ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
शकुन्तला बहादुर
शकुन्तला बहादुर

अनंतचतुर्दशी 1934 को लखनऊ में जन्म. एम.ए. (संस्कृत) में सर्वाधिक अंकों का पदक हासिल किया. जर्मन एकेडेमिक एक्सचेंज सर्विस की फ़ेलोशिप पर जर्मनी में दो वर्षों तक शोधकार्य. ट¬ूबिंगेन वि·ाविद्यालय में ही संस्कृत एवं हिन्दी का अध्यापन. महिला महाविद्यालय लखनऊ में संस्कृत प्रवक्ता. विभागाध्यक्ष एवं प्रधानाचार्या के पदों पर कुल 36 वर्षों तक कार्य करते हुए सेवानिवृत्त. योरोप तथा अमेरिका की साहित्यिक-गोष्ठियों में भाग लेते हुए अनेक देशों का भ्रमण. विगत 15 वर्षों से कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका में निवास. प्रकाशित कृतियाँ : "मृगतृष्णा' एवं "बिखरी पंखुरियाँ' - काव्यसंग्रह, "विविधा' - ललित निबन्ध-संग्रह, "सुधियों की लहरें' - लेख एवं संस्मरण. सम्पर्क : द्मण्ठ्ठत्त्द्वदडठ्ठण्ठ्ठड्डद्वद्धऋन्र्ठ्ठण्दृदृ.ड़दृथ्र्


ऋतुराज बसन्त

आ गया ऋतुराज बसन्त ।
छा गया ऋतुराज बसन्त ।।
हरित घेंघरी पीत चुनरिया  
पहिन प्रकृति ने ली अँगड़ाई
नव-समृद्धि पा विनत हुए तरु
झूम उठी देखो अमराई।
आज सुखद सुरभित सा क

कैलिफ़ोर्निया में छज्जू का चौबारा

सारी दुनिया देखी हमने
देखा बल्ख़ बुख़ारे में
पर वह बात नहीं पाई
जो छज्जू के चौबारे में।
कैलिफ़ोर्निया के कूपरटीनो नगर में प्रतिष्ठित छज्जू का चौबारा इस उक्ति को सार्थक करता है। ये

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