ISSN 2249-5967

 

सुषमा शर्मा

सम्पादक
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वर्षा बहार : रस की फुहार
वर्षा बहार : रस की फुहार

यह मॉनसून का समय है। भारतवर्ष के लिए मॉनसून मात्र हिन्द महासागर में उठने वाली व्यापारिक हवा नहीं है, बल्कि यह एक भव्य, जटिल और रहस्यमय घटना है। यह कविता है - हवा, दवाब, वर्षा और उससे प्रभावित भारती ...

01-Jul-2018 05:25 AM 107
ओ आषाढ़ के काले बादल
ओ आषाढ़ के काले बादल

प्रिये! आया ग्रीष्म खरतर!
सूर्य भीषण हो गया अब, चन्द्रमा स्पृहणीय सुन्दर,
कर दिए हैं रिक्त सारे वारिसंचय स्नान कर कर,
रम्य सुखकर सांध्यवेला शान्ति देती है मनोहर,
शान्त मन्मथ का ...

01-Jun-2018 12:59 AM 240
जेठ जरै जग, चलै लुवारा
जेठ जरै जग, चलै लुवारा

ग्रीष्म का आगमन हो गया। ग्रीष्म शब्द - ग्रसु अदने (खाना, निगलना) और मक् प्रत्यय से व्युत्पन्न हुआ है। इस ऋतु में काल हमें निवाला बनाना चाहता है। कोई कारण पूछ सकता है, "भला ऐसा क्यों होता है?" इसका ...

01-May-2018 06:22 PM 406
काल
काल

कलयति संख्याति सर्वान् पदार्थान् स कालः। जो जगत् के सब पदार्थों और जीवों को आगे बढ़ने को बाध्य करता है और उनकी संख्या (आयु) करता है, वही काल है।
"कल संख्याने" धातु में "अच" प्रत्यय करने से "काल ...

01-Apr-2018 03:23 AM 450
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