ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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रामफल का झोला

योअर ऑनर, बड़ा भाई कत्र्ता था। पिता ने जमीन के तीन हिस्से किये थे। एक इनका, एक आवेदक का और एक आवेदक के पुत्र का। बड़े भाई को बच्चा नहीं था। बाद में इनके यहाँ बीस साल के बाद हुआ, इसलिए ये आवेदक के पुत

होना शुरू होना

सागर शहर की झील के किनारे नजरबाग की सीढ़ियों पर बैठा निर्मल वर्मा के निबन्धों की किताब -- शब्द और स्मृति -- पढ़ रहा हूँ। जैसे कोई जलस्रोत किसी नदी में मिल जाने के लिए आकुल हो। दूर ठहरी हुई शब्दों की

घर सँवरने से दुनिया सँवरती है

मेरा घर अब दोस्तों को अपने घर से दूर लगता है। मुझे बच्चे घर से दूर लगते हैं। मैं भी घर से कुछ दूर जाता सा लगता हूँ। क्या घर से दूर जाने के लिए ही घर में रहने आया हूँ? श्यामला हमेशा घर में रहती है।

तरक्की की राह पर दौड़ने के आशय

यहाँ कनाडा में हम साल में दो बार समय के साथ छेड़छाड़ करते हैं जिसे डे लाईट सेविंग के नाम से जाना जाता है। एक तो मार्च के दूसरे रविवार को समय घड़ी में एक घंटा आगे बढ़ा देते हैं और नवम्बर के पहले रविवार

शहरों का शहर

पेरिस के प्रवास में जो भला-बुरा देखा अगर वो सब बताने की कोशिश की जाए तो कभी बातें ही ख़त्म ना हों। कम ही लोगों को मालूम होगा कि पेरिस को फ्रेंच में पाही बोला जाता है। आज भले ही एफ़िल टॉवर इस नगर की प

इंडोनेशिया में भारतवंशी छवियाँ

इंडोनेशिया के प्रवासी भारतीयों पर बात करने बैठे तो दिल-दिमाग की डायरी के बहुत से पन्ने खुलते जा रहे हैं। पहली बार वहां एक अध्यापक के तौर पर जाने का मौका मिला। उस समय बहुत सी ऊहापोह थी, लेकिन जाने क

वर्जीनिया इज़ फ़ॉर लवर्स

हिंदुस्तान की सर ज़मीन से विवाहोपरांत जब पैर उखड़े तो सीधे अमेरिका की धरती पर आकर पड़े। यहाँ की चौड़ी-चौड़ी, साफ़-सुथरी सड़कें, उन पर क़तारों में चलती बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, गगनचुंबी इमारतें और इन सबसे कुछ ही दू

मुंबई की बरसात

इस साल जून के महीने में बरसात का कहीं नामोनिशाां नहीं दिखा। गरमी और पसीने से त्राहिमाम् करते लोगों को देखकर पिछले बरस की बरसात की शाुरूआत का खूबसूरत मंजर अनायास ही आंखों के आगे झूम उठता है। मई का म

बारिश में मुंबई

समुंदर की लहरें उफान पर हैं। किनारे से टकराकर, किनारे को भिगोकर, कोलतार की स्याह सड़कों पर उछलकर फिर से लौट रही है, समुंदर में। किनारे से दूर खड़ी उस चाय की टपरी से "बरखा रानी, जरा जमके बरसो, मेरा दि

हिमाचल में बरसात का रोमांच

देश के मैदानी इलाकों में भले ही बरसात का मौसम आफत लेकर आता हो लेकिन ऊँचे पहाड़ों पर यही बरसात कुदरत की खूबसूरत नैमतें लेकर आती है। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाये तो बरसात पहाड़ों को इस तरह सजाती संवारत

बोले रे पपीहरा, अब घन गरजे

मेघाच्छादित आकाशा को देख मयूर नाचने लगते हैं। पपीहा "पिय आया, पिय आया' गाने लगता है।
दादुर और झींगुर अपनी हर्षध्वनि से पावस ऋतु का स्वागत करते हैं। कुल मिलाकर, प्रकृति के संगीत
और मानवी

तलाश एक भूमि की

मंगरू आज ठीक समय पर आजा के पास आकर बैठ गया। आज उसके साथ उस का दोस्त सरजू भी आया था। मंगरू ने कहा - आजा, कल आपने फत्तेल रोज़ाक के आने की कहानी सुनायी, बहुत दर्द भरी कहानी थी। रोचक तो थी ही। आप ने कहा

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