btn_subscribeCC_LG.gif
शब्द Next
शून्य : विश्व को भारतवर्ष की सौगात
आंग्ल नववर्ष आ पहुँचा। सांस्कृतिक विविधता वाले इस देश में अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी-अपनी परम्पराओं, मान्यताओं और सुविधाओं के अनुसार अलग-अलग समय पर अपना-अपना नववर्ष मनाने का रिवाज़ है; तथापि वैश्विक एकरूपता और मकर संक्रांति के आगमन के कारण जनवरी मा...
मासानाम् मार्ग-शीर्षः अहम्
हेमन्त ऋतु का आगमन हो चुका। हेमन्त का नामकरण हिम (ड़दृथ्ड्ड) से हुआ है। हिम शब्द की व्युत्पत्ति है - हन्, मारना और मक् प्रत्यय; यहाँ हन् की जगह "हि" ले लेता है। भारत में मध्य नवम्बर से मध्य जनवरी तक हेमन्त का समय है। यह भीषण जाड़े की ऋतु है। इस कारण...
अज्ञान-तिमिर से ज्ञान-वर्चस् की ओर
यह पवमान मन्त्र या पवमान अभ्यारोह है, जो वैदिक युग में ज्योतिष्टोम (ज्योतिस् स्तोम या ज्योति यज्ञ) के समय गाया जाता था। वैदिक संस्कृति में पवन और पावक को पवित्र (पूङ्, पवित्र करना) करने वाला माना गया। "पवमान" (पूङ्, पवित्र करना और शानच् प्रत्यय) म...
आश्विन का प्रभात और शिउली फूल
आश्विन के शारदीय प्रभात में बज उठे आलोक मंजीरे लुप्त हो चलीं पावस की मेघमालाएँ धरती के बाह्याकाश में प्रकृति के अंतराकाश में जाग उठी ज्योतिर्मयी जगन्माता के आगमन की गाथाएँ बचपन से ही आकाशवाणी केंद्रों से हर वर्ष पित...
सावन का महीना : डमरु बाजै चहुँओर
सावन आ गया। सावन अथवा श्रावण माह का नामकरण इस महीने की पूर्णिमा पर चन्द्रमा का श्रवण नक्षत्र के आसपास होना है। श्रवण नक्षत्र में तीन तारे हैं, जिन्हें वैष्णव मत मानने वाले वामन रूपधारी विष्णु का तीन पग बताते हैं। वामन ने पहले पग में आकाश नाप दिया ...
वर्षा बहार : रस की फुहार
यह मॉनसून का समय है। भारतवर्ष के लिए मॉनसून मात्र हिन्द महासागर में उठने वाली व्यापारिक हवा नहीं है, बल्कि यह एक भव्य, जटिल और रहस्यमय घटना है। यह कविता है - हवा, दवाब, वर्षा और उससे प्रभावित भारतीय जन-गण-मन के जटिल निकाय की। मॉनसून का अरबी मूल है...
ओ आषाढ़ के काले बादल
प्रिये! आया ग्रीष्म खरतर!सूर्य भीषण हो गया अब, चन्द्रमा स्पृहणीय सुन्दर,कर दिए हैं रिक्त सारे वारिसंचय स्नान कर कर,रम्य सुखकर सांध्यवेला शान्ति देती है मनोहर,शान्त मन्मथ का हुआ है वेग अपने आप बुझ कर,दीर्घ तप्त निदाघ द...
जेठ जरै जग, चलै लुवारा
ग्रीष्म का आगमन हो गया। ग्रीष्म शब्द - ग्रसु अदने (खाना, निगलना) और मक् प्रत्यय से व्युत्पन्न हुआ है। इस ऋतु में काल हमें निवाला बनाना चाहता है। कोई कारण पूछ सकता है, "भला ऐसा क्यों होता है?" इसका उत्तर है कि ग्रीष्म निदाघ काल है। निदाघ - नि (हमेश...
काल
कलयति संख्याति सर्वान् पदार्थान् स कालः। जो जगत् के सब पदार्थों और जीवों को आगे बढ़ने को बाध्य करता है और उनकी संख्या (आयु) करता है, वही काल है।"कल संख्याने" धातु में "अच" प्रत्यय करने से "काल" शब्द बनता है। "कल" का दो अर्थ है - 1. गिनना या ग...
QUICKENQUIRY
Related & Similar Links
Copyright © 2016 - All Rights Reserved - Garbhanal - Version 19.09.26 Yellow Loop SysNano Infotech Structured Data Test ^