अपने देश के बाहर हों, अपने रिश्तेदार और बचपन के दोस्तों से दूर। समूह की शुरुआत करने वाले कुछ जुझारू लोगों ने पूरी तैयारी के साथ इस दिन को खास बना दिया। कार्यक्रम में लगभग डेढ़ सौ लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों की उत्सुकता उस समय देखने को मिली जब बहुत सुबह से उन्होंने रजिस्ट्रेशन के लिए आना शुरू कर दिया।
रजिस्ट्रेशन की औपचारिकता के बाद शुरू हुआ पोहे (सेंव, जीरावन के साथ) जलेबी, समोसे के नाश्ते का दौर और परिचय का सिलसिला। ऐसा लगा कि मध्यप्रदेश के अनेक शहर और गांवों के लोग आज यहीं पर एकत्रित हो गये हैं। सभी परिवारों के लोग आपस में ऐसे मिल रहे थे मानो निकट के रिश्तदारों से कई दिनों के बाद मिले हों। कोई नीमच तो कोई खुरई का था। कोई ग्वालियर तो कोई निवाड़ी से ताल्लुक रखता था। किसी को आपस में नहीं बताना-समझाना था कि कहाँ है दतिया, तो कहाँ है दमोह और देवास।
कहीं पुराने भोपाल और बड़े तालाब की बातें चल रहीं थीं तो कहीं इंदौर के ओल्ड पलासिया और राजवाड़े की बातें। कोई ओरछा के रामराजा के दर्शन की बात कर रहा था तो कोई होशंगाबाद के सेठानी घाट के स्नान की। लोगों की आँखों की चमक उनके चेहरे की ख़ुशी बयां कर रही थी।
ऐसा नहीं था कि बस हम सब ही खुश और व्यस्त थे, बच्चों और उनके दादा-दादी, नाना-नानी ने जब लेमन रेस में जोर-शोर से हिस्सा लिया तो उनका उत्साह देखते ही बना। फिर दिन में दाल बाटी ने तो जैसे मन, आत्मा को तृप्त ही कर दिया हो और उसके ऊपर मसाला छाछ की बात ही अलग थी। बाद में फिर तम्बोला खेलने का अलग ही मज़ा था। तम्बोला के टिकट भी मध्यप्रदेश के व्यंजनों को ध्यान में रखकर बनाये गए थे जो की बहुत ही रुचिकर था।
मध्यप्रदेश पर आधारित क्विज़ एक विशेष आकर्षण था। इसमें लोगों ने बहुत आनंद उठाया और अपनी संस्कृति के बारे में बहुत कुछ जाना।
आखिर में सेंव परमल (कतरे प्याज़, जीरावन सहित) और अदरक बाली चाय की चुस्कियों का क्या कहना और फिर अपना राष्ट्रगान गाकर स्वतंत्रता दिवस भी एक साथ मनाया गया।
मेरे भाई श्री राजेंद्र राय जो वाशिंगटन डीसी में कुछ मध्यप्रदेश वासियों के साथ मिलकर इस तरह के अनेक सामाजिक कार्यों में संलग्न हैं, को भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने का मौका मिला। कॉलेज के दिनों के बहुत से लोगों से मिलकर पुरानी सारी यादें जैसे आँखों के सामने आ गईं। इस आयोजन की अधिकांश अभिभावकों ने प्रशंसा की। मेरे माता-पिता समाज सेवा में गहरे विश्वास रखते हैं। वे इस आयोजन को देखकर भाव-विभोर हो गये।
इस समूह की कार्यकारणी टीम ने ग्रुप को एक नये मुकाम तक अपनी मेहनत और लगन से पहुँचा दिया है। बहुत कम ही लोग हैं जो इस तरह की सोच और पहल करके आगे बढ़ पाते हैं। अपने लोगों से मेल-मुलाकात और समूह सेवा का भाव एक प्रेरक तत्व है जो यहाँ सभी के कामों में देखने को मिलता है।
समूह के सक्रिय कार्यकत्र्ता सर्वश्री आनंद तिवारी, मनीष शर्मा, अभिषेक जैन, नागेश राय, ऋषभ बोथरा, विपिन बोथरा, इंदु तिवारी, ऋचा शर्मा, शालू जैन अमेरिका में मध्यप्रदेश का अलख जगा रहे हैं। पिछले साल दिवाली पर मध्यप्रदेश के 12 लोगों का यह समूह शिकागो के ही 200 लोगों के साथ जुड़ कर बड़ा आकार ले चुका है और इस तरह शिकागो में एक छोटे-से मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। समूह के उत्साही कामों का नतीजा है कि हरेक सदस्य कुछ नया करने के इच्छा से भर उठता है।
समूह ने आगामी दीपावली मिलन समारोह की तिथि 19 अक्टूबर 2019 अभी से घोषित कर दी है। सभी लोगों ने बढ़-चढ़कर इसमें शामिल होने की उत्सुकता जाहिर की जो कि आने वाले दिनों में बहुत से सामाजिक कार्यक्रमों के लिए एक बहुत बड़ा प्रोत्साहन है।

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